क्या सिद्धार्थ गोतम के पिता शुद्धोधन जी कपिलवस्तु राज्य के राजा थे या मूलनिवासी गण परम्परा मे आदिवासियों के मुखिया जी थे-एक दृष्टिपात?
*क्या सिद्धार्थ गोतम के पिता शुद्धोधन जी कपिलवस्तु राज्य के राजा थे या मूलनिवासी गण परम्परा मे आदिवासियों के मुखिया जी थे-एक दृष्टिपात?*
🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर रचित buddha and his dhamma पुस्तक मे उन्होंने बिंदुवार लिखा है क़ि In sixth century B.C., Northern India did not form a single Sovereign State.
2. The country was divided into many States, some large, some small. Of these some were monarchical and some non-monarchical.
अर्थात
बिंदु संख्या 2 कहती है क़ि 6वी शताब्दी ईसापूर्व मे उत्तर भारत छोटे छोटे राज्यो मे बंटा हुआ था। जिसमे कुछ राज्यों के मुखिया monarch या राजा हुआ करता था और कुछ का मुखिया राजा नही हुआ करता था।
वहीं डॉ बाबासाहेब आगे लिखते हैं क़ि
3. The monarchical States were altogether sixteen in number. They were known by the name of Anga, Magadha, Kasi, Kosala, Vriji, Malla, Chedi, Vatsa, Kuru, Panchala, Matsya,
Saursena, Asmaka, Avanti, Gandhara and Kambhoja.
अर्थात
बिंदु संख्या 3 कहता है क़ि ऐसे 16 राज्य थे जिनके राजा (monarch) हुआ करते थे उनके नाम है. 1-अंग
2- मगध
3- काशी
4- कोशल
5- वृजि
6- मल्ल
7- छेदि
8- वत्स
9- कुरु
10- पंचाल
11- मत्स्य
12- सौरसेना
13- असमका
14- अवंती
15- गांधार
16- कम्बोज
वहीं आगे वर्णित करते हुए लिखते हैं क़ि
4. The *non-monarchical States were those of the Sakyas of Kapilvatsu,* the Mallas of Pava
and Kushinara, the Lichhavis of Vaisali, the Videhas of Mithila, the Koliyas of
Ramagam, the Bulis of Allakapa, the Kalingas of Resaputta, the Mauriyas of Pipphalvana
and the Bhaggas with their capital on Sumsumara Hill.
अर्थात
*बिंदु संख्या 4 बताता है क़ि ऐसे राज्य जिनका राज्य प्रमुख कोई राजा नही हुआ करता था वो थे....*
*1- शाक्यों का कपिलवस्तु*
2- मल्ल जो पावा के मुखिया थे।
3- वैशालियों के लिच्छवी
और
4- कुशीनारा
5- मिथिला के विदेहा
6- रामगाम के कोलिय
7- अल्लाकापा के बुलिस
8- रेसापुत्ता के कलिंग
9- पिप्पहालवाना के मौर्य
और
10- भग्गा के मौर्य अपने राजधानी संसुमारा पहाड़ियां
अपने अगले बिंदु मे डॉ बाबासाहेब लिखते हैं क़ि
5. *The monarchical States were known as Janapada and the non-monarchical as Sangh or Gana.
अर्थात बिंदु संख्या 5 कहता है क़ि ऐसे राज्य जिनका मुखिया राजा हुआ करता थे, जनपद और जिन राज्यों का राज्य प्रमुख राजा नही होता था उन्हें संघ या गण कहा जाता था।*
जबकि आगे बाबासाहेब लिखते हैं क़ि
6. Not much is known about the nature of the polity of the Sakyas of Kapilvatsu, whether it was republican or oligarchic.
अर्थात
बिंदु संख्या 6 कहता है क़ि शाक्यों के कपिलवस्तु की राजनीति गणतांत्रिक थी या कुलीनतंत्रिक ज्ञात नही है।
वही आगे लिखते हैं क़ि
7. This much, however, is definitely known, that there were many ruling families in the
Republic of the Sakyas and that they ruled in turns.
अर्थात
बिंदु संख्या 7 कहता है क़ि यह पक्की तरह से जाना जाता है क़ि शाक्य गणराज्य मे बहुत से शासनकर्ता परिवार थे।
8. The head of the ruling family was known as Raja.
9. At the time of the birth of Siddharth Gautama it was the turn of Suddhodana to be the Raja. अर्थात
बिंदु संख्या 8 कहता है क़ि शासनकर्ता परिवार के मुखिया को राजा कहा जाता था। और सिद्धार्थ गोतम के जन्म के समय सुद्धोधन राजा होने वाले थे।
*आप देख रहे होंगे क़ि बिंदु संख्या 3 मे शाक्यो का कपिलवस्तु राजा प्रथा मे वर्णित नही है जबकि बिंदु संख्या 4 कहती है क़ि कपिलवस्तु एक ऐसा राज्य था जिसका राज्य प्रमुख कोई राजा नही होता था। वहीं बिंदु संख्या 5 कहती है क़ि ऐसे राज्य जिनका कोई राजा नही होता था उन्ही को संघ या गण कहा जाता था।*
हो सकता है क़ि यह बात अपने राष्ट्रगान के जन गण मनु गाते समय ये ध्यान न दी हो। मगर हम डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के ऋणी है जिन्होंने इतनी बड़ी बात आसानी से समझा दी है।
*बिंदु संख्या 7 कहती है क़ि शाक्य गणराज्य मे बहुत से शासनकर्ता परिवार हुआ करते थे। इसीलिये उन्ही परिवारों मे से कोई एक शुद्धोधन खानदान भी था।*
*सवाल यह है क़ि शासनकर्ता परिवार तो कुलीन परम्परा व आज भी आदिवासियों मे विद्यमान मुखिया (cheiftain ship) परम्परा मे भी होते रहे हैं। जिसे जानकारी न हो वह उत्तर पूर्वी राज्यों के आदिवासी इलाकों मे जाकर इसकी पुष्टि कर सकता है।यदि ऐसा है तो बिंदु संख्या 8 के अनुसार सुद्धोधन परिवार मे राजा परम्परा कहाँ से घुस गई?*
कैसे शिद्धार्थ गोतम को क्षत्रिय राजकुमार कह कर बदनाम किये जा सकते हैं???
*जब कपिलवस्तु राजाविहीन ~गण या संघ~ था तो उस कपिलवस्तु राज्य के आदिवासी मूलनिवासी मुखिया - शुद्धोधन जी, ~राजा~ कैसे कहे जा सकते हैं?????*
*कहीं यही बजह तो नहीं आदिवासी मूलनिवासी राज्य प्रमुख परम्परा का ब्राह्मणीकरण करके क्षत्रिय घोषित करने की?????*
जिसकी बजह से संघी संपुर्ण मौर्य शासनकाल को राजाओ का काल घोषित किये फिर रहे हैं।
क्योंकि जब सिद्धार्थ गोतम से पूर्व के 27 बुद्धों के इतिहास को निगल गए तो यह गणव्यवस्था युक्त मौर्यकाल को राजा महाराजा के चक्कर मे खा पचा जाना यूँ ही तो सम्भव नही था।
इस लिए भी हजम करना संभव नही था क्यों क़ि क्षत्रिय शब्द कही किसी वेद मे नही है। ऋग्वेद का 10-90-12 ऋचा कहती है क़ि ब्राह्मणोस्य मुखमासित बाहु *राजन्य*कृत.......
अर्थात ऋग्वेद क्षत्रिय की उत्पत्ति ब्रह्म के बाहु से हुई ऐसा नही बोलता। बल्कि ऋग्वेद कहता है क़ि ब्रह्म के बाह से *राजन्य* पैदा हुए। न क़ि क्षत्रिय।
आया कुछ समझ मे....?
इसी बात की पुष्टि स्वयं डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने यहां भारत के मूलनिवासियों को ख़त्तीय (क्षेत्रीय/ खेतिय) शब्द से जुड़ा हुआ मानते हुए who were shudra मे क्षत्रिय सिद्ध किया है।
यक्ष प्रश्न यह है क़ि पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर एक ही विषय पर अलग अलग विचारों की प्रस्थापना क्यों कर रहे हैं???
एक तरफ तो बाबासाहेब शाक्य कुल व्यवस्था को राजा विहीन मुखिया परम्परा युक्त गण व्यवस्था कहते हैं तो वहीं दूसरी ओर बाबासाहेब उसी गणराज्य प्रमुख को राजा कह रहे हैं, ये दो विरोधाभाषी तत्थ एक साथ कैसे प्रस्थापित किये जा सकते हैं???
*यदि शाक्यकुल व्यवस्था - गण व्यवस्था थी तो मौर्यवंश कोई राजतंत्रीय नहीं बल्कि लोकतंत्रीय व्यवस्था रही ही होगी। जिसके मुखिया का निर्धारण आम जनता ही करती थी। भले ही वह चुनाव व्यवस्था प्रत्यक्ष मत से हो या अप्रत्यक्ष नामांकन प्रथा द्वारा।* मगर इतना तो स्वयं डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के ही अनुसार स्वतः सिद्ध हो जाता है क़ि मौर्यकुल राजाविहीन लोकतंत्रात्मक अतिसुन्दर व्यवस्था थी। जिसकी बजह से भारत जन, गण और मनु का देश बना।
जय हो ऐसे मौर्यकालीन परंपरायुक्त मुखिया परम्परा की जो आज भी हमारे लोगों को अपनी राय प्रदर्शित करने की इजाजत दे रहा है।
ऐसे स्वर्णकालीन मौर्यकाल को सतसत नमन🇮🇳🍁💐
जय हो मूलनिवासी मुखिया सुद्धोधन जी की जिनके यहां सिद्धार्थ जैसे बालक का जन्म हो सका।
हमेशा काम क्रिया लड़ाई झगड़ा मे पडे रहने वाले ठाकुर कभी भी बुद्ध के वंशज बन भी कैसे सकते हैं?
आपका मंगल हो🍁
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय जय भीम नमो भारत
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🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर रचित buddha and his dhamma पुस्तक मे उन्होंने बिंदुवार लिखा है क़ि In sixth century B.C., Northern India did not form a single Sovereign State.
2. The country was divided into many States, some large, some small. Of these some were monarchical and some non-monarchical.
अर्थात
बिंदु संख्या 2 कहती है क़ि 6वी शताब्दी ईसापूर्व मे उत्तर भारत छोटे छोटे राज्यो मे बंटा हुआ था। जिसमे कुछ राज्यों के मुखिया monarch या राजा हुआ करता था और कुछ का मुखिया राजा नही हुआ करता था।
वहीं डॉ बाबासाहेब आगे लिखते हैं क़ि
3. The monarchical States were altogether sixteen in number. They were known by the name of Anga, Magadha, Kasi, Kosala, Vriji, Malla, Chedi, Vatsa, Kuru, Panchala, Matsya,
Saursena, Asmaka, Avanti, Gandhara and Kambhoja.
अर्थात
बिंदु संख्या 3 कहता है क़ि ऐसे 16 राज्य थे जिनके राजा (monarch) हुआ करते थे उनके नाम है. 1-अंग
2- मगध
3- काशी
4- कोशल
5- वृजि
6- मल्ल
7- छेदि
8- वत्स
9- कुरु
10- पंचाल
11- मत्स्य
12- सौरसेना
13- असमका
14- अवंती
15- गांधार
16- कम्बोज
वहीं आगे वर्णित करते हुए लिखते हैं क़ि
4. The *non-monarchical States were those of the Sakyas of Kapilvatsu,* the Mallas of Pava
and Kushinara, the Lichhavis of Vaisali, the Videhas of Mithila, the Koliyas of
Ramagam, the Bulis of Allakapa, the Kalingas of Resaputta, the Mauriyas of Pipphalvana
and the Bhaggas with their capital on Sumsumara Hill.
अर्थात
*बिंदु संख्या 4 बताता है क़ि ऐसे राज्य जिनका राज्य प्रमुख कोई राजा नही हुआ करता था वो थे....*
*1- शाक्यों का कपिलवस्तु*
2- मल्ल जो पावा के मुखिया थे।
3- वैशालियों के लिच्छवी
और
4- कुशीनारा
5- मिथिला के विदेहा
6- रामगाम के कोलिय
7- अल्लाकापा के बुलिस
8- रेसापुत्ता के कलिंग
9- पिप्पहालवाना के मौर्य
और
10- भग्गा के मौर्य अपने राजधानी संसुमारा पहाड़ियां
अपने अगले बिंदु मे डॉ बाबासाहेब लिखते हैं क़ि
5. *The monarchical States were known as Janapada and the non-monarchical as Sangh or Gana.
अर्थात बिंदु संख्या 5 कहता है क़ि ऐसे राज्य जिनका मुखिया राजा हुआ करता थे, जनपद और जिन राज्यों का राज्य प्रमुख राजा नही होता था उन्हें संघ या गण कहा जाता था।*
जबकि आगे बाबासाहेब लिखते हैं क़ि
6. Not much is known about the nature of the polity of the Sakyas of Kapilvatsu, whether it was republican or oligarchic.
अर्थात
बिंदु संख्या 6 कहता है क़ि शाक्यों के कपिलवस्तु की राजनीति गणतांत्रिक थी या कुलीनतंत्रिक ज्ञात नही है।
वही आगे लिखते हैं क़ि
7. This much, however, is definitely known, that there were many ruling families in the
Republic of the Sakyas and that they ruled in turns.
अर्थात
बिंदु संख्या 7 कहता है क़ि यह पक्की तरह से जाना जाता है क़ि शाक्य गणराज्य मे बहुत से शासनकर्ता परिवार थे।
8. The head of the ruling family was known as Raja.
9. At the time of the birth of Siddharth Gautama it was the turn of Suddhodana to be the Raja. अर्थात
बिंदु संख्या 8 कहता है क़ि शासनकर्ता परिवार के मुखिया को राजा कहा जाता था। और सिद्धार्थ गोतम के जन्म के समय सुद्धोधन राजा होने वाले थे।
*आप देख रहे होंगे क़ि बिंदु संख्या 3 मे शाक्यो का कपिलवस्तु राजा प्रथा मे वर्णित नही है जबकि बिंदु संख्या 4 कहती है क़ि कपिलवस्तु एक ऐसा राज्य था जिसका राज्य प्रमुख कोई राजा नही होता था। वहीं बिंदु संख्या 5 कहती है क़ि ऐसे राज्य जिनका कोई राजा नही होता था उन्ही को संघ या गण कहा जाता था।*
हो सकता है क़ि यह बात अपने राष्ट्रगान के जन गण मनु गाते समय ये ध्यान न दी हो। मगर हम डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के ऋणी है जिन्होंने इतनी बड़ी बात आसानी से समझा दी है।
*बिंदु संख्या 7 कहती है क़ि शाक्य गणराज्य मे बहुत से शासनकर्ता परिवार हुआ करते थे। इसीलिये उन्ही परिवारों मे से कोई एक शुद्धोधन खानदान भी था।*
*सवाल यह है क़ि शासनकर्ता परिवार तो कुलीन परम्परा व आज भी आदिवासियों मे विद्यमान मुखिया (cheiftain ship) परम्परा मे भी होते रहे हैं। जिसे जानकारी न हो वह उत्तर पूर्वी राज्यों के आदिवासी इलाकों मे जाकर इसकी पुष्टि कर सकता है।यदि ऐसा है तो बिंदु संख्या 8 के अनुसार सुद्धोधन परिवार मे राजा परम्परा कहाँ से घुस गई?*
कैसे शिद्धार्थ गोतम को क्षत्रिय राजकुमार कह कर बदनाम किये जा सकते हैं???
*जब कपिलवस्तु राजाविहीन ~गण या संघ~ था तो उस कपिलवस्तु राज्य के आदिवासी मूलनिवासी मुखिया - शुद्धोधन जी, ~राजा~ कैसे कहे जा सकते हैं?????*
*कहीं यही बजह तो नहीं आदिवासी मूलनिवासी राज्य प्रमुख परम्परा का ब्राह्मणीकरण करके क्षत्रिय घोषित करने की?????*
जिसकी बजह से संघी संपुर्ण मौर्य शासनकाल को राजाओ का काल घोषित किये फिर रहे हैं।
क्योंकि जब सिद्धार्थ गोतम से पूर्व के 27 बुद्धों के इतिहास को निगल गए तो यह गणव्यवस्था युक्त मौर्यकाल को राजा महाराजा के चक्कर मे खा पचा जाना यूँ ही तो सम्भव नही था।
इस लिए भी हजम करना संभव नही था क्यों क़ि क्षत्रिय शब्द कही किसी वेद मे नही है। ऋग्वेद का 10-90-12 ऋचा कहती है क़ि ब्राह्मणोस्य मुखमासित बाहु *राजन्य*कृत.......
अर्थात ऋग्वेद क्षत्रिय की उत्पत्ति ब्रह्म के बाहु से हुई ऐसा नही बोलता। बल्कि ऋग्वेद कहता है क़ि ब्रह्म के बाह से *राजन्य* पैदा हुए। न क़ि क्षत्रिय।
आया कुछ समझ मे....?
इसी बात की पुष्टि स्वयं डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने यहां भारत के मूलनिवासियों को ख़त्तीय (क्षेत्रीय/ खेतिय) शब्द से जुड़ा हुआ मानते हुए who were shudra मे क्षत्रिय सिद्ध किया है।
यक्ष प्रश्न यह है क़ि पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर एक ही विषय पर अलग अलग विचारों की प्रस्थापना क्यों कर रहे हैं???
एक तरफ तो बाबासाहेब शाक्य कुल व्यवस्था को राजा विहीन मुखिया परम्परा युक्त गण व्यवस्था कहते हैं तो वहीं दूसरी ओर बाबासाहेब उसी गणराज्य प्रमुख को राजा कह रहे हैं, ये दो विरोधाभाषी तत्थ एक साथ कैसे प्रस्थापित किये जा सकते हैं???
*यदि शाक्यकुल व्यवस्था - गण व्यवस्था थी तो मौर्यवंश कोई राजतंत्रीय नहीं बल्कि लोकतंत्रीय व्यवस्था रही ही होगी। जिसके मुखिया का निर्धारण आम जनता ही करती थी। भले ही वह चुनाव व्यवस्था प्रत्यक्ष मत से हो या अप्रत्यक्ष नामांकन प्रथा द्वारा।* मगर इतना तो स्वयं डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के ही अनुसार स्वतः सिद्ध हो जाता है क़ि मौर्यकुल राजाविहीन लोकतंत्रात्मक अतिसुन्दर व्यवस्था थी। जिसकी बजह से भारत जन, गण और मनु का देश बना।
जय हो ऐसे मौर्यकालीन परंपरायुक्त मुखिया परम्परा की जो आज भी हमारे लोगों को अपनी राय प्रदर्शित करने की इजाजत दे रहा है।
ऐसे स्वर्णकालीन मौर्यकाल को सतसत नमन🇮🇳🍁💐
जय हो मूलनिवासी मुखिया सुद्धोधन जी की जिनके यहां सिद्धार्थ जैसे बालक का जन्म हो सका।
हमेशा काम क्रिया लड़ाई झगड़ा मे पडे रहने वाले ठाकुर कभी भी बुद्ध के वंशज बन भी कैसे सकते हैं?
आपका मंगल हो🍁
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय जय भीम नमो भारत
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