*22 प्रतिज्ञाएं व मुक्तिबोध।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 जिस प्रकार "नदी" दो किनारो के बीच बहती है। इन्ही दोनों किनारों से अठखेलियाँ करती हई चलती है। इन्ही दोनों किनारों के अंदर के सारे नजारे को पूरी दुनियां समझती है। लगभग कुछ इसी तरह का हमारा भी संसार है। मगर इतनी होशियार भी रहती है कि किसी भी एक किनारे द्वारा ज्यादा प्रेम व्यवहार की स्थिति में अठखेलियाँ जरूर उसके साथ करती है मगर दूसरे किनारे को बिल्कुल नही छोड़ती। जबकि इन्शान जिस जगह को पसंद करले तो समझो वही उसका ठिकाना। आज हम बहना भूल से गये हैं। हम किसी न किसी तट से चिपके हुए हैं। यही किनारे ही रिवर बैंक कहलाते है। इन्ही बैंकों पर हम लोग बैंक कर सकते हैं। यही बैंकिंग व्यवस्था है। इशानी समुह भी कुछ इसी अंदाज में चलते हैं। उदाहरण के लिए यदि हम डॉ बाबासाहेब अम्वेदकर के भक्तों को ही लें लें। जो रात दिन डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के कार्यो का गुणगान तो यहां वहां करते रहते हैं। खुद भले ही उनके ठीक उलट क्रिया कलाप कर रहे हों। यह स्थिति भी नदी के दो किनारों के समान ही है। जिसमे व्यक्ति को भ्रम तो होता है कि हम दूसरे जीव जन्तुओ से भिन्न है। ...