अक्सर आज के राजनेता जयभीम को जय मीम से जोड़ने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या स्वयं डॉ बाबासाहब अंबेडकर मुस्लिमपरस्त थे? जैसा कि आजकल बहुजन राजनेताओं में देखा जा रहा है।
जिसको जानने के लिए स्वयं चलते हैं बाबासाहब अंबेडकर रचित राइटिंग एंड स्पीचेज खंड संख्या १४ के भाग २ पेज संख्या 1319 से 1327 पर जहां पर डॉ बाबासाहब अंबेडकर लिखते हैं कि "out of 350 crores of rupees of revenue we raise annually, we spend about 180 crores on army. अर्थात बाबासाहब लिखते हैं कि आधे से ज्यादा भारत देश का बजट तो इसी आर्मी पर खत्म हुआ जा रहा है वह भी मुसलमान भूभाग में मुस्लिम आबादी हेतु रोटी सब्जी अनाज रोड दवाओं आदि की सुविधाएं देने में वहीं डा बाबासाहब अंबेडकर पेज 1322 पर लिखते हैं कि "हमारा पाकिस्तान से झगडा हमारी विदेश नीति का हिस्सा है। जिसका असली समाधान है कि "The real solution is to partition the kashmir. Give hindu and Buddhist part to India and Muslim part to Pakistan. अर्थात इस कश्मीर मामले का असली समाधान है कि हिन्दु और बौद्ध भूभाग भारत को दे दिया जाए और मुस्लिम हिस्सा पाकिस्तान को।
इतना आसान और सुलझा हुआ विचार डॉ बाबासाहब अंबेडकर दे गए।
डॉ अंबेडकर आगे लिखते हैं कि it is (कश्मीर मामला) a matter between the Muslim of kashmir and Muslim of Pakistan. अर्थात बाबासाहब अंबेडकर बड़ी ही बेबाकी से आगे लिखते हैं कि कश्मीर मामला "कश्मीरी मुसलमानों और पाकिस्तानी मुसलमानों" के बीच का मामला है। जिसे ये (मुसलमान) जैसे चाहे वैसे निर्णय करें (They may decide the issue as they like.) अथवा अगर आप चाहें तो कश्मीर को ३ हिस्सों मे बांट दिया जाए, जिसमें पहला होगा युद्धविराम क्षेत्र, दूसरा होगा कश्मीर घाटी और तीसरा हिस्सा होगा जम्मू और लद्दाख क्षेत्र (Or if you like, divide it (kashmir) into three parts; the cease fire zone, the valley and jammu-ladakh region.) जो महापुरुष डॉ बाबासाहब अंबेडकर इतनी बेबाकी और बिना किसी लागलपेट के, कश्मीर और मुसलमानों पर अपनी राय रखे हैं इन्हीं की भक्ति में लिप्त भीड़ आखिर जयभीम जयमीम का घालमेल कैसे कर सकते हैं? ऐसा केवल इसलिए किया जा रहा क्योंकि बहुजन नेताओं के पास बाबासाहब अंबेडकर की मूल राइटिंग और स्पीचेज की सही समझ नहीं है।
जय भीम जय भारत
जय मूलनिवासी
जिसको जानने के लिए स्वयं चलते हैं बाबासाहब अंबेडकर रचित राइटिंग एंड स्पीचेज खंड संख्या १४ के भाग २ पेज संख्या 1319 से 1327 पर जहां पर डॉ बाबासाहब अंबेडकर लिखते हैं कि "out of 350 crores of rupees of revenue we raise annually, we spend about 180 crores on army. अर्थात बाबासाहब लिखते हैं कि आधे से ज्यादा भारत देश का बजट तो इसी आर्मी पर खत्म हुआ जा रहा है वह भी मुसलमान भूभाग में मुस्लिम आबादी हेतु रोटी सब्जी अनाज रोड दवाओं आदि की सुविधाएं देने में वहीं डा बाबासाहब अंबेडकर पेज 1322 पर लिखते हैं कि "हमारा पाकिस्तान से झगडा हमारी विदेश नीति का हिस्सा है। जिसका असली समाधान है कि "The real solution is to partition the kashmir. Give hindu and Buddhist part to India and Muslim part to Pakistan. अर्थात इस कश्मीर मामले का असली समाधान है कि हिन्दु और बौद्ध भूभाग भारत को दे दिया जाए और मुस्लिम हिस्सा पाकिस्तान को।
इतना आसान और सुलझा हुआ विचार डॉ बाबासाहब अंबेडकर दे गए।
डॉ अंबेडकर आगे लिखते हैं कि it is (कश्मीर मामला) a matter between the Muslim of kashmir and Muslim of Pakistan. अर्थात बाबासाहब अंबेडकर बड़ी ही बेबाकी से आगे लिखते हैं कि कश्मीर मामला "कश्मीरी मुसलमानों और पाकिस्तानी मुसलमानों" के बीच का मामला है। जिसे ये (मुसलमान) जैसे चाहे वैसे निर्णय करें (They may decide the issue as they like.) अथवा अगर आप चाहें तो कश्मीर को ३ हिस्सों मे बांट दिया जाए, जिसमें पहला होगा युद्धविराम क्षेत्र, दूसरा होगा कश्मीर घाटी और तीसरा हिस्सा होगा जम्मू और लद्दाख क्षेत्र (Or if you like, divide it (kashmir) into three parts; the cease fire zone, the valley and jammu-ladakh region.) जो महापुरुष डॉ बाबासाहब अंबेडकर इतनी बेबाकी और बिना किसी लागलपेट के, कश्मीर और मुसलमानों पर अपनी राय रखे हैं इन्हीं की भक्ति में लिप्त भीड़ आखिर जयभीम जयमीम का घालमेल कैसे कर सकते हैं? ऐसा केवल इसलिए किया जा रहा क्योंकि बहुजन नेताओं के पास बाबासाहब अंबेडकर की मूल राइटिंग और स्पीचेज की सही समझ नहीं है।
जय भीम जय भारत
जय मूलनिवासी

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