*बहुजनो की गंगा नदी ~माँ~ है या रखैल- एक दृश्टिकोण???*
🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा क़ि अगला विश्व युद्ध जल के लिए ही होगा। इसीलिए
united nations ने एक कार्यक्रम चला रखा है जिसका नाम है PER DROP MORE CROP. जिसके माध्यम से जल संचय व जल के औचित्यपुर्ण उपयोग की शिक्षा देशवासियो को दी जाती है।
मगर भारत देश के कथित बुद्धिजीवी जो अक्सर झामसेफ नाम के संगठन से आते हैं। अक्सर कहते पाये गए हैं क़ि गंगा नदी मात्र एक नदी है कोई माँ या पिता नही।
आपको शायद जानकारी होगी क़ि गंगा जी की शुरुआत कैलाश मानसरोवर तिब्बत से होती है। जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, विहार, बंगाल और बांग्लादेश होते हुए बंगाल की खाड़ी मे समाहित हो जाती है।
भारत सरकार के आंकड़ो के अनुसार गंगा नदी द्वारा कुल 10,86,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल सिंचित होता है।
वहीं दस लाख छियासी हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के भूगर्भ जल को रिचार्ज करने का काम भी गंगा नदी जल से ही होता है। जिसको पीकर आप जिंदा हो।
गंगा नदी की विभिन्न छोटी नदियों, नहरो, बम्बो, जलासयों आदि द्वारा
उत्तर प्रदेश मे 2,94,364 km² क्षेत्रफल,
मध्य प्रदेश का 1,98,962 km² क्षेत्रफल,
बिहार का 1,43,961 km² क्षेत्रफल,
वहीं राजस्थान का 1,12,490 km² भूभाग,
जबकि पश्चिम बंगाल का 71,485 km² भूभाग पर जीवन बिना गंगा जल के सम्भव नही हो सकता है।
वहीं हरियाणा राज्य का 34,341 km² क्षेत्रफल।
हिमाचल प्रदेश का 317 km² और दिल्ली राज्य का 1,484 km² भूभाग के साथ ही साथ पूरा बंगलादेश, नेपाल और भूटान देश गंगा नदी जल से ही सिंचित हैं।
इस बहुत बड़े भूभाग का भूगर्भ जल सहित सतही जल का रिचार्ज इसी गंगा जल पर ही आधारित है। बिना उसके आपकी भोज्य फसलें सूखेगी।आप स्वयं व आपके देशवासी भूंखो मरेंगे। अकाल पड़ेगा। औसत से मात्र 10% वारिश कम होने पर ही देश बहुत बड़े खाद्य संकट मे पहुंच जाता है। आपने संघियो कांग्रेसियो की सरकारों मे दालो, टमाटर, प्याज आदि की आसमान छूती कीमतों को महशुस किया ही होगा।
गंगा जल के सहारे ही असंख्य वन्यजीव जन्तुओ व पेड़ पौधो सहित इन्शानो की लगभग 50,00,00,000 अर्थात 50 करोड़ आबादी का जीवन सम्भव हो पा रहा है। इसीलिए माँ गंगा को सबसे ज्यादा इंशानी आबादी को सिंचित करने वाला river basin के रूप मे जाना जाता है।
इतिहास गवाह है क़ि हमेशा इंसानी सभ्यता का विकास जल स्रोत के आस पास ही हुआ है। शायद इसीलिए रहीम दास जी ने कहा भी था क़ि *रहिमन पानी राखियो बिन पानी सब शून्य*।
पानी की कीमत आपको तब पता चलती है जब आपके पास पानी की किल्लत हो।
*ऐसे मे जो नदी 10 लाख 86 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को हराभरा करती हो। जो गंगा जल 50 करोड़ इन्शानो की रगो मे दौड़ते खून के समान जीवन सम्भव किये हो।*
*ऐसे मे जो नदी दस लाख छियासी हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की प्यास बिना कोई कीमत मांगे बुझा रही हो।*
*ऐसे मे जब गंगा जी असंख्य वन्य जीवो को जीवन दिए हो।*
*ऐसे मे जबकि जो गंगा जी अरबो पेड़ पौधो को जिंदा रखकर शुध्द ऑक्सिजन का प्रवाह निरंतर बनाये हुए हो।जिसके बिना हम एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।*
*ऐसे मे जो गंगा जी असंख्य जलचरों को अपने आँचल मे छुपा कर गर्भस्त शिशु की भांति पालन पोषण करती हो।*
*क्या हमारी माँ नही कहलानी चाहिए???*
*क्या हमको माँ गंगा की गोद मे विद्यमान पेड़ पौधो से प्राप्त जीवन दायनी ऑक्सिजन की कोई कीमत महशूस नही होती है?*
कहने को तो आप भारत देश के मूलनिवासी हो मगर आपका आचरण विदेशियो जैसा है।
*क्या आपके मन मे भारत देश के संसाधनों से कोई प्रेम नही?*
*क्या यह मूलनिवासियो वाला कृत्य है या शोषण परस्त विदेशियो वाला??*
*इसलिए गंगा नदी केवल पतित पावनी मां गंगा ही नही बल्कि हम मूलनिवासियो का बलशाली पिता भी है।*
यह वही गंगा यमुना का दोआब है, जिसमे हर तरह की फसले लहलहाती है। किसान -मजदूर, छोटे -बड़े सब खुशहाल हैं। *इसी लिए इस गंगा यमुनी दोआब को खाद्यान का कटोरा कहा जाता है।*
इसी लिए दिल्ली पर शासन का रास्ता भी इसी गंगा यमुनी भूभाग (हिन्दी पट्टी) से होकर जाता है।
*यह वही भूभाग है जिसने भगवान बुद्ध, महा विद्वान चार्वाक, सतगुरु कबीर, सतगुरु रविदास जी सहित तुलसीदास जैसो को अपनी कोख मे रख कर पाला पोशा और सिंचित किया है।*
*यह वही पवित्र गंगा का दोआब है जिसमे बिना पैर जमाये न तो मुग़ल भारत पर राज कर पाये और न ही अंग्रेज।*
इसलिए इस पतित पावनी माँ गंगा को उचित सम्मान मिलना ही चाहिए। *आपको जन्म देने वाली इंशानी माँ तो है ही। मगर वह इंशानी माँ जिस प्रकृति माँ की गोद मे जीवित है हम उसे गाली कैसे दे सकते हैं?*
यह वही पावन गंगा यमुनी तहजीब है जिसने सर्वप्रथम सर्वधर्म समभाव की अवधारणा को स्वीकारा और माना। फिर चाहे वह ईसाई साम्राज्य हो या मुग़ल सल्तनत हो अथवा चक्रवर्ती सम्राट अशोक का मौर्य साम्राज्य। *यह वही गंगा यमुनी भूभाग है, जिसमे धम्म ध्वजा सबसे पहले फहराई गयी थी।*
ऐसे मे हम इस पतित पावनी माँ गंगा सहित अनन्य वीरो को वीरगाथा समेटे गंगा यमुनी दोआब की मिट्टी को सत सत शीश झुकाते हैं।🙏
और कशम खाते हैं इस पवित्र माँ गंगा के जल जंगल को असमानतापरक विदेशी फिरंगियो से आज़ाद करायेगें।💪🏾 *हम शौगंध उठाते है माँ गंगा यमुना की मिट्टी की, क़ि हम माँ गंगा सहित सभी नदियो का खोया हुआ अशोक कालीन गौरव उनके चरणों मे रखेंगे।*
*बोलिये क्या आप अब भी माँ गंगा को रंडी मानते है या अपनी अस्मिता व गौरव मयी इतिहास की शौर्यगाथा???*
*तो आइये माँ गंगा के जल को हाथ मे लेकर आज ही कशम खाये क़ि हम मूलनिवासी, माँ भारती की गंगा सहित समस्त नदीयो का खोया हुआ गौरव वापस स्थापित करेंगे।*
देखते हैं कैसे कोई हमारे मूलनिवासियो को उनकी ही पितृ भूमि से मिटाता है।
*क्या आप तैयार है शपथ लेने के लिये?*🤔
यदि हां तो उक्त वाक्य बोलते हुए अपने दोनो हाथो को जोड़ कर अंजलि मे पानी भरकर उक्त कशम को दोहराते हुए वीडियो बना कर हम सबको share करें।
भवतु सब्ब मंगलं
जय जययय भीम
स्वामी डॉ बोधी आनंद
नमो भारत जय भूमि🇮🇳🇮🇳
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🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा क़ि अगला विश्व युद्ध जल के लिए ही होगा। इसीलिए
united nations ने एक कार्यक्रम चला रखा है जिसका नाम है PER DROP MORE CROP. जिसके माध्यम से जल संचय व जल के औचित्यपुर्ण उपयोग की शिक्षा देशवासियो को दी जाती है।
मगर भारत देश के कथित बुद्धिजीवी जो अक्सर झामसेफ नाम के संगठन से आते हैं। अक्सर कहते पाये गए हैं क़ि गंगा नदी मात्र एक नदी है कोई माँ या पिता नही।
आपको शायद जानकारी होगी क़ि गंगा जी की शुरुआत कैलाश मानसरोवर तिब्बत से होती है। जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, विहार, बंगाल और बांग्लादेश होते हुए बंगाल की खाड़ी मे समाहित हो जाती है।
भारत सरकार के आंकड़ो के अनुसार गंगा नदी द्वारा कुल 10,86,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल सिंचित होता है।
वहीं दस लाख छियासी हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के भूगर्भ जल को रिचार्ज करने का काम भी गंगा नदी जल से ही होता है। जिसको पीकर आप जिंदा हो।
गंगा नदी की विभिन्न छोटी नदियों, नहरो, बम्बो, जलासयों आदि द्वारा
उत्तर प्रदेश मे 2,94,364 km² क्षेत्रफल,
मध्य प्रदेश का 1,98,962 km² क्षेत्रफल,
बिहार का 1,43,961 km² क्षेत्रफल,
वहीं राजस्थान का 1,12,490 km² भूभाग,
जबकि पश्चिम बंगाल का 71,485 km² भूभाग पर जीवन बिना गंगा जल के सम्भव नही हो सकता है।
वहीं हरियाणा राज्य का 34,341 km² क्षेत्रफल।
हिमाचल प्रदेश का 317 km² और दिल्ली राज्य का 1,484 km² भूभाग के साथ ही साथ पूरा बंगलादेश, नेपाल और भूटान देश गंगा नदी जल से ही सिंचित हैं।
इस बहुत बड़े भूभाग का भूगर्भ जल सहित सतही जल का रिचार्ज इसी गंगा जल पर ही आधारित है। बिना उसके आपकी भोज्य फसलें सूखेगी।आप स्वयं व आपके देशवासी भूंखो मरेंगे। अकाल पड़ेगा। औसत से मात्र 10% वारिश कम होने पर ही देश बहुत बड़े खाद्य संकट मे पहुंच जाता है। आपने संघियो कांग्रेसियो की सरकारों मे दालो, टमाटर, प्याज आदि की आसमान छूती कीमतों को महशुस किया ही होगा।
गंगा जल के सहारे ही असंख्य वन्यजीव जन्तुओ व पेड़ पौधो सहित इन्शानो की लगभग 50,00,00,000 अर्थात 50 करोड़ आबादी का जीवन सम्भव हो पा रहा है। इसीलिए माँ गंगा को सबसे ज्यादा इंशानी आबादी को सिंचित करने वाला river basin के रूप मे जाना जाता है।
इतिहास गवाह है क़ि हमेशा इंसानी सभ्यता का विकास जल स्रोत के आस पास ही हुआ है। शायद इसीलिए रहीम दास जी ने कहा भी था क़ि *रहिमन पानी राखियो बिन पानी सब शून्य*।
पानी की कीमत आपको तब पता चलती है जब आपके पास पानी की किल्लत हो।
*ऐसे मे जो नदी 10 लाख 86 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को हराभरा करती हो। जो गंगा जल 50 करोड़ इन्शानो की रगो मे दौड़ते खून के समान जीवन सम्भव किये हो।*
*ऐसे मे जो नदी दस लाख छियासी हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की प्यास बिना कोई कीमत मांगे बुझा रही हो।*
*ऐसे मे जब गंगा जी असंख्य वन्य जीवो को जीवन दिए हो।*
*ऐसे मे जबकि जो गंगा जी अरबो पेड़ पौधो को जिंदा रखकर शुध्द ऑक्सिजन का प्रवाह निरंतर बनाये हुए हो।जिसके बिना हम एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।*
*ऐसे मे जो गंगा जी असंख्य जलचरों को अपने आँचल मे छुपा कर गर्भस्त शिशु की भांति पालन पोषण करती हो।*
*क्या हमारी माँ नही कहलानी चाहिए???*
*क्या हमको माँ गंगा की गोद मे विद्यमान पेड़ पौधो से प्राप्त जीवन दायनी ऑक्सिजन की कोई कीमत महशूस नही होती है?*
कहने को तो आप भारत देश के मूलनिवासी हो मगर आपका आचरण विदेशियो जैसा है।
*क्या आपके मन मे भारत देश के संसाधनों से कोई प्रेम नही?*
*क्या यह मूलनिवासियो वाला कृत्य है या शोषण परस्त विदेशियो वाला??*
*इसलिए गंगा नदी केवल पतित पावनी मां गंगा ही नही बल्कि हम मूलनिवासियो का बलशाली पिता भी है।*
यह वही गंगा यमुना का दोआब है, जिसमे हर तरह की फसले लहलहाती है। किसान -मजदूर, छोटे -बड़े सब खुशहाल हैं। *इसी लिए इस गंगा यमुनी दोआब को खाद्यान का कटोरा कहा जाता है।*
इसी लिए दिल्ली पर शासन का रास्ता भी इसी गंगा यमुनी भूभाग (हिन्दी पट्टी) से होकर जाता है।
*यह वही भूभाग है जिसने भगवान बुद्ध, महा विद्वान चार्वाक, सतगुरु कबीर, सतगुरु रविदास जी सहित तुलसीदास जैसो को अपनी कोख मे रख कर पाला पोशा और सिंचित किया है।*
*यह वही पवित्र गंगा का दोआब है जिसमे बिना पैर जमाये न तो मुग़ल भारत पर राज कर पाये और न ही अंग्रेज।*
इसलिए इस पतित पावनी माँ गंगा को उचित सम्मान मिलना ही चाहिए। *आपको जन्म देने वाली इंशानी माँ तो है ही। मगर वह इंशानी माँ जिस प्रकृति माँ की गोद मे जीवित है हम उसे गाली कैसे दे सकते हैं?*
यह वही पावन गंगा यमुनी तहजीब है जिसने सर्वप्रथम सर्वधर्म समभाव की अवधारणा को स्वीकारा और माना। फिर चाहे वह ईसाई साम्राज्य हो या मुग़ल सल्तनत हो अथवा चक्रवर्ती सम्राट अशोक का मौर्य साम्राज्य। *यह वही गंगा यमुनी भूभाग है, जिसमे धम्म ध्वजा सबसे पहले फहराई गयी थी।*
ऐसे मे हम इस पतित पावनी माँ गंगा सहित अनन्य वीरो को वीरगाथा समेटे गंगा यमुनी दोआब की मिट्टी को सत सत शीश झुकाते हैं।🙏
और कशम खाते हैं इस पवित्र माँ गंगा के जल जंगल को असमानतापरक विदेशी फिरंगियो से आज़ाद करायेगें।💪🏾 *हम शौगंध उठाते है माँ गंगा यमुना की मिट्टी की, क़ि हम माँ गंगा सहित सभी नदियो का खोया हुआ अशोक कालीन गौरव उनके चरणों मे रखेंगे।*
*बोलिये क्या आप अब भी माँ गंगा को रंडी मानते है या अपनी अस्मिता व गौरव मयी इतिहास की शौर्यगाथा???*
*तो आइये माँ गंगा के जल को हाथ मे लेकर आज ही कशम खाये क़ि हम मूलनिवासी, माँ भारती की गंगा सहित समस्त नदीयो का खोया हुआ गौरव वापस स्थापित करेंगे।*
देखते हैं कैसे कोई हमारे मूलनिवासियो को उनकी ही पितृ भूमि से मिटाता है।
*क्या आप तैयार है शपथ लेने के लिये?*🤔
यदि हां तो उक्त वाक्य बोलते हुए अपने दोनो हाथो को जोड़ कर अंजलि मे पानी भरकर उक्त कशम को दोहराते हुए वीडियो बना कर हम सबको share करें।
भवतु सब्ब मंगलं
जय जययय भीम
स्वामी डॉ बोधी आनंद
नमो भारत जय भूमि🇮🇳🇮🇳
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