आखिर कौन है ये शिर्डी के 'साईबाबा' , अक्कलकोट के 'स्वामी समर्थ' और शेगाव के 'गजानन महाराज' ? ता. 19 जुलै 1994 को संपादक दिपक तिलक ईनका सह्याद्री अंक मे "द ुसरा नानासाहब पेशवा ही साईबाबा है" यह लेख प्रसिद्ध हूआ था। लेखक अरुण ताम्हणकर ईनोने रहस्योद्घाटन करते हूए एक अज्ञात साधु का आधार लिया है । ऊनका ये लेख दै. मुलनिवासी नायक के पास ऊपलब्ध है । ताम्हणकर ईस लेख मेँ जो कहते है ऊसका सारांष तो यही कहता है सदाशिवराव पेशवा ही स्वामी समर्थ है। तात्या टोपे ये शेगांव का गजानन महाराज है। दुसरा नानासाहब पेशवा ही साईबाबा है। लेखक ताम्हनकर को बाबा के प्रकटिकरण मान्य नही, वे कहते है कि, ये बाबा लोग अचानक प्रकट कैसे हूए? साधारण आदमी के तरह माँ के पेट से जनम क्यो नही लिया? स्वजाति के बारेमे अपनने ऊलटा सिधा बोल दिया, ईसके लिए ताम्हणकर ने अपना मुँह बंद किया तो कभी खोला ही नही। ब्रामणो ने स्वामी समर्थ महाराज ईनके कई जगह मठ स्थापण किये। अक्कलकोट, मंगलवेढा, चिपलुण, अहमदनगर, कल्याण, दादर, गिरगांव (महाराष्ट्र) ईन प्रमुख संस्थानो (मठ) मे स्वामी का प्रकट दिन हर साल मनाया जाता ...