पहली मई को मजदूर दिवस संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है। इसका इतिहास भूगोल से मुझे कोई वास्ता नहीं लेकिन इसकी पीछे की वजहों को जानना मेरा मौलिक अधिकार है। कार्ल मार्क्स पक्का नशेड़ी था क्योंकि यह कहता है कि दुनिया के मजदूरों एक हो पूंजीवाद को उखाड़ फेंको। अब पूँछो कि इसमें ग़लत क्या है। मजदूरों को एकजुट होने की जरूरत तभी तक है जब तक वे मजदूर हैं और जब तक वे मजदूर हैं तभी तक दूसरे लोग मालिक (पूंजीपति) भी हैं। मालिक व मज़दूरों के बीच स्थायी संघर्ष अन्तिमता मालिक पूंजीपतियों को ही मजबूत करता आया है। भला भेड़ व सांड में युध्द होने पर भेड़ की जीत की उम्मीद लगाना कहाँ की चतुराई है। यह संघर्ष स्थायी रूप से चलता रहे इसलिए मजदूरों को गंदगी में सड़ते हुए गंदगी को स्थायी बनाये रखने हेतु एकजुट होना जरूरी हैं। यह सोच के साथ उक्त नारा पूरे विश्व में उछाला गया। जब तक मालिक मजदूरों में संघर्ष चलता रहेगा तभी तक मालिक "मालिक" रह सकेंगे और मजदूर भाई बहन "मजदूर'। यह बात औसत बुद्धि इंसान को तब तक समझ नही आयेगी जब तक वह खुद के खाने पीने मौज मस्ती के लिए संघर्षरत है। इस दैनिक भरणपोषण संघर्ष से ऊपर...