*थिंक टैंक का बहुजनो मे पूर्ण अभाव- सभी समस्याओ की मूल बजह*
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कोई आपको तब तक गुलाम नहीं बना सकता जब तक आपकी उस गुलामी मे सहमति न हो। इस सहमति कब कैसे कथित गुलाम तबके ने अपने शोषकों को दे दी कब किस प्रकार नही दी इसका अज्ञान ही आपकी मूल सहमति है।
जब तक इसे ठीक नही करोगे तब आप केवल प्रतिक्रिया ही कर सकते हो क्रिया नहीं।
यही बजह रही है क़ि लगातार भारत मे अम्बेडकरवाद का प्रचार प्रस्थापना होने के बावजूद ब्राम्हणवाद शिकंजा मजबूत हुआ है।
जिससे सिद्ध होता है क़ि हमारी विचारधारा मे कहीं न कही कोई बढ़ी चूक है। जिसके कारण ही हमारे द्वारा लगातार अम्बेडकरवाद की प्रस्थापना का काम करने के बावजूद पूरे देश के लोकतंत्र से बहुजन समाज के लोग बाहर खदेड़े जा चुके हैं।
इसको समझो मान्यवर🇮🇳
आज पूरे विश्व सहित हम सबको कोई भगवान नहीं बल्कि इन्शान ही जैसा चाहते हैं वैसा नचा रहे हैं।
इस तरह विश्व के सभी लोगों को अपनी उंगली से इशारे पर नचाने वाले लोगों को थिंक टैंक कहा जाता है। जो क़ि रुचि अभिरुचि के हिसाब से अलग अलग विषय के महाज्ञानी होते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न देशो मे निम्नवत थिंक टैंक गधे रूपी बहुसंख्य इन्शानो की जमात को हांकने का काम करते हैं।
अमेरिका=1835
कनाडा=99
मेक्सिको=61
ब्राजील=89
बोलीविया=59
अर्जेंटीना=138
ब्रिटेन=288
जर्मनी=195
फ्रांस=180
इजराइल=59
ईरान=58
कीन्या=53
साउथ अफ्रीका=86
रूस=122
भारत=280
चीन=435
जापान=108
ऑस्ट्रेलिया=63
ये वो लोग हैं जो पूरी पृथ्वी को अपनी इसारे पर नचा रहे हैं।
हम देखते हैं क़ि जिस देश मे जितने ज्यादा थिंक टैंक हैं वह देश उतना ही विकसित है या उसके थिंक टैंक उतने ही अपने या दूसरे देश के लोगों को गुलाम बनाये हुए हैं या बनाने की फिराक मे लगे हैं।
मुस्लिम जगत मे ईरान को छोड़कर किसी भी देश मे कोई थिंक टैंक नहीं है। इसी बजह से पूरी दुनिया के मुसलमानों को आतंकवादी बताया या बनाया जा रहा है। लेकिन ईरान अकेला आँख मिला कर बात कर रहा है दुश्मनो के।
जहां तक बात भारत की है तो भारत मे 280 थिंक टैंक काम कर रहे हैं।
अब सवाल ये है क़ि
*1~इन 280 थिंक टैंक मे से कितने थिंक टैंक डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर का रट्टा लगाये घूम रहे अछूतों के हैं?*
*2~इस 280 मे से कितने थिंक टैंक पिछड़ों के हैं?*
*3~इस 280 मे से कितने थिंक टैंक आदिवासियों के हैं?*
*4~इन 280 थिंक टैंक मे से कितने थिंक टैंक मुसलमानो के हैं?*
*5~इनमे से कितने थिंक टैंक बौद्धो के हैं?*
*6~इसमे से कितने थिंक टैंक सिक्खों/ ईसाइयो या जैनियों के हैं?*
बल्कि *मेरा मानना है क़ि ज्यादातर बहुजनों को तो यह पता ही नहीं होगा क़ि थिंक टैंक आखिर बला क्या है?*
ये क्या काम करती है?
यह कोई तोप चलाने वाला टैंक होता है या पेट्रोल डीजल भरने वाला टैंक?
यह कोई व्यक्ति विशेष होता है या संगठन विशेष?
*जिन जिन समाजों के पास कोई थिंक टैंक नहीं है वो वो समाज आज गुलामी मे जीने को अभिशप्त हैं।* फिर चाहे वो अछूत हो, पिछड़े हो, आदिवासी हो, मुस्लिम हो या कोई और....
ऐसा पहले भी होता रहा है और आगे भी होता रहेगा। तब तक जब तक ये थिंक टैंक विहीन समूह इस कमी को महशूस कर जरूरी सुधार नहीं कर लेते।
*तब तक जब तक ये गुलाम तबके अक्ल को भैंस से बड़ा नहीं स्वीकार कर लेते।*
*तब तक जब तक बुद्धिवानों की कद्र नहीं सीख जाते।*
इसलिए आज समय पुरानी घिसी पिटी विचारधारा पर केवल चलने का नही है बल्कि उस विचारधारा के पुनर्मूल्यांकन का भी है। जिसके अभाव मे आप प्रतिक्रिया या कुंठा द्वारा अपनी बारी का इन्तेजार ही कर सकते है क्रिया रूपी मुक्ति सांग्रम नही चला सकते।।💐💐💐💐💐🏵
भगवान बुद्ध की बोधी आपको प्राप्त हो।
आपका मंगल हो।🌷
भवतु सब्ब मंगलं
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भूमि नमो भारत🇮🇳
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