GST लगने के बाद sanitary pad शौन्दर्य प्रसाधन आदि सब की कीमतें दुगनी फिर भी विरोध केवल व्यापारी करें 🇮🇳। क्या आम भारतवासी चेतनाशून्य हो चुके है??
*GST लगने के बाद sanitary pad शौन्दर्य प्रसाधन आदि सब की कीमतें दुगनी फिर भी विरोध केवल व्यापारी करें 🇮🇳। क्या आम भारतवासी चेतनाशून्य हो चुके है??*
💐💐9*4*5🍁🍁🍁🍁🇮🇳
आप सभी लोग इस समय चहुं ओर वस्तु एवम् सेवा कर (GST) पर धरना प्रदर्शन रोष आदि देख रहे होंगे।
जो की पूरी तरह जायज है। जायज इसलिए भी है क्यों क़ि इस GST बिल द्वारा संविधान वर्णित centre state directive principles को कमजोर कर राज्यों की कर प्रणाली व आमदनी के स्रोत पर लगाम लगाई गयी है।
जिसके दीर्घकालीन दुष्परिणाम होंगे। राज्यो के पास अपनी आमदनी न /कम होने से राज्यो की autonomy (स्वायत्ता) को बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न किया जा चुका है। जिसके द्वारा केंद्रीय सत्ता के विपरीत विचारधारा की सरकार किसी राज्य मे होने से वहां की जनता के सामने कृत्रिम आर्थिक संकट उत्पन्न कर उस राज्य की जनता को केंद्र मे सत्तासीन पार्टी को राज्य मे भी जिताने के लिए बाध्य किया जायेगा।
दूसरी मुख्य समस्या इस GST से भारत देश की संप्रभुता को चूना लगाना है। क्योंकि यह GST बिल यदि केवल भारत मे ही केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों मे एक समान कर प्रणाली करने हेतु लगाया गया होता तो सरकार का यह कदम स्वागत योग्य माना जा सकता था।
मगर इस GST बिल द्वारा न केवल भारत के विभिन्न राज्यो की आर्थिक आजादी छीनी गयी है बल्कि भारत की कर प्रणाली को विश्व के लगभग 110 देशो के समान कर दिया गया है। EY Global (WTO) की रपट का अध्ययन करने से भारतवासियों के खिलाफ किये गए इस सडयंत्र को आसानी से समझा जा सकता है।
जो यह स्वतः शाबित करता है क़ि यह GST भारत के व्यापारियो को सुविधा प्रदान करने के लिये नही बल्कि इस GST द्वारा विदेशों के तमाम धन्नासेठों की multinational कंपनियों को tax सहूलियतें उपलब्ध कराई गयी है।
चूंकि कोई भी विदेशी कंपनी यदि भारत मे व्यापार करे और profit अपने देश ले जाये। इसमे किसी भी प्रकार का उस देशवासियो को फायदा नही होता है।
make in india के बाद भी युवाओ की बेरोजगारी इसीलिए बढ़ी है।
इन विदेशी multinational कंपनियों को केवल आम आदमी रूपी सस्ते मजदूर उपलब्ध करा कर मजदूरो का शोषण और कराने का प्रावधान इस GST बिल द्वारा पहले ही कर दिया गया है। अभी हाल ही मे जोगीभोगी सरकार द्वारा company dispute act and payment of bonus act सहित सैकड़ो कानूनों मे बदलाव इसी सडयंत्र का हिस्सा रहा है। जिनका निर्माण डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने श्रम मंत्री रहते हुए गरीब देशवासियो के हित मे किया था।
यदि आप केवल अम्बेडकर चालीसा बांचने मे ही लगे रहे और डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा उपलब्ध कराये गए सभी कानून ही तोड़मरोड़ या खत्म कर दिए गये। तो आपके अम्बेडकर भजन गाने से कोई फायदा होगा ऐसा मैं नही मानता।
अभी एक जो सबसे मजेदार बात इस GST विरोध प्रदर्शनों से निकल कर सामने आ रही है वह है। *आम जनता मे यह संदेश का जाना क़ि यह GST देश हित मे है और व्यापारी केवल टेक्स चोरी और मुनाफाखोरी के चलते GST का विरोध कर रहे हैं।* जिसमे कुछ सच्चाइ हो सकती है मगर असली मामला है। बढ़े हुए tax लबादे का आम आदमी अर्थात आप और हमारी जेब पर डाका पड़ना। इस GST द्वारा luxury कारे सस्ती बताई जा रही है जबकि medium segment की कारो पर tax और बढ़ा दिया गया है। पहली बात तो यह क़ि भारत मे कितने बहुजन हर छः महीनो मे कार बदलते हैं जिससे बहुजनो को इसका विशाल फायदा माना जा सके। जाहिर है क़ि संख्या नगण्य है। *ऐसे मे ये luxury कारे सस्ती किन धन्नासेठों के लिये की जा रही हैं?*
आम आदमी तो बाइक मे पेट्रोल भराने को भी दस बार सोचता है। ऐसे मे इस GST से भारत मे उद्योगों के विकास पर भी लगाम लगनी तय है।
टाटा समूह द्वारा इसका प्रखर बिरोध एक उदाहरण है।
आम गरीब से गरीब महिला बालिका भी अपने चेहरे की लीपापोती पर प्रति माह लगभग पांच सौ रुपये का खर्च् करती ही होगी। जिससे संबंधित वस्तुओ पर अभी तक लगभग 10 से 15% tax का भुगतान माताओ बहनो को करना पड़ता था। मगर गोदी भोगी सरकार ने अब इसे विलासतापुर्ण आवश्यकता मानते हुए टैक्स की दर सीधे 28% पर कर दी है। जाहिर है क़ि अब इन महिलाओ का खर्च लगभग डेढ़ गुना बढ जायेगा।
और तो और अभी तक मासिक चक्र अवस्था मे प्रयोग होने वाले sanitary pad को भी गोदी भोगी सरकार ने विलासता पुर्ण आवश्यकता मानते हुए tax की सीमा 28% लाद दी है।
जिससे न केवल स्वस्थ मातृत्व ही खतरे मे पड़ा है बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान को भी करारा झटका लगा है। क्योंकि बिना शारीरिक स्वच्छता के बाहरी स्वच्छता आडम्बर के अलावा कुछ नही है।
*गोदी भोगी सरकार ने whisper, stayfree आदि के sanitary pads की कीमतों को बढ़ा कर यह संदेश भी दिया है क़ि आपके पीरियड काल मे sanitary pad की जरूरत नही बल्कि पुराने कपड़े, रुई /लत्ते इत्यादि ही उचित हैं?*
इस सबके बावजूद भी यदि यह लड़ाई केवल व्यापारी लड़ें तो इससे बढ़ी विडम्बना नही हो सकती। जबकि GST ने महिलाओ की अस्मिता को करारा धक्का दिया है।
multinational कम्पनियो को भारत लूट की खुली छूट द्वारा युवाओ के रोजी रोटी तो छिनी ही है। साथ ही उचित रोजगार के अभाव मे शादी विवाह को भी गोदी जी ने संभावित युवाओ के अच्छे दिनों मे पलिता लगाया है।
किसान की उपज का समर्थन मूल्य यदि बढ़ी हुई G & S Tax दरो के अनुरूप पुनर्निर्धारित नही किया गया तो आने वाले समय मे खेती किसानी छोडने व फांसी लगाने वाले अन्नदाताओं की संख्या मे भारी इजाफा देखने को मिलेगा।
आत्म हत्या करने को विवस होंगी वो किसान पुत्रियां जिनकी धनाभाव मे शादियां टूटेंगी।
मजदूर हितो की बली तो पहले ही गोदी सरकार तमाम मजदूर कानूनों मे संशोधन करके दे चुकी है।
इतना सब कुछ भारत देशवासियो के खिलाफ गोदी भोगी सरकार द्वारा देशवासियों का सत्यानाश करने के बाद भी यदि इस GST का विरोध केवल व्यापारी करे और आम भारतवासी नर नारी चुप चाप तमाशा देंखे, मेरी समझ से परे है।
मेरी समझ से यह भी परे है क़ि क्या ऐसे इन्शानो को इन्शान कहा जा सकता है जो अपने ही हाथो अपनी वाट लगाने हेतु देशद्रोहियो को सत्ता शौंप दे रहे हैं।
इसलिए इस लड़ाई को देशवासियो की लड़ाई बनाये बिना किसी भी प्रकार का सफल प्रतिरोध करना संभव नही है।
अल्ला जाने क्या होगा आगे.......
भवतु सब्ब मंगलं
बंदे मातरम्🇮🇳
स्वामी डॉ बोधी आनंद
नमो भारत जय भूमि
💐💐9*4*5🍁🍁🍁🍁🇮🇳
आप सभी लोग इस समय चहुं ओर वस्तु एवम् सेवा कर (GST) पर धरना प्रदर्शन रोष आदि देख रहे होंगे।
जो की पूरी तरह जायज है। जायज इसलिए भी है क्यों क़ि इस GST बिल द्वारा संविधान वर्णित centre state directive principles को कमजोर कर राज्यों की कर प्रणाली व आमदनी के स्रोत पर लगाम लगाई गयी है।
जिसके दीर्घकालीन दुष्परिणाम होंगे। राज्यो के पास अपनी आमदनी न /कम होने से राज्यो की autonomy (स्वायत्ता) को बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न किया जा चुका है। जिसके द्वारा केंद्रीय सत्ता के विपरीत विचारधारा की सरकार किसी राज्य मे होने से वहां की जनता के सामने कृत्रिम आर्थिक संकट उत्पन्न कर उस राज्य की जनता को केंद्र मे सत्तासीन पार्टी को राज्य मे भी जिताने के लिए बाध्य किया जायेगा।
दूसरी मुख्य समस्या इस GST से भारत देश की संप्रभुता को चूना लगाना है। क्योंकि यह GST बिल यदि केवल भारत मे ही केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों मे एक समान कर प्रणाली करने हेतु लगाया गया होता तो सरकार का यह कदम स्वागत योग्य माना जा सकता था।
मगर इस GST बिल द्वारा न केवल भारत के विभिन्न राज्यो की आर्थिक आजादी छीनी गयी है बल्कि भारत की कर प्रणाली को विश्व के लगभग 110 देशो के समान कर दिया गया है। EY Global (WTO) की रपट का अध्ययन करने से भारतवासियों के खिलाफ किये गए इस सडयंत्र को आसानी से समझा जा सकता है।
जो यह स्वतः शाबित करता है क़ि यह GST भारत के व्यापारियो को सुविधा प्रदान करने के लिये नही बल्कि इस GST द्वारा विदेशों के तमाम धन्नासेठों की multinational कंपनियों को tax सहूलियतें उपलब्ध कराई गयी है।
चूंकि कोई भी विदेशी कंपनी यदि भारत मे व्यापार करे और profit अपने देश ले जाये। इसमे किसी भी प्रकार का उस देशवासियो को फायदा नही होता है।
make in india के बाद भी युवाओ की बेरोजगारी इसीलिए बढ़ी है।
इन विदेशी multinational कंपनियों को केवल आम आदमी रूपी सस्ते मजदूर उपलब्ध करा कर मजदूरो का शोषण और कराने का प्रावधान इस GST बिल द्वारा पहले ही कर दिया गया है। अभी हाल ही मे जोगीभोगी सरकार द्वारा company dispute act and payment of bonus act सहित सैकड़ो कानूनों मे बदलाव इसी सडयंत्र का हिस्सा रहा है। जिनका निर्माण डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने श्रम मंत्री रहते हुए गरीब देशवासियो के हित मे किया था।
यदि आप केवल अम्बेडकर चालीसा बांचने मे ही लगे रहे और डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा उपलब्ध कराये गए सभी कानून ही तोड़मरोड़ या खत्म कर दिए गये। तो आपके अम्बेडकर भजन गाने से कोई फायदा होगा ऐसा मैं नही मानता।
अभी एक जो सबसे मजेदार बात इस GST विरोध प्रदर्शनों से निकल कर सामने आ रही है वह है। *आम जनता मे यह संदेश का जाना क़ि यह GST देश हित मे है और व्यापारी केवल टेक्स चोरी और मुनाफाखोरी के चलते GST का विरोध कर रहे हैं।* जिसमे कुछ सच्चाइ हो सकती है मगर असली मामला है। बढ़े हुए tax लबादे का आम आदमी अर्थात आप और हमारी जेब पर डाका पड़ना। इस GST द्वारा luxury कारे सस्ती बताई जा रही है जबकि medium segment की कारो पर tax और बढ़ा दिया गया है। पहली बात तो यह क़ि भारत मे कितने बहुजन हर छः महीनो मे कार बदलते हैं जिससे बहुजनो को इसका विशाल फायदा माना जा सके। जाहिर है क़ि संख्या नगण्य है। *ऐसे मे ये luxury कारे सस्ती किन धन्नासेठों के लिये की जा रही हैं?*
आम आदमी तो बाइक मे पेट्रोल भराने को भी दस बार सोचता है। ऐसे मे इस GST से भारत मे उद्योगों के विकास पर भी लगाम लगनी तय है।
टाटा समूह द्वारा इसका प्रखर बिरोध एक उदाहरण है।
आम गरीब से गरीब महिला बालिका भी अपने चेहरे की लीपापोती पर प्रति माह लगभग पांच सौ रुपये का खर्च् करती ही होगी। जिससे संबंधित वस्तुओ पर अभी तक लगभग 10 से 15% tax का भुगतान माताओ बहनो को करना पड़ता था। मगर गोदी भोगी सरकार ने अब इसे विलासतापुर्ण आवश्यकता मानते हुए टैक्स की दर सीधे 28% पर कर दी है। जाहिर है क़ि अब इन महिलाओ का खर्च लगभग डेढ़ गुना बढ जायेगा।
और तो और अभी तक मासिक चक्र अवस्था मे प्रयोग होने वाले sanitary pad को भी गोदी भोगी सरकार ने विलासता पुर्ण आवश्यकता मानते हुए tax की सीमा 28% लाद दी है।
जिससे न केवल स्वस्थ मातृत्व ही खतरे मे पड़ा है बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान को भी करारा झटका लगा है। क्योंकि बिना शारीरिक स्वच्छता के बाहरी स्वच्छता आडम्बर के अलावा कुछ नही है।
*गोदी भोगी सरकार ने whisper, stayfree आदि के sanitary pads की कीमतों को बढ़ा कर यह संदेश भी दिया है क़ि आपके पीरियड काल मे sanitary pad की जरूरत नही बल्कि पुराने कपड़े, रुई /लत्ते इत्यादि ही उचित हैं?*
इस सबके बावजूद भी यदि यह लड़ाई केवल व्यापारी लड़ें तो इससे बढ़ी विडम्बना नही हो सकती। जबकि GST ने महिलाओ की अस्मिता को करारा धक्का दिया है।
multinational कम्पनियो को भारत लूट की खुली छूट द्वारा युवाओ के रोजी रोटी तो छिनी ही है। साथ ही उचित रोजगार के अभाव मे शादी विवाह को भी गोदी जी ने संभावित युवाओ के अच्छे दिनों मे पलिता लगाया है।
किसान की उपज का समर्थन मूल्य यदि बढ़ी हुई G & S Tax दरो के अनुरूप पुनर्निर्धारित नही किया गया तो आने वाले समय मे खेती किसानी छोडने व फांसी लगाने वाले अन्नदाताओं की संख्या मे भारी इजाफा देखने को मिलेगा।
आत्म हत्या करने को विवस होंगी वो किसान पुत्रियां जिनकी धनाभाव मे शादियां टूटेंगी।
मजदूर हितो की बली तो पहले ही गोदी सरकार तमाम मजदूर कानूनों मे संशोधन करके दे चुकी है।
इतना सब कुछ भारत देशवासियो के खिलाफ गोदी भोगी सरकार द्वारा देशवासियों का सत्यानाश करने के बाद भी यदि इस GST का विरोध केवल व्यापारी करे और आम भारतवासी नर नारी चुप चाप तमाशा देंखे, मेरी समझ से परे है।
मेरी समझ से यह भी परे है क़ि क्या ऐसे इन्शानो को इन्शान कहा जा सकता है जो अपने ही हाथो अपनी वाट लगाने हेतु देशद्रोहियो को सत्ता शौंप दे रहे हैं।
इसलिए इस लड़ाई को देशवासियो की लड़ाई बनाये बिना किसी भी प्रकार का सफल प्रतिरोध करना संभव नही है।
अल्ला जाने क्या होगा आगे.......
भवतु सब्ब मंगलं
बंदे मातरम्🇮🇳
स्वामी डॉ बोधी आनंद
नमो भारत जय भूमि
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