वर्षावासकाल मे कामुकता, अश्लीलता, नशाखोरी का खुले आम नंगा नांच, भारतवासियों को ढक्कन करने का कार्यक्रम- बोल धम्म
*वर्षावासकाल मे कामुकता, अश्लीलता, नशाखोरी का खुले आम नंगा नांच, भारतवासियों को ढक्कन करने का कार्यक्रम- बोल धम्म*
🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
भारत मे राजाओं नबाबो के पतन का मूल कारण राज महलों मे बुरी तरह व्याप्त हरम प्रथा, नांच गाना और रंडीबाजी रही है।
इतिहास कारों ने लिखा तो यहां तक है क़ि अकबर और कई नबाब जब महलों की सीढियां चढ़ते थे तब दोनो तरफ नग्न युवतियों को खड़ा कर उनके स्तन पकड़- पकड़ कर जीना चढ़ा करते थे।
क्या नजारा रहा होगा.....
वहीं ब्राह्मण धर्मी राजाओं की करामातों का काला चिठ्ठा काफी लम्बा है। इसी श्रृंखला मे डॉमिनिक लापियरे और लैरी कोलिन्स लिखते हैं क़ि महाराजा जालंधर अक्सर अपने राजमहल मे पूर्णतया उत्तेजित लिंग के साथ नग्न अवस्था मे जनता के बीच अपनी कामुकता की नुमाइश करते थे। उस समय तक जनता इतनी मूर्ख बन चुकी थी क़ि राजा का उत्तेजित लिंग अवस्था को देख कर खुश होती और celebrate करती थी।
ऐसे ढेरों रंडीबाजी कामुकता अश्लीलता के पुजारी राजा, महाराजाओ, नबाबो की आँखो देखी कहानिया भरी पड़ी हैं। *जो यह सिद्ध करती हैं क़ि कामुकता अश्लीलता रंडीबाजी की बजह से ही इन राजाओं का पतन हुआ।*
सवाल ये भी उठता है क़ि मुगलों के हरम मे भरी हजारों युवतियां भारत के किस समाज की थी???
क्या कोई माता पिता अपने जिगर के टुकड़े को स्वेच्छा से रंडीबाजी के लिए भेज देता था???
आखिर ये कन्याये किस भारतीय जाति समूह की रही होंगी???
क्या आपको अब तक नही समझ आया क़ि *हम लाएं है तूफान से कश्ती निकाल के- इस देश को रखना मेरे बच्चे सम्हाल के* किस लिए गाया जाता है।
राजपूताना इसी वैश्यावृत्ति की भेंट चडा। गांव देहात के जमीदार कहाँ पीछे रहने वाले थे उन्होंने भी खूब भोग विलास किया। जरूरत तो यहां तक आ गयी थी क़ि अश्लीलता की नंगी नुमाइश खजुराहो के मंदिरों और लिंग-योनी पूजा के रूप मे स्थापित कर दी गयी।
नतीजतन आज भी यह अश्लील लिंग योनी पूजा बदस्तूर जारी है। जिसमे नैतिकता छोड़ कर बाकी सब कुछ जायज हैं। नाजायज है तो केवल संस्कारवान नैतिकता।
तभी तो भोले बाबा से भी भांग गांजा शराब सहित फ़ूहड़ फब्तियां सब कुछ जायज है। यह नशाखोरी आपसी दुराचार व फसाद मे पूरे बहुजन समाज को फंसा रही है।
अब करो धी म ही योनि पे....
*इतिहास लिखा ही इसलिए जाता है क़ि आने वाली पीढियां भूतकाल मे हुई गलतियों से सबक सीख सकें।*
तो सवाल यह उठता है क़ि जिस नांच गाना कामुकता अश्लीलता रंडीबाजी के कारण राजा महाराजा नबाबी जमीदारी सब खत्म हो गयी। आम जनता त्राहिमाम करते हुए इन अय्याश राजाओं महाराजाओं की रंगरलियों के आगे भुंखो मरने को मजबूर हुई। देश मे भयंकर अकाल पड़े।
ऐसे मे आज वहीं रंगरलियां, नांच गाना, ठुमकेबाजी, भोगवाद अय्याशी, कामुकता भारत के प्रत्येक घर मे TV के रूप मे पहुंच रही है। जिसमे विदेशी फिरंगी अपनी लड़कियों औरतों को नंगा कर कामुकता परोश कर, बहुजनो के खिलाफ देवी जिहाद जारी किये हुए हैं।
जिसका प्रचार प्रसार सिनेमा अखवार फोन टीवी आदि माध्यमो से निरंतर जारी है।
जिसके नतीजे मे आज प्रत्येक भारतीय स्त्री पुरुष अपने मूलनिवासीपन को धोने मे लगा है। इससे भारतीय स्त्री स्वयं को उन्ही देवी जिहादी फिरंगी लड़कियों जैसी ही दिखना चाह रही हैं।
ऐसे मे मूल सवाल ये है क़ि जिस कामुकता अश्लीलता नांच गाना पिछवाड़ा मटकाने के कारण इतना वैभव शाली राजतंत्र खत्म हो गया, क्या आप मूलनिवासियों का चींटी जैसा नगण्य अस्तित्व दुश्मन के द्वारा जारी hips never lies..... कार्यक्रम मे सुरक्षित रह सकता है???
क्या इस सब मे आपकी स्वयं की सक्रिय सहभागिता के बाद भी आपका मान सम्मान स्वाभिमान दृढ़ता से कायम रह सकेगा????
*एक न एक दिन तो तुम्हारा अस्तित्व खत्म होगा ही।*
उस समाज का भला कौन कर सकता है जो स्वयं अपनी बैंड बजवाने व बजाने मे लगा हो?
आप है क़ि केवल दुश्मनो को गाली दे कर भड़ास निकालना ही अपना काम मान बैठे हैं।
इसीलिए कहते हैं क़ि अभी भी समय है, मान जाओ।
*नच्च गव्य वेरमणी सिख्खा पदं समादयामी* और *सुरा मेरु मज्ज पमादट्ठाना वेरमणी सिख्खा पदं समादयामी* पर अमल करो और कराओ। यही तुम्हारी मुक्ति का एक मात्र सूत्र है।
आपका मंगल हो।
सर्वे भवन्तु सुखना...
सब्बे सत्ता सुखी होन्तु...
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भूमि नमो भारत🇮🇳
🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳
भारत मे राजाओं नबाबो के पतन का मूल कारण राज महलों मे बुरी तरह व्याप्त हरम प्रथा, नांच गाना और रंडीबाजी रही है।
इतिहास कारों ने लिखा तो यहां तक है क़ि अकबर और कई नबाब जब महलों की सीढियां चढ़ते थे तब दोनो तरफ नग्न युवतियों को खड़ा कर उनके स्तन पकड़- पकड़ कर जीना चढ़ा करते थे।
क्या नजारा रहा होगा.....
वहीं ब्राह्मण धर्मी राजाओं की करामातों का काला चिठ्ठा काफी लम्बा है। इसी श्रृंखला मे डॉमिनिक लापियरे और लैरी कोलिन्स लिखते हैं क़ि महाराजा जालंधर अक्सर अपने राजमहल मे पूर्णतया उत्तेजित लिंग के साथ नग्न अवस्था मे जनता के बीच अपनी कामुकता की नुमाइश करते थे। उस समय तक जनता इतनी मूर्ख बन चुकी थी क़ि राजा का उत्तेजित लिंग अवस्था को देख कर खुश होती और celebrate करती थी।
ऐसे ढेरों रंडीबाजी कामुकता अश्लीलता के पुजारी राजा, महाराजाओ, नबाबो की आँखो देखी कहानिया भरी पड़ी हैं। *जो यह सिद्ध करती हैं क़ि कामुकता अश्लीलता रंडीबाजी की बजह से ही इन राजाओं का पतन हुआ।*
सवाल ये भी उठता है क़ि मुगलों के हरम मे भरी हजारों युवतियां भारत के किस समाज की थी???
क्या कोई माता पिता अपने जिगर के टुकड़े को स्वेच्छा से रंडीबाजी के लिए भेज देता था???
आखिर ये कन्याये किस भारतीय जाति समूह की रही होंगी???
क्या आपको अब तक नही समझ आया क़ि *हम लाएं है तूफान से कश्ती निकाल के- इस देश को रखना मेरे बच्चे सम्हाल के* किस लिए गाया जाता है।
राजपूताना इसी वैश्यावृत्ति की भेंट चडा। गांव देहात के जमीदार कहाँ पीछे रहने वाले थे उन्होंने भी खूब भोग विलास किया। जरूरत तो यहां तक आ गयी थी क़ि अश्लीलता की नंगी नुमाइश खजुराहो के मंदिरों और लिंग-योनी पूजा के रूप मे स्थापित कर दी गयी।
नतीजतन आज भी यह अश्लील लिंग योनी पूजा बदस्तूर जारी है। जिसमे नैतिकता छोड़ कर बाकी सब कुछ जायज हैं। नाजायज है तो केवल संस्कारवान नैतिकता।
तभी तो भोले बाबा से भी भांग गांजा शराब सहित फ़ूहड़ फब्तियां सब कुछ जायज है। यह नशाखोरी आपसी दुराचार व फसाद मे पूरे बहुजन समाज को फंसा रही है।
अब करो धी म ही योनि पे....
*इतिहास लिखा ही इसलिए जाता है क़ि आने वाली पीढियां भूतकाल मे हुई गलतियों से सबक सीख सकें।*
तो सवाल यह उठता है क़ि जिस नांच गाना कामुकता अश्लीलता रंडीबाजी के कारण राजा महाराजा नबाबी जमीदारी सब खत्म हो गयी। आम जनता त्राहिमाम करते हुए इन अय्याश राजाओं महाराजाओं की रंगरलियों के आगे भुंखो मरने को मजबूर हुई। देश मे भयंकर अकाल पड़े।
ऐसे मे आज वहीं रंगरलियां, नांच गाना, ठुमकेबाजी, भोगवाद अय्याशी, कामुकता भारत के प्रत्येक घर मे TV के रूप मे पहुंच रही है। जिसमे विदेशी फिरंगी अपनी लड़कियों औरतों को नंगा कर कामुकता परोश कर, बहुजनो के खिलाफ देवी जिहाद जारी किये हुए हैं।
जिसका प्रचार प्रसार सिनेमा अखवार फोन टीवी आदि माध्यमो से निरंतर जारी है।
जिसके नतीजे मे आज प्रत्येक भारतीय स्त्री पुरुष अपने मूलनिवासीपन को धोने मे लगा है। इससे भारतीय स्त्री स्वयं को उन्ही देवी जिहादी फिरंगी लड़कियों जैसी ही दिखना चाह रही हैं।
ऐसे मे मूल सवाल ये है क़ि जिस कामुकता अश्लीलता नांच गाना पिछवाड़ा मटकाने के कारण इतना वैभव शाली राजतंत्र खत्म हो गया, क्या आप मूलनिवासियों का चींटी जैसा नगण्य अस्तित्व दुश्मन के द्वारा जारी hips never lies..... कार्यक्रम मे सुरक्षित रह सकता है???
क्या इस सब मे आपकी स्वयं की सक्रिय सहभागिता के बाद भी आपका मान सम्मान स्वाभिमान दृढ़ता से कायम रह सकेगा????
*एक न एक दिन तो तुम्हारा अस्तित्व खत्म होगा ही।*
उस समाज का भला कौन कर सकता है जो स्वयं अपनी बैंड बजवाने व बजाने मे लगा हो?
आप है क़ि केवल दुश्मनो को गाली दे कर भड़ास निकालना ही अपना काम मान बैठे हैं।
इसीलिए कहते हैं क़ि अभी भी समय है, मान जाओ।
*नच्च गव्य वेरमणी सिख्खा पदं समादयामी* और *सुरा मेरु मज्ज पमादट्ठाना वेरमणी सिख्खा पदं समादयामी* पर अमल करो और कराओ। यही तुम्हारी मुक्ति का एक मात्र सूत्र है।
आपका मंगल हो।
सर्वे भवन्तु सुखना...
सब्बे सत्ता सुखी होन्तु...
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भूमि नमो भारत🇮🇳
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