*जातिव्यवस्था का निर्माता आपका चिरस्थाई दुश्मन लेकिन जातिअपराध आपका हथियार कैसे हो सकता है?*
🌷🌷9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳
बहुजन समाज जब से सत्ता से खदेड़ा गया है तब से चमारों व यादवों को अन्य जातियों के दड़वों मे बन्द जाति समूह पानी पी पी कर आरोप प्रत्यारोप लगाने व सारा बहुजन आंदोलन खत्म करने कराने का दोष सभी चमारों व अहीरों पर मडने मे बहादुरी समझ रहे हैं।
यह आरोप प्रत्यारोप अन्य जाति समूहों मे पसर रही असुरक्षा का द्योतक तो है ही साथ ही उनके अंदर घर कर रही बहुजन समाज की एकता की ललक भी साफ साफ दिखाई दे रही है। *जो क़ि विपरीत माहौल मे बहुजन समाज के लिए बहुत ही शुभ संकेत है।*
मगर आज जरूरत इस बात की है क़ि आत्मसुधार कैसे किया जाये?
क्या क्या गलतियां हमसे या हमारे मामु (माया मुलायम) लोगों से हुई जिन्हें सुधारा जाये आदि।
ऐसे मे जव बात आत्मसुधार व इतिहास से सीख लेने की हो तो हम सोचने को विवश होते है क़ि *जब जाति आपकी सबसे बड़ी समस्या है। तो आप उसी जातिव्यवस्था को हथियार कैसे बना सकते हो~??*
🤔
मगर जातीय शोषण को राजनीति का हथियार तो बनाया ही गया।
जिसका नतीजा यह हुआ क़ि जो जातिव्यवस्था खत्म करने का काम डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने किया था।
*उसी जातिव्यवस्था को सूझबूझ के अभाव व अदूरदर्शिता के कारण चन्द लोगों ने और ज्यादा मजबूती प्रदान की।*
इस प्रकार जाति का जहर पूरे बदन (समाज) मे फैलना लाजमी है।
ऐसे मे बहुजन समाज बन ही नही सकता।
*आप कालीदास कैसे बन सकते हो?*
*जिस डाल पर बैठे हो उसे भला काट भी कैसे सकते हो?*
हां उसी डाल को काटने का नाटक जरूर कर सकते हो।
जो बखूबी विभिन्न जातीय संगठन, महासभा, समितियां, झामसेफ आदि बना कर आप लोग आज भी बदस्तूर जारी किये हुए हैं।
*जिस जातिव्यवस्था को मिटाना आपकी प्रथम duty है उसी को आप tool बना भी कैसे सकते हो?*
*इसमे दोष न तो अहीरों का है और न ही चमारो का । दोष है तो सिर्फ गलत विचारधारा को चुनने का।*
वह विचारधारा जिसे डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अंग्रेजो के सामने ब्राह्मणों को नंगा करने के लिए प्रयोग करते थे। अंग्रेजो के 1947 मे भारत छोड़ने के बाद अप्रासंगिक स्वतः हो चुकी थी। इसी बात को ध्यान मे रख कर डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को धर्मान्तरण जैसा क्रांतिकारी कदम उठाया था। जिससे डर कर ही उनकी देवी जिहाद को हथियार बनाकर हत्या की गई।
आज सभी प्रचलित बहुजन नेताओं के यहां उनके दुश्मनों की देवियाँ (लड़कियां) या देवता (लुच्चा मिशर) घुसे हुए हैं। *यह देवी जिहाद नही तो क्या है?* जिसमे एक गरीब बहुजन का बेटा अमुक जाति का और जैसे ही वह IAS IPS अधिकारी हो जाये तो देवी जी दुश्मनों की उनके विष्तर पर।
सविता सारस्वत भी तो वही थी। *डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की हत्या की जांच के लिए गठित DIG सक्सेना कमीशन की रिपोर्ट 60 साल बाद भी अभी तक सार्वजनिक नही की गई।*
ऐसे मे तो यही कहा जा सकता है क़ि *वोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से आये*।
आज मौलिक संकट विचारधारा का है न क़ि किसी जाति विशेष पर आरोप प्रत्यारोप का।
आपके पास कोई वैकल्पिक विचारधारा हो तो बताओ।
कागज की नाव बार बार नही चलती।
आज आपके पास देश की एकता अखंडता व संप्रभुता को अक्षुण बनाये रखने वाले बहुजन राष्ट्रवाद के अलावा कोई विचारधारा नहीं जिससे बांछित लक्ष हाशिल किया जा सके।
मगर जब यह बात आपको समझ आये तब न .....🤔
मिशन मे आपका साथी
स्वामी डॉ बोधी आनंद
नमो भारत जय भूमि🇮🇳
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🌷🌷9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳
बहुजन समाज जब से सत्ता से खदेड़ा गया है तब से चमारों व यादवों को अन्य जातियों के दड़वों मे बन्द जाति समूह पानी पी पी कर आरोप प्रत्यारोप लगाने व सारा बहुजन आंदोलन खत्म करने कराने का दोष सभी चमारों व अहीरों पर मडने मे बहादुरी समझ रहे हैं।
यह आरोप प्रत्यारोप अन्य जाति समूहों मे पसर रही असुरक्षा का द्योतक तो है ही साथ ही उनके अंदर घर कर रही बहुजन समाज की एकता की ललक भी साफ साफ दिखाई दे रही है। *जो क़ि विपरीत माहौल मे बहुजन समाज के लिए बहुत ही शुभ संकेत है।*
मगर आज जरूरत इस बात की है क़ि आत्मसुधार कैसे किया जाये?
क्या क्या गलतियां हमसे या हमारे मामु (माया मुलायम) लोगों से हुई जिन्हें सुधारा जाये आदि।
ऐसे मे जव बात आत्मसुधार व इतिहास से सीख लेने की हो तो हम सोचने को विवश होते है क़ि *जब जाति आपकी सबसे बड़ी समस्या है। तो आप उसी जातिव्यवस्था को हथियार कैसे बना सकते हो~??*
🤔
मगर जातीय शोषण को राजनीति का हथियार तो बनाया ही गया।
जिसका नतीजा यह हुआ क़ि जो जातिव्यवस्था खत्म करने का काम डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने किया था।
*उसी जातिव्यवस्था को सूझबूझ के अभाव व अदूरदर्शिता के कारण चन्द लोगों ने और ज्यादा मजबूती प्रदान की।*
इस प्रकार जाति का जहर पूरे बदन (समाज) मे फैलना लाजमी है।
ऐसे मे बहुजन समाज बन ही नही सकता।
*आप कालीदास कैसे बन सकते हो?*
*जिस डाल पर बैठे हो उसे भला काट भी कैसे सकते हो?*
हां उसी डाल को काटने का नाटक जरूर कर सकते हो।
जो बखूबी विभिन्न जातीय संगठन, महासभा, समितियां, झामसेफ आदि बना कर आप लोग आज भी बदस्तूर जारी किये हुए हैं।
*जिस जातिव्यवस्था को मिटाना आपकी प्रथम duty है उसी को आप tool बना भी कैसे सकते हो?*
*इसमे दोष न तो अहीरों का है और न ही चमारो का । दोष है तो सिर्फ गलत विचारधारा को चुनने का।*
वह विचारधारा जिसे डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अंग्रेजो के सामने ब्राह्मणों को नंगा करने के लिए प्रयोग करते थे। अंग्रेजो के 1947 मे भारत छोड़ने के बाद अप्रासंगिक स्वतः हो चुकी थी। इसी बात को ध्यान मे रख कर डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को धर्मान्तरण जैसा क्रांतिकारी कदम उठाया था। जिससे डर कर ही उनकी देवी जिहाद को हथियार बनाकर हत्या की गई।
आज सभी प्रचलित बहुजन नेताओं के यहां उनके दुश्मनों की देवियाँ (लड़कियां) या देवता (लुच्चा मिशर) घुसे हुए हैं। *यह देवी जिहाद नही तो क्या है?* जिसमे एक गरीब बहुजन का बेटा अमुक जाति का और जैसे ही वह IAS IPS अधिकारी हो जाये तो देवी जी दुश्मनों की उनके विष्तर पर।
सविता सारस्वत भी तो वही थी। *डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की हत्या की जांच के लिए गठित DIG सक्सेना कमीशन की रिपोर्ट 60 साल बाद भी अभी तक सार्वजनिक नही की गई।*
ऐसे मे तो यही कहा जा सकता है क़ि *वोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से आये*।
आज मौलिक संकट विचारधारा का है न क़ि किसी जाति विशेष पर आरोप प्रत्यारोप का।
आपके पास कोई वैकल्पिक विचारधारा हो तो बताओ।
कागज की नाव बार बार नही चलती।
आज आपके पास देश की एकता अखंडता व संप्रभुता को अक्षुण बनाये रखने वाले बहुजन राष्ट्रवाद के अलावा कोई विचारधारा नहीं जिससे बांछित लक्ष हाशिल किया जा सके।
मगर जब यह बात आपको समझ आये तब न .....🤔
मिशन मे आपका साथी
स्वामी डॉ बोधी आनंद
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