*बहुजनों की सभी समस्याओं का अचूक उपाय- भीमास्त्र (problem of rupees)*
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🍁🍁9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳
इतिहास के आईने मे जब हम देखते हैं तो पाते हैं क़ि बहुजन महापुरुषों ने *अभी तक जो भी संघर्ष किया है। वह बनी बनाई व्यवस्था मे हिस्सेदारी के लिए किया है।* जबकि आधुनिक काल मे चालू व्यवस्था का निर्माता चिरपरिचित दुश्मन ही रहा है।
इस छीना झपटी रूपी व्यवस्था / संघर्ष मे जितनी ऊर्जा हमारे महापुरुषों ने खडन या विरोध मे लगाई है यदि उसकी आधी ऊर्जा भी दूसरी समानांतर व्यवस्था बनाने मे लगाते तो जाने कब का भारत देश मूलनिवासियों का अपने हाथों मे होता।
मगर ऐसा नही किया गया।
कालांतर मे इस बात का अहसास डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को हुआ। जिसके कारण समानांतर व्यवस्था खड़ी करने के लिए ही व एक भारतीय पहचान बनाने के लिए ज्यूं ही धर्मान्तरण का विशाल कदम उन्होंने उठाया।
वैसे ही ब्रह्म का सिंहासन डोलने लगा।
नतीजे मे 2 महीने के अंदर ही अंदर देवी जिहादी सविता सारस्वत द्वारा हत्या करा दी गई।
सवाल उठता है क़ि अभी वर्तमान मे क्या किया जाये?
तो इसके जबाब मे आपको सोचना होगा क़ि बहुसंख्य भारतवासी दुखी पीड़ित परेशान क्यों हैं?
कुछ सतही समझ रखने वाले लोग बोल सकते हैं क़ि ब्राह्मण या ब्राह्मणवाद को मिटाना होगा।
जबकि मैं ऐसा बिल्कुल नही मानता।
तो आज भारतवासियो की *मुख्य जरूरत* है। रोटी कपड़ा और मकान ही न????
और *मुख्य समस्या* है पेट्रोडॉलर के एवज मे जारी किये जा रहे फर्जी कागजी नोट जिन्हें अब बन्द कर केवल नम्बरो (कम्प्यूटर/ फोन की संख्याओं) द्वारा पूरे देशवासियो की रेकी करने की तैयारी कर ली गयी है।
जहां तक जरूरतों की बात है तो वह भी फर्जी कागजी/ अंक रूपी मुद्रा से ही नियंत्रित है।
ऐसे मे जब हम जान रहे हैं क़ि सभी समस्याओं की जड़ ये रुपया ही है।
*ये पैसा ही है जो अपनो को अपनो से दूर किये है।* अर्थात जबकि मुख्य बात संख्याये या फर्जी कागजी नोट नही है। मुख्य बात तो लोकव्यवहार मे उस फर्जी कागजी मुद्रा की मान्यता है।
आई बात कुछ समझ मे.....?
ऐसे मे क्या हम सब मूलनिवासी लोग मिलकर यह तय नही कर सकते क़ि *हम आपस मे सरकार द्वारा चलाई जा रही फर्जी कागजी मुद्रा का लेन देन नही करेंगे। बल्कि बहिस्कार करेगें।*
इसकी *जगह पर वस्तु विनिमय या सेवा विनिमय करेंगे।*
अथवा सभी मूलनिवासी एकमत एकजुट होकर सारी संपत्ति (जो सब जानते हैं क़ि नश्वर है यही रह जायेगी) का मूल्यांकन कर एक उस मूल्य के एवज मे नई मुद्रा खड़ी कर दें। जैसे क़ि आज कल bit coin आदि का चलन प्रारम्भ हुआ है।
यदि ऐसा हम लोग कर सकें तो पूरा पुजारीवाद जो बनियो की पूंजी व व्यापार पर टिका है। चन्द समय मे बिना किसी खूनी क्रांति या गाली गलौज या संघर्ष के ही खत्म हो जायेगा।
और भारत मे मूलनिवासी द्वारा मूलनिवासियो के लिए मूलनिवासियो की भारतभूमि पर उनका राज होगा। फिर भारत माँ की सेवा करो।
बनी रहने दो फौज पुलिस आदि इसकी कोई जरूरत ही नही आयगी।
जबकि संघियो को आज चल रही व्यवस्था पर खर्च लगातार जारी रहेगा। व्यवस्था बनाये रखने पर खर्च होता है क़ि नहीं???🤔
जिसके कारण पण्डे पुजारी अपने आप चल रही व्यवस्था का खात्मा करने को विवश होंगे। और बहुजन दूर खड़े खड़े आजादी का जश्न मनायेगें।
*क्या आप लोग ऐसा करना चाहोगे???*
पंडा पुजारी वर्ग आपके पास आये तो उसे अपने लोगो मे चल रही मुद्रा देने पर पहले तो वह फेंकेगा मगर जब यह मुद्रा व्यवस्था प्रस्थापित हो जायेगी तो आपके पास चमचागीरी भी करेगा।
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अम्बेडकर द्वारा निर्धारित समता स्वतंत्रता बन्धुत्व स्वतः स्थापित होगा।
क्योंकि ऊँच नींच छोटा बड़ा रूपी असमानता इस रुपये या मुद्रा के कारण ही है। जब सारे बहुजनो की संपत्ति एक जगह इकट्ठी हो गई तो समता तो स्वतः स्थापित हो ही जायेगी। यह एकजुटता बिना बंधुत्व के नही आ सकती इस लिए बंधुत्व भी स्थापित होगा।
जब समता व बंधुत्व स्थापित हो जायेगे तो आपकी स्वतंत्रता को कौन छीन पायेगा???
है किसी मे हिम्मत??🤔
*कौन आपको जबरजस्ती कहेगा क़ि टीवी अखवार फ्रिज कूलर गाड़ी बंगला AC आदि प्रयोग करो ही। नही तो सजा दी जायेगी???*
यदि ऐसा हो भी तो फ्री मे मांगो। जाहिर है क़ि कोई नही देगा।
अंग्रेज भारत से भागने को इसी प्रकार तो विवश हुए थे।
जब अंग्रेज भाग सकते हैं तो पण्डे पुजारियो की क्या औकात?
उसके बाद ही तो न्याय की बारी आएगी......🤔
आई बात कुछ समझ मे????
ऐसा नही है क़ि इस विचार पर कही कोई काम नही हो रहा है। बिल्कुल हो रहा है...
आप लिंक देखे क़ि आज भी लोग बिना मुद्रा या बहुत कम मुद्रा मे ही कैसे खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
इस समस्या का समाधान योजना पर काम कर्नल गद्दाफी जी कर रहे थे। गद्दाफ़ी जी की योजना थी पूरे अफ्रीका को मिलाकर एक मुद्रा चला कर पेट्रोडॉलार व अमेरिकी बर्चस्व को खत्म करनी की।
जिसकी भनक लगने के कारण ही NATO फौजो द्वारा निर्दोष कर्नल गद्दाफी जी पर अनर्गल आरोप लगा कर मार डाला गया।
आप सोचते रहे क़ि वो तानाशाह शासक हैं जबकि वो पूरी मानवता के लिए काम कर रहे थे। उनकी जनता बिल्कुल सुखी थी। अधिक जानकारी के लिए उनके द्वारा लिखित the green book किताब पढ़े। जिसमे कर्नल गद्दाफी जी का पूरा एक्शन प्लान उपलब्ध है।
हां एक खतरा है। तुम्हारा गुरूर जरूर टूट जायेगा।
अपनो को छोटा बडा मानने की समस्या खत्म होने से गरीब अमीर की खाई खत्म हो जायेगी
तुम्हारा रुतबा व फर्जी कुकुर की भांति फूलना पचकना भी बन्द हो जायेगा।
क्यों क़ि ऐसा नही हो सकता क़ि समता स्थापित हो जाये लेक़िन देश की आधी संपत्ति के मालिक आप बने रहो..
ऐसा न हो सकेगा।
मिटना होगा।
वो भी थोड़ा नही बल्कि पूरी तरह से....
खास कर समता स्थापित होने तक।
बाद मे जब सारी व्यवस्था आपके हाथ आ जाये तो जो चाहे वो करना.....
आपका यह सोचना क़ि मेरा जन्म मानव निर्मित उपकरणों पर आश्रित बनकर परजीवी जीवन जीने के लिए हुआ है तो यह धारणा ही गलत है।
आप इन्शान रूपी एक प्राणि मात्र है जिसकी औकात कुत्ते बिल्ली काकरोच से ज्यादा नही है।
स्वय को नेपोलियन न समझें...
इसी सबको सोच कर ही तो सतगुरु कबीर साहेब ने कहा था क़ि *जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी बैठ- मैं बैरी डूबन ड़री रही किनारे बैठ*।
ऐसे न चलेगा।
आजादी चाहिए तो बनी बनाई व्यवस्था मिटानी होगी।
जिसके आप आदी हैं।
आप स्वयं पोषक हैं।
इस आदत को छुड़ाने मे लिए स्वयं को भी मिटाना होगा।
जब आप मिटने मिटाने को ततपर होंगे तो कोई पण्डा पुजारी आपको मिटा सकेगें???
आज़ादी तुम्हारे कदम चूमेगी। फिर करो हिसाब पूरे 5000 सालों का वो भी ब्याज सहित।
यही तो है असली समाधान हिसाब किताब चुक्ति करने का।
ये नहीं हो सकता क़ि दुश्मन के द्वारा डाले गए टुकड़ो के लिए तुम कुत्तो की तरह लड़ते रहो। इन टुकड़ों की लड़ाई के लिए विचारधारा चाहे समाजवादी हो, साम्यवादी हो या अम्बेडकरवादी कोइ फर्क नही पड़ने वाला।
मूलतया तो व्यवस्था ही गलत आपने अपने ऊपर थोप रखी है।
आप देखो सभी बहुजन नेता इसी सडयंत्र मे फंसे हुए हैं किसी के पीछे CBI लगी है तो किसी के पीछे income tax आदि।
*यदि नही आपको मेरी बात समझ मे आये तो भी जिस गति से संघी भगवा फहरा रहा है यदि यही गति बनी रही तो अगले दस सालो मे ही जो जाति जिस काम से जानी जाती रही है वह उसी काम को करने को विवश होगी। सोचो तब क्या तुम्हारी नौकरी टीवी गाड़ी, बड़ा घर, प्लाट, धन दौलत बच पायेगी???*
आपका नींच ब्राह्मण धर्मी होने के कारण आपको पता होगा क़ि आपको धन, दौलत, सम्मान आदि का कोई अधिकार है ही नहीं।
इसलिए जब सामने देख रहे हो क़ि आफत आ रही है तो उपाय पर अमल करना व कराना शुरु करो । सफलता की गारंटी मेरी।
5000 सालों का हिसाब भी पूरा और मिशन भी पूरा।
*बोलिये क्या आप है तैयार?* खुदी को इस स्तर तक बुलन्द करो क़ि खुदा स्वयं पूंछे बता तेरी रजा क्या है।
बंद करो रोना धोना- खण्डन मण्डन।
*we cannot create solutions from the same consciousness level that’s creating the problems.* इसलिए बेहोशी छोड़ो - होश मे आओ।
इन्द्रियों द्वारा निर्मित विभिन्न आभास होश नही है बल्कि यह इन्द्रिय आभास बेहोशी मे डाले रखने का ठोस कारक है। चेतना पराअनुभूतिक होश होती है।
बन्दे मातरम्🇮🇳
भारत माता की जय🇮🇳
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भूमि नमो भारत
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इतिहास के आईने मे जब हम देखते हैं तो पाते हैं क़ि बहुजन महापुरुषों ने *अभी तक जो भी संघर्ष किया है। वह बनी बनाई व्यवस्था मे हिस्सेदारी के लिए किया है।* जबकि आधुनिक काल मे चालू व्यवस्था का निर्माता चिरपरिचित दुश्मन ही रहा है।
इस छीना झपटी रूपी व्यवस्था / संघर्ष मे जितनी ऊर्जा हमारे महापुरुषों ने खडन या विरोध मे लगाई है यदि उसकी आधी ऊर्जा भी दूसरी समानांतर व्यवस्था बनाने मे लगाते तो जाने कब का भारत देश मूलनिवासियों का अपने हाथों मे होता।
मगर ऐसा नही किया गया।
कालांतर मे इस बात का अहसास डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को हुआ। जिसके कारण समानांतर व्यवस्था खड़ी करने के लिए ही व एक भारतीय पहचान बनाने के लिए ज्यूं ही धर्मान्तरण का विशाल कदम उन्होंने उठाया।
वैसे ही ब्रह्म का सिंहासन डोलने लगा।
नतीजे मे 2 महीने के अंदर ही अंदर देवी जिहादी सविता सारस्वत द्वारा हत्या करा दी गई।
सवाल उठता है क़ि अभी वर्तमान मे क्या किया जाये?
तो इसके जबाब मे आपको सोचना होगा क़ि बहुसंख्य भारतवासी दुखी पीड़ित परेशान क्यों हैं?
कुछ सतही समझ रखने वाले लोग बोल सकते हैं क़ि ब्राह्मण या ब्राह्मणवाद को मिटाना होगा।
जबकि मैं ऐसा बिल्कुल नही मानता।
तो आज भारतवासियो की *मुख्य जरूरत* है। रोटी कपड़ा और मकान ही न????
और *मुख्य समस्या* है पेट्रोडॉलर के एवज मे जारी किये जा रहे फर्जी कागजी नोट जिन्हें अब बन्द कर केवल नम्बरो (कम्प्यूटर/ फोन की संख्याओं) द्वारा पूरे देशवासियो की रेकी करने की तैयारी कर ली गयी है।
जहां तक जरूरतों की बात है तो वह भी फर्जी कागजी/ अंक रूपी मुद्रा से ही नियंत्रित है।
ऐसे मे जब हम जान रहे हैं क़ि सभी समस्याओं की जड़ ये रुपया ही है।
*ये पैसा ही है जो अपनो को अपनो से दूर किये है।* अर्थात जबकि मुख्य बात संख्याये या फर्जी कागजी नोट नही है। मुख्य बात तो लोकव्यवहार मे उस फर्जी कागजी मुद्रा की मान्यता है।
आई बात कुछ समझ मे.....?
ऐसे मे क्या हम सब मूलनिवासी लोग मिलकर यह तय नही कर सकते क़ि *हम आपस मे सरकार द्वारा चलाई जा रही फर्जी कागजी मुद्रा का लेन देन नही करेंगे। बल्कि बहिस्कार करेगें।*
इसकी *जगह पर वस्तु विनिमय या सेवा विनिमय करेंगे।*
अथवा सभी मूलनिवासी एकमत एकजुट होकर सारी संपत्ति (जो सब जानते हैं क़ि नश्वर है यही रह जायेगी) का मूल्यांकन कर एक उस मूल्य के एवज मे नई मुद्रा खड़ी कर दें। जैसे क़ि आज कल bit coin आदि का चलन प्रारम्भ हुआ है।
यदि ऐसा हम लोग कर सकें तो पूरा पुजारीवाद जो बनियो की पूंजी व व्यापार पर टिका है। चन्द समय मे बिना किसी खूनी क्रांति या गाली गलौज या संघर्ष के ही खत्म हो जायेगा।
और भारत मे मूलनिवासी द्वारा मूलनिवासियो के लिए मूलनिवासियो की भारतभूमि पर उनका राज होगा। फिर भारत माँ की सेवा करो।
बनी रहने दो फौज पुलिस आदि इसकी कोई जरूरत ही नही आयगी।
जबकि संघियो को आज चल रही व्यवस्था पर खर्च लगातार जारी रहेगा। व्यवस्था बनाये रखने पर खर्च होता है क़ि नहीं???🤔
जिसके कारण पण्डे पुजारी अपने आप चल रही व्यवस्था का खात्मा करने को विवश होंगे। और बहुजन दूर खड़े खड़े आजादी का जश्न मनायेगें।
*क्या आप लोग ऐसा करना चाहोगे???*
पंडा पुजारी वर्ग आपके पास आये तो उसे अपने लोगो मे चल रही मुद्रा देने पर पहले तो वह फेंकेगा मगर जब यह मुद्रा व्यवस्था प्रस्थापित हो जायेगी तो आपके पास चमचागीरी भी करेगा।
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अम्बेडकर द्वारा निर्धारित समता स्वतंत्रता बन्धुत्व स्वतः स्थापित होगा।
क्योंकि ऊँच नींच छोटा बड़ा रूपी असमानता इस रुपये या मुद्रा के कारण ही है। जब सारे बहुजनो की संपत्ति एक जगह इकट्ठी हो गई तो समता तो स्वतः स्थापित हो ही जायेगी। यह एकजुटता बिना बंधुत्व के नही आ सकती इस लिए बंधुत्व भी स्थापित होगा।
जब समता व बंधुत्व स्थापित हो जायेगे तो आपकी स्वतंत्रता को कौन छीन पायेगा???
है किसी मे हिम्मत??🤔
*कौन आपको जबरजस्ती कहेगा क़ि टीवी अखवार फ्रिज कूलर गाड़ी बंगला AC आदि प्रयोग करो ही। नही तो सजा दी जायेगी???*
यदि ऐसा हो भी तो फ्री मे मांगो। जाहिर है क़ि कोई नही देगा।
अंग्रेज भारत से भागने को इसी प्रकार तो विवश हुए थे।
जब अंग्रेज भाग सकते हैं तो पण्डे पुजारियो की क्या औकात?
उसके बाद ही तो न्याय की बारी आएगी......🤔
आई बात कुछ समझ मे????
ऐसा नही है क़ि इस विचार पर कही कोई काम नही हो रहा है। बिल्कुल हो रहा है...
आप लिंक देखे क़ि आज भी लोग बिना मुद्रा या बहुत कम मुद्रा मे ही कैसे खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
इस समस्या का समाधान योजना पर काम कर्नल गद्दाफी जी कर रहे थे। गद्दाफ़ी जी की योजना थी पूरे अफ्रीका को मिलाकर एक मुद्रा चला कर पेट्रोडॉलार व अमेरिकी बर्चस्व को खत्म करनी की।
जिसकी भनक लगने के कारण ही NATO फौजो द्वारा निर्दोष कर्नल गद्दाफी जी पर अनर्गल आरोप लगा कर मार डाला गया।
आप सोचते रहे क़ि वो तानाशाह शासक हैं जबकि वो पूरी मानवता के लिए काम कर रहे थे। उनकी जनता बिल्कुल सुखी थी। अधिक जानकारी के लिए उनके द्वारा लिखित the green book किताब पढ़े। जिसमे कर्नल गद्दाफी जी का पूरा एक्शन प्लान उपलब्ध है।
हां एक खतरा है। तुम्हारा गुरूर जरूर टूट जायेगा।
अपनो को छोटा बडा मानने की समस्या खत्म होने से गरीब अमीर की खाई खत्म हो जायेगी
तुम्हारा रुतबा व फर्जी कुकुर की भांति फूलना पचकना भी बन्द हो जायेगा।
क्यों क़ि ऐसा नही हो सकता क़ि समता स्थापित हो जाये लेक़िन देश की आधी संपत्ति के मालिक आप बने रहो..
ऐसा न हो सकेगा।
मिटना होगा।
वो भी थोड़ा नही बल्कि पूरी तरह से....
खास कर समता स्थापित होने तक।
बाद मे जब सारी व्यवस्था आपके हाथ आ जाये तो जो चाहे वो करना.....
आपका यह सोचना क़ि मेरा जन्म मानव निर्मित उपकरणों पर आश्रित बनकर परजीवी जीवन जीने के लिए हुआ है तो यह धारणा ही गलत है।
आप इन्शान रूपी एक प्राणि मात्र है जिसकी औकात कुत्ते बिल्ली काकरोच से ज्यादा नही है।
स्वय को नेपोलियन न समझें...
इसी सबको सोच कर ही तो सतगुरु कबीर साहेब ने कहा था क़ि *जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी बैठ- मैं बैरी डूबन ड़री रही किनारे बैठ*।
ऐसे न चलेगा।
आजादी चाहिए तो बनी बनाई व्यवस्था मिटानी होगी।
जिसके आप आदी हैं।
आप स्वयं पोषक हैं।
इस आदत को छुड़ाने मे लिए स्वयं को भी मिटाना होगा।
जब आप मिटने मिटाने को ततपर होंगे तो कोई पण्डा पुजारी आपको मिटा सकेगें???
आज़ादी तुम्हारे कदम चूमेगी। फिर करो हिसाब पूरे 5000 सालों का वो भी ब्याज सहित।
यही तो है असली समाधान हिसाब किताब चुक्ति करने का।
ये नहीं हो सकता क़ि दुश्मन के द्वारा डाले गए टुकड़ो के लिए तुम कुत्तो की तरह लड़ते रहो। इन टुकड़ों की लड़ाई के लिए विचारधारा चाहे समाजवादी हो, साम्यवादी हो या अम्बेडकरवादी कोइ फर्क नही पड़ने वाला।
मूलतया तो व्यवस्था ही गलत आपने अपने ऊपर थोप रखी है।
आप देखो सभी बहुजन नेता इसी सडयंत्र मे फंसे हुए हैं किसी के पीछे CBI लगी है तो किसी के पीछे income tax आदि।
*यदि नही आपको मेरी बात समझ मे आये तो भी जिस गति से संघी भगवा फहरा रहा है यदि यही गति बनी रही तो अगले दस सालो मे ही जो जाति जिस काम से जानी जाती रही है वह उसी काम को करने को विवश होगी। सोचो तब क्या तुम्हारी नौकरी टीवी गाड़ी, बड़ा घर, प्लाट, धन दौलत बच पायेगी???*
आपका नींच ब्राह्मण धर्मी होने के कारण आपको पता होगा क़ि आपको धन, दौलत, सम्मान आदि का कोई अधिकार है ही नहीं।
इसलिए जब सामने देख रहे हो क़ि आफत आ रही है तो उपाय पर अमल करना व कराना शुरु करो । सफलता की गारंटी मेरी।
5000 सालों का हिसाब भी पूरा और मिशन भी पूरा।
*बोलिये क्या आप है तैयार?* खुदी को इस स्तर तक बुलन्द करो क़ि खुदा स्वयं पूंछे बता तेरी रजा क्या है।
बंद करो रोना धोना- खण्डन मण्डन।
*we cannot create solutions from the same consciousness level that’s creating the problems.* इसलिए बेहोशी छोड़ो - होश मे आओ।
इन्द्रियों द्वारा निर्मित विभिन्न आभास होश नही है बल्कि यह इन्द्रिय आभास बेहोशी मे डाले रखने का ठोस कारक है। चेतना पराअनुभूतिक होश होती है।
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