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Showing posts from July, 2017

विश्वगुरु भारत माँ 🇮🇳को गर्भासय का कैंसर और दुनियां मे बुद्धत्व (enlightenment) की प्राप्ति पर लगा गृहण- एक विचारणीय प्रश्न

*विश्वगुरु भारत माँ 🇮🇳को गर्भासय का कैंसर और दुनियां मे बुद्धत्व (enlightenment) की प्राप्ति पर लगा गृहण- एक विचारणीय प्रश्न* 🌷🌷9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 हम भली भाँति जानते हैं क़ि सिद्धार्थ गोतम बुद्ध से पहले 27 बुद्ध हुए हैं अर्थात गोतम बुद्ध इस बुद्ध परम्परा मे 28वें बुद्ध जाने जाते हैं। जिसमे से 22वे बुद्ध का नाम *ककुसंद बुद्ध* है। जिनका जन्म स्थान asiatic society journal 1836 के शोध के अनुसार मगध राज्य था जो क़ि 3101 BC मे पैदा हुए थे। उस समय मगध राज्य मे क्षेम राजा का राज्य स्थापित था। वहीं 23वें बुद्ध का नाम है *कोणगंम्य बुद्ध* जो 2099 BC मे प्रद्योत राजा के काल मे जनम लिये थे। जिनके कारण सीलोन (ceylon) खूब फला फ़ूला। 24वें बुद्ध का नाम *कश्यप बुद्ध* है। जिन्होंने सीलोन (ceylon) अर्थात वर्तमान अनुराधापुरम का भ्रमण किया था। कश्यप बुद्ध का जन्म ईशा पूर्व 1014 मे हुआ था। इसी प्रकार ईसा पूर्व 563 मे मूलनिवासी आदिवासी मुखिया शुद्धोधन जी के यहां सिद्धार्थ गोतम बुद्ध का जन्म हुआ था। जो बुद्ध परम्परा मे 28वें बुद्ध जाने जाते हैं। सवाल ये है क़ि *22वे बुद्ध व 23वें बुद्ध के बीच जन्...

दिव्य ज्योति-ब्रम्ह ज्योति, खुदाए नूर -devine light के चक्कर मे अम्बेडकरवादी बौद्ध बने घनचक्कर

*दिव्य ज्योति-ब्रम्ह ज्योति, खुदाए नूर -devine light के चक्कर मे अम्बेडकरवादी बौद्ध बने घनचक्कर* 🌷🌷9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳 आज कल ब्राम्हण धर्मियों का एक *दिव्य ज्योति जागृति मिशन* चल रहा है। जिसमे वो लोगों से अपने हृदय पर ध्यान लगाने को कहते है। जिस पर काफी मेहनत के बाद किसी किसी को अपने हृदय मे रोशनी या बिजली जैसा एहसास होता है। इसे ही ब्राह्मण धर्मी लोग दिव्य ज्योति या ब्रम्ह ज्योति के नाम से प्रचारित करते रहे हैं। जबकि इसी धम्मप्रकाश को मुस्लिम साथी *खुदाए नूर* के नाम से जानते हैं। इसी धम्मप्रकाश को ईसाई लोग *Devine Light* के नाम से जानते हैं। इसी धम्मप्रकाश को अन्य धर्मावलंबी अलग अलग नामो से जानते हैं। इन अलग अलग नामों की बजह से लोग संकोच मे जरूर पड सकते हैं। लेकिन इतना तो तय है क़ि यह अलग अलग नाम कोई सच्चाई नहीं है। सच्चाई न तो दिव्य ज्योति है। न ही ब्रम्ह ज्योति है। न ही खुदाए नूर कोई सच्चाई है। न ही यह सच्चाई devine light हो सकती है। *सच्चाई तो केवल वह सास्वत ऊर्जा रूपी धम्मप्रकाश है, जो ध्यान अवस्था मे महशुस होता है।* मगर बहुसंख्य अम्बेडकरवादी लोगों का मानना है क़ि य...

भारत मे जनसंख्या नियंत्रण का अचूक उपाय: दंडनीय शिशु टीकाकरण।

*भारत मे जनसंख्या नियंत्रण का अचूक उपाय: दंडनीय शिशु टीकाकरण।* 🌷🌷9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 आप अपने शिशुओं व स्वयं (टेटनस) को अनिवार्य टीकाकरण के लिए बाध्य किये जाने वाले हैं। न मानो तो देखते रहियो...🤔 जिसे कानून बनाकर दंडनीय अपराध घोषित करके लागू किया जायेगा। जो अपने बच्चों का टीकाकरण नही करायेगा वह जेल जाने व यातना झेलने के लिए तैयार रहे। पक्का.... जो जो घटनाये विदेशो मे हो रहीं है देर सवेर वो भारत मे भी होती रहीं है और आगे भी होंगी। क्योंकि यह सब का सब सडयंत्र डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को संविधान लिखने मे उलझाकर उन्ही के रहते उन्ही के सामने किया गया है। इसका एक मात्र उपाय सच्चे राष्ट्रवाद द्वारा अपने देश की संप्रभुता की रक्षा करना मात्र है। अन्यथा सब के सब तिल तिल कर मारे जाओगे। ये टीकाकरण अभियान जबरदस्ती जनसंख्या नियंत्रण का एक उपाय मात्र है। नही तो विदेशी WHO वालों को क्या पड़ी तुम्हारे स्वास्थ्य की। कोई विदेशी भला तुम्हारी चिंता फ्री मे क्यों करेगा। जरा खुद सोचो। आज भारत मे प्रति महिला 2.43 बच्चे जन्म ले रहे हैं जो हम दो हमारे दो से भी ज्यादा हैं। जबकि जापान, अमेरिका, जर्मन...

थिंक टैंक का बहुजनो मे पूर्ण अभाव- सभी समस्याओ की मूल बजह

*थिंक टैंक का बहुजनो मे पूर्ण अभाव- सभी समस्याओ की मूल बजह* 🌷🌷9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳 कोई आपको तब तक गुलाम नहीं बना सकता जब तक आपकी उस गुलामी मे सहमति न हो। इस सहमति कब कैसे कथित गुलाम तबके ने अपने शोषकों को दे दी कब किस प्रकार नही दी इसका अज्ञान ही आपकी मूल सहमति है। जब तक इसे ठीक नही करोगे तब आप केवल प्रतिक्रिया ही कर सकते हो क्रिया नहीं। यही बजह रही है क़ि लगातार भारत मे अम्बेडकरवाद का प्रचार प्रस्थापना होने के बावजूद ब्राम्हणवाद शिकंजा मजबूत हुआ है।  जिससे सिद्ध होता है क़ि हमारी विचारधारा मे कहीं न कही कोई बढ़ी चूक है। जिसके कारण ही हमारे द्वारा लगातार अम्बेडकरवाद की प्रस्थापना का काम करने के बावजूद पूरे देश के लोकतंत्र से बहुजन समाज के लोग बाहर खदेड़े जा चुके हैं। इसको समझो मान्यवर🇮🇳 आज पूरे विश्व सहित हम सबको कोई भगवान नहीं बल्कि इन्शान ही जैसा चाहते हैं वैसा नचा रहे हैं। इस तरह विश्व के सभी लोगों को अपनी उंगली से इशारे पर नचाने वाले लोगों को थिंक टैंक कहा जाता है। जो क़ि रुचि अभिरुचि के हिसाब से अलग अलग विषय के महाज्ञानी होते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार विभि...

यदि गोरखधंधा व्यवसाय है तो इस गोरखधंधे का विरोध नक्सलवाद कैसे??

*यदि गोरखधंधा व्यवसाय है तो इस गोरखधंधे का विरोध नक्सलवाद कैसे???* 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳 तीन रुपये कीमत की चीज को 13 रुपयों की कीमत मे ग्राहकों को बेचना *व्यवसाय* (bussiness) कहलाता है। इस गोरख धन्धे के समर्थक अपने इस कृत्य को *विकास* (development) कहतें हैं। जबकि जो लोग इस ठगी को आम देशवासियों के सामने उजागर करें उनको ये गोरखधंधेबाज -नक्सली कहते हैं। बल्कि जो राष्ट्रभक्त देशवासी इस अन्यायी गोरखधंधे की खुल कर हर प्रकार से खिलाफत करें उन्हें ये ठग देशद्रोही आतंकी कह कर बदनाम करते हैं। *ऐसे मे आप स्वयं विचार करो क़ि सही कौन है?🤔* गोरखधंधे बाज या वो देशभक्तजन जो इस गोरखधंधे के विरोधी हैं????? बिडम्बना ये है क़ि बहुजनों मे पिछले 500 सालों से इसी गोरखधंधे मे हिस्सेदारी की जंग विभिन्न रूपों मे चल रही है। कभी कोई इसे सामाजिक न्याय कहता है तो कभी कोई इसे आरक्षण कहता है। काम दोनो एक ही हैं। चाहे भोलेभाले देशवासियों को गोरखधंधे द्वारा ठगना व फांसना हो या सामाजिक न्याय के नाम पर भारतवासियों मे अपनी अपनी छीना झपटी हो। दोनो ही अन्याय का समर्थन करते है। दोनो ही देश व देशवासी विर...

*क्या खूब लगती हो बड़ी सुंदर दिखती हो... कहते रहो... अच्छा लगता है??

*क्या खूब लगती हो बड़ी सुंदर दिखती हो... कहते रहो... अच्छा लगता है???* 🌷🌷9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 हमेशा स्वयं की रंगाई पुताई करने वाले स्त्री पुरुष ध्यान दें। Most commercial personal products are full of endocrine disrupting chemicals that are toxic and wreak havoc on our hormones and health! अर्थात जितनी ज्यादा चेहरे मोहरे की रंगाई पुताई उतनी ही ज्यादा शरीर के endocrine सिस्टम की गड़बड़ी के कारण मोटापा, थकावट, हार्मोन की गड़बड़ी, BP, THYROID, हृदय रोग सुगर आदि का खतरा। आप चिंता न करो। जिंदगी के मजे लूट...🏃‍♀ ये सभी ख़ूबसूरती बेचने वाले उत्पाद आपको स्वयं से नफरत करना ही नही सिखाते बल्कि endocrine system पर हमलावर होने के कारण तुमको तुम्ही से छीनने का भी काम करते हैं। अर्थात स्वर्ग की सैर की गारंटी पक्की... रंगोगी नही तो फोटो कैसे खींचोगी? कैसे सजोगी, सजना के लिए?? इसलिए जुटे रहो। तथागत बुद्ध तो झूठमूठ मे ही कह रहे थे *माला गंध विलेपन वेरमणी सिक्खा पदं समाद्यामि*। आप जुटे रहो .... ले ले सेल्फ़ी। तूं खींच मेरी फोटो😱 Read👇copy☝paste🌷share https://thyroidpharmacist.com/artic...

जातिव्यवस्था का निर्माता आपका चिरस्थाई दुश्मन लेकिन जातिअपराध आपका हथियार कैसे हो सकता है?*

*जातिव्यवस्था का निर्माता आपका चिरस्थाई दुश्मन लेकिन जातिअपराध आपका हथियार कैसे हो सकता है?* 🌷🌷9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳 बहुजन समाज जब से सत्ता से खदेड़ा गया है तब से चमारों व यादवों को अन्य जातियों के दड़वों मे बन्द जाति समूह पानी पी पी कर आरोप प्रत्यारोप लगाने व सारा बहुजन आंदोलन खत्म करने कराने का दोष सभी चमारों व अहीरों पर मडने मे बहादुरी समझ रहे हैं। यह आरोप प्रत्यारोप अन्य जाति समूहों मे पसर रही असुरक्षा का द्योतक तो है ही साथ ही उनके अंदर घर कर रही बहुजन समाज की एकता की ललक भी साफ साफ दिखाई दे रही है। *जो क़ि विपरीत माहौल मे बहुजन समाज के लिए बहुत ही शुभ संकेत है।* मगर आज जरूरत इस बात की है क़ि आत्मसुधार कैसे किया जाये? क्या क्या गलतियां हमसे या हमारे मामु (माया मुलायम) लोगों से हुई जिन्हें सुधारा जाये आदि। ऐसे मे जव बात आत्मसुधार व इतिहास से सीख लेने की हो तो हम सोचने को विवश होते है क़ि *जब जाति आपकी सबसे बड़ी समस्या है। तो आप उसी जातिव्यवस्था को हथियार कैसे बना सकते हो~??* 🤔 मगर जातीय शोषण को राजनीति का हथियार तो बनाया ही गया। जिसका नतीजा यह हुआ क़ि जो जातिव्यवस्था खत्म करने क...

भगवान बुद्ध ने प्रवज्जा क्यों ग्रहण की?

*भगवान बुद्ध ने प्रवज्जा क्यों ग्रहण की???* 💐💐9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर लिखित *बुद्ध व उनका धम्म* किताब मे उन्होंने बताया क़ि कोलियों व शाक्यो मे रोहिणी नदी के जल बटवारे को लेकर हमेशा विवाद रहता था। इसी को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की पूर्ण कोशिश के बाद भी जब शाक्य व कोलिय नही माने तो भगवान बुद्ध ने परेशान होकर पृवज्जा लेकर घर परिवार छोड़ दिया। *क्या आप पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के उक्त कथन से पूर्ण सहमत हैं???* 🤔 यदि हां ।।।।  तो आज किसी को बुद्ध धर्म को न तो ग्रहण करने की जरूरत है और न ही जातीय आधार पर बंटे भारतीयों मे कोलिय व शाक्य जातियों के अलावा किसी को भगवान बुद्ध को अपना मानने की जरूरत बची। भारत को बुद्धत्व प्राप्त भारत बनाने की बात को तो फिलहाल छोड़ ही दिया जाये। जबकि वही पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अपनी अंतिम क्रांति ज्योति भी बौद्ध धर्म स्वीकार करके शुरू कर गए। ऐसे मे कहीं कोई लोचा जरूर है जिसकी बजह से उनके विचार आपस मे contradict कर रहे हैं?? *आप कैसे सुलझओगे इस गुत्थी को?* *आज न तो रोहिणी जल विवाद बचा और न ही कोलियों शाक्यों के बीच कोई...
*भगवान बुद्ध ने प्रवज्जा क्यों ग्रहण की???* 💐💐9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर लिखित *बुद्ध व उनका धम्म* किताब मे उन्होंने बताया क़ि कोलियों व शाक्यो मे रोहिणी नदी के जल बटवारे को लेकर हमेशा विवाद रहता था। इसी को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की पूर्ण कोशिश के बाद भी जब शाक्य व कोलिय नही माने तो भगवान बुद्ध ने परेशान होकर पृवज्जा लेकर घर परिवार छोड़ दिया। *क्या आप पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के उक्त कथन से पूर्ण सहमत हैं???* 🤔 यदि हां ।।।।  तो आज किसी को बुद्ध धर्म को न तो ग्रहण करने की जरूरत है और न ही जातीय आधार पर बंटे भारतीयों मे कोलिय व शाक्य जातियों के अलावा किसी को भगवान बुद्ध को अपना मानने की जरूरत बची। भारत को बुद्धत्व प्राप्त भारत बनाने की बात को तो फिलहाल छोड़ ही दिया जाये। जबकि वही पूज्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अपनी अंतिम क्रांति ज्योति भी बौद्ध धर्म स्वीकार करके शुरू कर गए। ऐसे मे कहीं कोई लोचा जरूर है जिसकी बजह से उनके विचार आपस मे contradict कर रहे हैं?? *आप कैसे सुलझओगे इस गुत्थी को?* *आज न तो रोहिणी जल विवाद बचा और न ही कोलियों शाक्यों के बीच कोई...

क्या सिद्धार्थ गोतम के पिता शुद्धोधन जी कपिलवस्तु राज्य के राजा थे या मूलनिवासी गण परम्परा मे आदिवासियों के मुखिया जी थे-एक दृष्टिपात?

* क्या सिद्धार्थ गोतम के पिता शुद्धोधन जी कपिलवस्तु राज्य के राजा थे या मूलनिवासी गण परम्परा मे आदिवासियों के मुखिया जी थे-एक दृष्टिपात?* 🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर रचित buddha and his dhamma पुस्तक मे उन्होंने बिंदुवार लिखा है क़ि In sixth century B.C., Northern India did not form a single Sovereign State. 2. The country was divided into many States, some large, some small. Of these some were monarchical and some non-monarchical. अर्थात बिंदु संख्या 2 कहती है क़ि 6वी शताब्दी ईसापूर्व मे उत्तर भारत छोटे छोटे राज्यो मे बंटा हुआ था। जिसमे कुछ राज्यों के मुखिया monarch या राजा हुआ करता था और कुछ का मुखिया राजा नही हुआ करता था। वहीं डॉ बाबासाहेब आगे लिखते हैं क़ि 3. The monarchical States were altogether sixteen in number. They were known by the name of Anga, Magadha, Kasi, Kosala, Vriji, Malla, Chedi, Vatsa, Kuru, Panchala, Matsya, Saursena, Asmaka, Avanti, Gandhara and Kambhoja. अर्थात बिंदु संख्या 3 कहता है क़ि ऐसे 16 राज्य थे जिनके राजा (monarch) हुआ करते थे उनक...

बहुजनों की सभी समस्याओं का अचूक उपाय- भीमास्त्र (problem of rupees)

* बहुजनों की सभी समस्याओं का अचूक उपाय- भीमास्त्र (problem of rupees)* http://theheartysoul.com/living-without-money/?t=ET&W=TA 🍁🍁9*4*5🌹🌹🌹🌹🇮🇳 इतिहास के आईने मे जब हम देखते हैं तो पाते हैं क़ि बहुजन महापुरुषों ने *अभी तक जो भी संघर्ष किया है। वह बनी बनाई व्यवस्था मे हिस्सेदारी के लिए किया है।* जबकि आधुनिक काल मे चालू व्यवस्था का निर्माता चिरपरिचित दुश्मन ही रहा है। इस छीना झपटी रूपी व्यवस्था / संघर्ष मे जितनी ऊर्जा हमारे महापुरुषों ने खडन या विरोध मे लगाई है यदि उसकी आधी ऊर्जा भी दूसरी समानांतर व्यवस्था बनाने मे लगाते तो जाने कब का भारत देश मूलनिवासियों का अपने हाथों मे होता। मगर ऐसा नही किया गया। कालांतर मे इस बात का अहसास डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को हुआ। जिसके कारण समानांतर व्यवस्था खड़ी करने के लिए ही व एक भारतीय पहचान बनाने के लिए ज्यूं ही धर्मान्तरण का विशाल कदम उन्होंने उठाया।  वैसे ही ब्रह्म का सिंहासन डोलने लगा। नतीजे मे 2 महीने के अंदर ही अंदर देवी जिहादी सविता सारस्वत द्वारा हत्या करा दी गई। सवाल उठता है क़ि अभी वर्तमान मे क्या किया जाये?  तो इसक...

तर्क व्यवस्था नरक की पहली सीडी और पराइन्द्रिय ग्रन्थि व्यवस्था स्वर्ग का अंतिम सोपान- एक गूढ़ अन्वेषण

* तर्क व्यवस्था नरक की पहली सीडी और पराइन्द्रिय ग्रन्थि व्यवस्था स्वर्ग का अंतिम सोपान- एक गूढ़ अन्वेषण* 🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 कभी कभी आपके मन मे आता होगा क़ि क्या क्या बजहें है बहुजनों की इतनी बुरी हालात की? जिसके अध्ययन मे मैने पाया क़ि बहुजन समाज की सभी हारों का मूल कारण है। इन्द्रियों द्वारा निर्मित शब्द रूपी विचारों (किताबी ज्ञान) को आपस मे मिलाते रहना। जिसका निर्धारण अबोध शिशु अवस्था मे ही शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक लोकलाज रूपी माँ बाप के दबाव के माध्यम से बाल्यकाल मे ही कर दिया जाता है। बाद मे हम कभी भी किसी भी व्यक्ति की बात को स्वीकारने या नकारने के समय पर अपने शिशुकाल मे माँ बाप या समाज द्वारा दिमाग मे बैठा दी गई। कथित अच्छी या बुरी बातों/ स्मृतियों से जीवन भर मिलान (tag) करके स्वीकार या अस्वीकार करते रहते हैं। जो जरूरी नही क़ि सही हों... इसी स्वीकार्यता या अस्वीकार्ता को ही हम ठेंगा (👍👎) या पसंद (like)/नापसंद या अपनी हां या न के रूप मे जीवन भर प्रदर्शित करते रहते हैं। चूंकि इस पसंद नापसंद का निर्धारण माँ बाप या शिक्षको द्वारा बाल्यकाल से लगातार किया जाता है। इसलिए हमे...

माइक्रोसॉफ्ट मालिक द्वारा विषाणु जनित मच्छरों से आपको मारने की तैयारी।

* माइक्रोसॉफ्ट मालिक द्वारा विषाणु जनित मच्छरों से आपको मारने की तैयारी।* 🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🌙 बिल गेट्स के गेट्स फाउंडेशन द्वारा विकसित कराये जा रहे देश वासियों को मारने के लिए खतरनाक विषाणु। *जीका वाइरस को मच्छरों मे डाल कर जनसंख्या नियंत्रण जारी।* *बोलो टीकाकरण द्वारा क्या आपने अपने बच्चों को मरने/ मरवाने की कर ली है तैयारी???* सवाल ये उठता है क़ि *आप कब तक ओरिजिनल माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर खरीद कर इन मानवता के दुश्मनो के हाथ मजबूत करते रहोगे?????* प्रेम से बोलिये बाबासाहेब की जय। जोर से बोलिये जय जयय भीम। कब तक यूँ ही भूतकाल मे जीते रहोगे???🤔🌙 भवतु सब्ब मंगलं स्वामी डॉ बोधी आनंद अधिक जानकारी के लिए निम्न👇 लिंक देखें। https://missiongalacticfreedom.wordpress.com/2016/08/14/eugenics-depopulation-deadly-mosquito-games/amp/

डिजिटलीकरण बहुजन कामधेनु कार्मिकों के खस्सीकरण कर लोकतंत्र पर राजतंत्र लादने का सबसे आसान उपाय

* डिजिटलीकरण बहुजन कामधेनु कार्मिकों के खस्सीकरण कर लोकतंत्र पर राजतंत्र लादने का सबसे आसान उपाय* 🌷🌷9*4*5🍁🍁🍁🍁🇮🇳 जिस प्रकार से आजकल पंडा पुजारी सरकारें विदेशियो के इशारे पर कर्मचारियों अधिकारियो को डिजिटलीकरण unique identification number (UID-आधार) नोटबंदी करके बांध रही है। इससे आने वाले समय मे बहुजन समाज के गिने चुने अधिकारी कर्मचारी जो कुछ बहुत अक्ल रखते हैं। जो कुछ सामाजिक जागरूकता का कार्य भी करते रहते हैं। यदि इन सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रत्येक क्रिया कलाप का डिजिटलीकरण कर दिया गया तो बहुजन समाज मे इन चंद गिने चुने समझदार लोगो का मुंह भी बन्द हो जायेगा। बामसेफ वालो ने कर्मचारियों अधिकारियो को नकद देने वाली कामधेनु बना रखा है। संघियो को पता है क़ि हमारे खिलाफ गवारों को बरगलाने का काम ये कर्मचारियों की पगार से हो रहा है। इसी कारण पंडे पुजारीयों की नजर मे आरक्षण एक कांटा बना हुआ है। इसीलिए एनकेन प्रकारेण नौकरियां व आरक्षण निजीकरन करके खत्म किया जा रहा है। इस बजह से आने वाले समय मे ये कामधेनु कार्मिक, डिजिटल मुद्रा द्वारा स्वतः स्रोत ज्ञात होने के कारण अपना मुंह बन्...

GST लगने के बाद sanitary pad शौन्दर्य प्रसाधन आदि सब की कीमतें दुगनी फिर भी विरोध केवल व्यापारी करें 🇮🇳। क्या आम भारतवासी चेतनाशून्य हो चुके है??

* GST लगने के बाद sanitary pad शौन्दर्य प्रसाधन आदि सब की कीमतें दुगनी फिर भी विरोध केवल व्यापारी करें 🇮🇳। क्या आम भारतवासी चेतनाशून्य हो चुके है?? * 💐💐9*4*5🍁🍁🍁🍁🇮🇳 आप सभी लोग इस समय चहुं ओर वस्तु एवम् सेवा कर (GST) पर धरना प्रदर्शन रोष आदि देख रहे होंगे। जो की पूरी तरह जायज है। जायज इसलिए भी है क्यों क़ि इस GST बिल द्वारा संविधान वर्णित centre state directive principles को कमजोर कर राज्यों की कर प्रणाली व आमदनी के स्रोत पर लगाम लगाई गयी है। जिसके दीर्घकालीन दुष्परिणाम होंगे। राज्यो के पास अपनी आमदनी न /कम होने से राज्यो की autonomy (स्वायत्ता) को बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न किया जा चुका है। जिसके द्वारा केंद्रीय सत्ता के विपरीत विचारधारा की सरकार किसी राज्य मे होने से वहां की जनता के सामने कृत्रिम आर्थिक संकट उत्पन्न कर उस राज्य की जनता को केंद्र मे सत्तासीन पार्टी को राज्य मे भी जिताने के लिए बाध्य किया जायेगा। दूसरी मुख्य समस्या इस GST से भारत देश की संप्रभुता को चूना लगाना है। क्योंकि यह GST बिल यदि केवल भारत मे ही केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों मे एक समान कर प्रणाली करने ...

वर्षावासकाल मे कामुकता, अश्लीलता, नशाखोरी का खुले आम नंगा नांच, भारतवासियों को ढक्कन करने का कार्यक्रम- बोल धम्म

* वर्षावासकाल मे कामुकता, अश्लीलता, नशाखोरी का खुले आम नंगा नांच, भारतवासियों को ढक्कन करने का कार्यक्रम- बोल धम्म * 🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 भारत मे राजाओं नबाबो के पतन का मूल कारण राज महलों मे बुरी तरह व्याप्त हरम प्रथा, नांच गाना और रंडीबाजी रही है। इतिहास कारों ने लिखा तो यहां तक है क़ि अकबर और कई नबाब जब महलों की सीढियां चढ़ते थे तब दोनो तरफ नग्न युवतियों को खड़ा कर उनके स्तन पकड़- पकड़ कर जीना चढ़ा करते थे। क्या नजारा रहा होगा..... वहीं ब्राह्मण धर्मी राजाओं की करामातों का काला चिठ्ठा काफी लम्बा है। इसी श्रृंखला मे डॉमिनिक लापियरे और लैरी कोलिन्स लिखते हैं क़ि महाराजा जालंधर अक्सर अपने राजमहल मे पूर्णतया उत्तेजित लिंग के साथ नग्न अवस्था मे जनता के बीच अपनी कामुकता की नुमाइश करते थे। उस समय तक जनता इतनी मूर्ख बन चुकी थी क़ि राजा का उत्तेजित लिंग अवस्था को देख कर खुश होती और celebrate करती थी। ऐसे ढेरों रंडीबाजी कामुकता अश्लीलता के पुजारी राजा, महाराजाओ, नबाबो की आँखो देखी कहानिया भरी पड़ी हैं। *जो यह सिद्ध करती हैं क़ि कामुकता अश्लीलता रंडीबाजी की बजह से ही इन राजाओं का पतन हुआ।* सवा...

बहुजनो की गंगा नदी ~माँ~ है या रखैल- एक दृश्टिकोण???

* बहुजनो की गंगा नदी ~माँ~ है या रखैल- एक दृश्टिकोण???* 🍁🍁9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा क़ि अगला विश्व युद्ध जल के लिए ही होगा। इसीलिए united nations ने एक कार्यक्रम चला रखा है जिसका नाम है PER DROP MORE CROP. जिसके माध्यम से जल संचय व जल के औचित्यपुर्ण उपयोग की शिक्षा देशवासियो को दी जाती है। मगर भारत देश के कथित बुद्धिजीवी जो अक्सर झामसेफ नाम के संगठन से आते हैं। अक्सर कहते पाये गए हैं क़ि गंगा नदी मात्र एक नदी है कोई माँ या पिता नही। आपको शायद जानकारी होगी क़ि गंगा जी की शुरुआत कैलाश मानसरोवर तिब्बत से होती है। जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, विहार, बंगाल और बांग्लादेश होते हुए बंगाल की खाड़ी मे समाहित हो जाती है। भारत सरकार के आंकड़ो के अनुसार गंगा नदी द्वारा कुल 10,86,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल सिंचित होता है। वहीं दस लाख छियासी हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के भूगर्भ जल को रिचार्ज करने का काम भी गंगा नदी जल से ही होता है। जिसको पीकर आप जिंदा हो। गंगा नदी की विभिन्न छोटी नदियों, नहरो, बम्बो, जलासयों आदि द्वारा उत्तर प्रदेश मे 2,94,364 km² क्षेत्...

बहुजनों मे समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व स्थापित करने की अनिवार्य शर्त "वस्तु और सेवा विनिमय"

* समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व स्थापित करने की अनिवार्य शर्त "वस्तु और सेवा विनिमय" *। 🌷🌷9*4*5💐💐💐💐🇮🇳 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा क़ि *"हमारा संघर्ष सत्ता और संपत्ति के लिए नही बल्कि समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के लिए है"।* जबकि आज हमारे नेता लोग कहते हैं क़ि सत्ता वो चावी है जिससे सभी ताले खोले जा सकते हैं। खोल लो ताले... पढ़े लिखे नौकर लोग भी वही बात दोहराते हुए कहते हैं क़ि हमारा संघर्ष समता स्वतंत्रता बंधुत्व के लिए है।  मगर असमानता की जड़ "मुद्रा और संपत्ति" के लिए जी जान एक किये हुए हैं। अर्थात स्वयं तो गाड़ी बंगला कार जेवर प्लाट आदि के लिए ही मर रहे हैं। मगर अपने उन्ही गरीब भाइयो को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की घुट्टी पिलाने मे लगें हैं। निर्लज्ज यह भी नही सोचते क़ि हम कह क्या रहे हैं। स्वयं तो बदनाम हो ही रहे हैं डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को भी बदनाम कर रहे हैं। जिन गरीब भाइयो से बंधुत्व बढ़ाने को डॉ अम्बेडकर आदेश दिए थे। आज उन्ही से बंधुत्व की जगह वैर भाव बढ़ाने मे लगे हैं। आने वाले समय मे सलवा जुड़ूम जैसे संगठन बना कर संघी इन्ही गरीब भाइयो क...

हनुमान की पूँछ मे लगन न पाई आग। लंका सारी जल गई गए निशाचर भाग।।

* हनुमान की पूँछ मे लगन न पाई आग।* *लंका सारी जल गई गए निशाचर भाग*।। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷💐 ब्राह्मण धर्म प्रतीकों व चिन्हों का पुलिंदा है। इन मूर्तियो व तस्वीर रूपी प्रतीकों मे छुपे बुद्धिज्म को हासिल कर ब्राह्मण धर्म को *हजम* करना बहुत आसान है। मगर आप है क़ि उन्ही झूठे प्रतीक चिन्हों व कहानियों की उधेड़ बुन मे लगे हैं जो मूर्खो से अपनी बात मनवाने के लिए exaggerate (मट्ठा बढ़ाना) की गयी हैं। ये मट्ठा बढ़ाना ही तो है जब कहा जाता है क़ि *हनुमान की पूँछ मे लगन न पाई आग। लंका सारी जल गई गए निशाचर भाग*। ये भाषा शैली अलंकारित भाषा शैली है। जिसे सुन कर अविवेकी व नासमझ इन्शान तुरंत नतमस्तक हो जाता है। उसके मन मे तुरन्त विचार आता है *अरे साला पुंछ मे आग लगी ही नही और पूरी लंका जल भी गयी। वाह क्या बात है😱*। जो लेखक व वक्ता की बात को प्रभावी ढंग से communicate कर देती है। क्योंकि अंतिम उद्देश्य *अपनी बात दूसरों को स्वीकार कराना होता है। फिर चाहे वह तर्क व विज्ञान से समझाओ या अलंकारित कहानियो या भाषा शैली से।* उम्मीद है क़ि इतनी simple बात आप स्वयं समझेगे व दूसरों को भी समझायेंगे। भवतु सब्ब...

स्त्री दमन, नागवशियों का टोटम नाग और नाग पंचमी का रहस्य।

स्त्री दमन, नागवशियों का टोटम नाग और नाग पंचमी का रहस्य। 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸💐 गुड़ियां या नाग पंचमी का त्योहार ब्राह्मण धर्मियों द्वारा कानपुर मंडल मे बड़े ही जोश के साथ मनाया जाता है। जिसमे स्त्री पुरुष बच्चे आदि कपड़े की गुड़िया (doll) बना कर उस पर लाठी डंडे से पीट पीट कर वार करते हुए हत्या का प्रहसन करते हैं। जो सीधे सीधे स्त्री दमन और मर्डर का प्रतीक है। जिसे तुलसीदास की कहानियों से और प्रेरणा मिलती है। बिडम्बना ये है क़ि यह स्त्री हत्या का नाटक स्वयं स्त्रियां भी बड़े चाव से अंजाम तक पहुंचाती है। इस कन्या हत्या के जश्न के बाद शाम को पुरुष अक्सर कुश्ती लड़ने / देखने दंगल मे जाते हैं। इस पूरे वाकये का प्रतीकात्मक मतलब है, स्त्री दमन। इसकी शुरुआत ऐसे लोगों की पराजय के फलस्वरूप हुई होगी जो नागवंशी टोटम को मानते और जानते थे। मगर आज यही पराजित कौमें अपनी पराजय का जश्न बड़े ही धूमधाम से मनाती हैं। *नागवंशी टोटम का मतलब था जागृत कुण्डलिनी शक्ति से परिपूर्ण समाज। इस शक्ति का मतलब है व्यक्ति की सम्पूर्ण जागृति अवस्था और बहुत ही उच्च आंतरिक चेतना स्तर।* इंशानी चेतना के इसी उच्च स्तर को भगवान ...

नागो की नाग पंचमी, जनेऊ, कुण्डलिनी शक्ति और सिंधु घाटी सभ्यता का स्वणिम बौद्ध धर्म

*नागों का साम्राज्य और नाग पंचमी का बहुजनों के लिए महत्व*। 💐💐9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳 आज नागपंचमी है।  डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने दीक्षा प्राप्ति के लिए नागपुर स्थान का चयन किया क्योंकि वह नागवंशियों की राजधानी हुआ करती थी। यह नाग ही सिंधु घाटी सभ्यता का टोटम हुआ करता था। यह नाग ही है जो ब्राह्मणों का जनेऊ बन बन गया। यह कुण्डलिनी नाग ही है जो विभिन्न सभ्यताओ द्वारा स्वीकारा गया। यह नाग ही था जो प्रजनन अंग पर कुंडली मार कर बैठा है। जो लिंग व योनी पर बैठा भोला शंकर बन गया। यह नाग ही है जो प्रजनन अंगो पर बैठा होने के कारण तांत्रिकों द्वारा कामुक *नाग पंचमी* त्योहार बन गया। यह बहुजन नागों की सिंधुघाटी सभ्यता का नाग ही है जो Indian medical association, 🇮🇳 japanese medical association, 🇯🇵 chinese medical association, 🇨🇳 british medical association, 🇬🇧 american medical association 🇱🇷 Myanmar medical association Indonesian medical association Singapore medical association और तो और इस्लामिक देश पाकिस्तान मेडिकल असोसिएशन। ...