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Showing posts from August, 2016

मान्यवर दाना मांझी द्वारा अपनी प्रियसी की लाश को कंधे पर रख कर ढोना प्रगाढ़ प्रेम की पराकास्ठा नही है- एक दृष्टीकोण।

मान्यवर दाना मांझी द्वारा अपनी प्रियसी की लाश को कंधे पर रख कर ढोना प्रगाढ़ प्रेम की पराकास्ठा नही है- एक दृष्टीकोण। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 वो कितनी खुशनशीब पत्नी है जो मरने के बाद भी अपने पति के कंधे पर सर रखकर सो रही है। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷  किराये के टट्टू या टोला मुहल्ला के लोगों का तो कोई एहसान ही नही लिया मान्यवर मांझी साहेब ने। न ही ~राम नाम सत्य है~ कहने का नम्बर आया। जब अकेले ही कंधा दिया तो दिन तेरवीं नाखून बाल मुंडवाने का भी नम्बर नही आएगा। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 तथागत बुध्द कहते है, क़ि अपना दीपक स्वयं बनो। इन मांझी साहेब को कोटि कोटि नमन 👊👊 जो अनजाने मे ही तथागत के अनुयायी हो गए। लोग कहते हैं क़ि जोड़ियां तो सात जन्म के लिए बनती हैं। मांझी साहेब ने कम से कम एक जन्म तो बखूबी व पूरी निष्ठा से पत्नी के साथ निभाया। वरना लम्पट तो कहते हैं क़ि शादी के कुछ साल तक पत्नी - चंद्रमुखी फिर कुछ साल सूरजमुखी और बचे हुए साल ज्वालामुखी रूप धारण कर लेतीं हैं। इस हालात को देख कर ही सायद कबीर साहेब कहते हैं क़ि सती विचारी सत किया, काँटों सेज विछाए। ले सूती  पिया आपना च...

क्या महिलाओ व शुद्र अछूत पिछड़ों का मंदिर, मस्जिद या दरगाह मे प्रवेश होना चाहिए- एक दृष्टिकोण??????

क्या महिलाओ व शुद्र अछूत पिछड़ों का मंदिर, मस्जिद या दरगाह मे प्रवेश होना चाहिए- एक दृष्टिकोण?????? 🇮🇳🇮🇳9*4*5💐💐💐💐💐 अक्सर ये देखा गया है क़ि विभिन्न धर्मो के लोग अपने अपने धर्म स्थलों  मे रोज जाना चाहते है। जबकि यह बात दुनिया को पता है क़ि किसी भी धर्म स्थल मे भगवान ईश्वर अल्लाह आदि का निवास नहीं है। फिर भी उसमे प्रवेश पर रोक व घुसने की जद्दोजहद क्यों? क्या कबीर साहेब ने इसीलिए कहा था क़ि न मैं मन्दिर, न मैं मस्जिद, न काबे कैलास मे। खोजी होय तो तुरत ही मिलये पल भर की तलास मे।। यदि समानता की दृष्टि से देखा जाये तो धर्म स्थल प्रवेश की मांग कुछ हद तक जायज प्रतीत होती है। लेकिन जब यह बात पता है क़ि ईश्वर भगवान मौला का निवास कथित इन्शान निर्मित धर्म स्थल नहीं है फिर भी उसके लिए संघर्ष समझ से परे है। अक्सर लोग धर्म स्थल जाते ही क्यों है??????  इस संदर्भ मे देखा गया है क़ि धर्म स्थल जाने वाले लोग दो श्रेणी के होते हैं- एक वो जो पूजा के नाम पर झूठी उम्मीद या कथित भगवान की चमचागीरी के लिए जाते हैं। दूसरे वो जो नयनसुख व छेड़खानी के लिए जाते हैं। कभी कहा जाता था क़ि मैं तुम...

क्या अछूत पिछड़े राष्ट्रवादी न होकर राष्ट्रद्रोही है-एक विश्लेषण

क्या अछूत पिछड़े राष्ट्रवादी न होकर राष्ट्रद्रोही है-एक विश्लेषण 🇮🇳🇮🇳9*4*5🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 ये काफी हद तक सच है क़ि राष्ट्रीय संकल्पना को दलित पिछड़े हमेशा आरक्षण के नाम से मिटाते ही रहे हैं। इसी लिये संघी अछूत पिछडो को देशद्रोही कहते रहे हैं। यदि नही सुधरे तो आगे भी देशद्रोह मे ही जान भी गवाएगें। इस राष्ट्रीय सोच के अभाव को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने 2 जनवरी 1945 को कोलकाता विश्वविद्यालय छात्र संघ सम्बोधन मे रेखांकित किया था। डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अपनी राइटिंग एंड स्पीचेज 17(3) के पेज 343 पर कहते हैं क़ि "there had not yet been an all india consciousness among them (sc st and obc). They had beem uptil now living a provincial life." अर्थात अछूत पिछड़ों मे अखिल भारतीय चेतना का अभाव है ये अभी तक प्रांतीय जिंदगी के साथ ही रहते रहे हैं। जिस कमजोरी को हमारे प्यारे डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर 1945 मे रेखांकित किये था। उसे 71 साल बाद यानी 2016 तक भी ठीक नही किया गया है। 😡क्या होगा इन अछूत पिछड़ों का? मूलनिवासी बहुजनो को देशद्रोही बनाने मे सबसे ज्यादा दोषी आरक्षण के नाम पर राजनीति कर...

GST बिल व भारत की संप्रभुता

क्या फेंकू पप्पू सरकारों द्वारा goods and services bill 2016 संसद से पास कराना देश की संप्रभुता को अंग्रेजो के हाथों गिरवीं रखना नही है??? 🇮🇳🇮🇳9*4*5🎯🎯🎯🎯🎯 साथियो अभी हाल ही मे संघी सरकार द्वारा राज्य सभा मे पास कराये गए "वस्तु एवम् सेवा कर" (GST) अधिनियम को पास कराया है। जिसको कांग्रेस के एड़ी चोटी का जोर एक कर देने के बाद भी पास करने की तत्परता दिखाई थी। क्या आज उसी बिल को संघी सरकार द्वारा संसद से पास कराना EY global tax london England के इशारे पर नही किया  गया है? एक worldwide VAT GST and Sales Tax Guide 2014 रिपोर्ट के अनुसार  पेज 347 कहता है क़ि यह GST dual होगा जिसमे राज्य अपना state GST टेक्स व केंद्र सरकार central Goods and Services TAX लगाएगी। जबकि भारतीय मीडिया इसे केवल केंद्रीय टेक्स बता कर देशवासियो को बरगला रहा है। एक बात और कही जा रही क़ि इस GST मे माध्यम से कुल tax सीमा 15% से अधिक नही होगी जिससे महगाई नही बढ़ेगी। जबकि उक्त guide book इसके उलट ही कहानी बयान कर रही है। इसमे ऐसी कोई सीमा नही निर्धारित की गई है। जब उक्त डोक्युमेंट state GST and central GST ...

यशकायी रोहित वेमुला की माँ का राजनीति मे पदार्पण होना चाहिए या नही?

साथियो आपने यशकायी रोहित वेमुला की माँ को किसी राजनीतिक पार्टी मे शामिल होने या न होने के विषय पर अपने अपने बहुत अच्छे विचार रखे, उन्हें जानकर अच्छा लगा।🌷💐🇮🇳🙏🙏🙏 जहां तक मेरे अपने विचार का सवाल है तो मैं ये कहना चाहता हूँ क़ि यशकायी रोहित की माँ को जो भी पार्टी सम्मलित करेगी उसकी समाज मे खासकर बहुजन समाज मे पकड़ बढ़ेगी। क्योंकि यशकायी रोहित की हत्या व अत्याचार का बदला पूरा देश लेना चाहता है। जिसको आर्थिक व सामाजिक सम्पन्नता हाशिल करके ज्यादा अच्छी तरह से प्राप्त किया जा सकता है। रही बात राजनीति व शिद्धांतों की तो मैं कहना चाहता हूँ क़ि राजनीति कोई छुआछूत की बीमारी नही बल्कि राजा बनने की नीति ही राजनीति कहलाती है। अभी तो हमारे लोगों मे राजनीति को गंदा प्रचारित किया गया है वह जानबूझ कर किया गया है ताकि यह समाज राजकाजी व्यवस्था से दूर रह कर केवल विरोध प्रदर्शन कर मांगने वाला ही बना रहे, न्याय देने वाला दाता न बने। अब यशकायी रोहित की माँ की उम्र व आर्थिक स्थिति देख कर यही लगता है क़ि मागनेवाले से दाता बनें। रही बात शिद्धांत की तो यह सच है क़ि राजनीति मे पैंतरेबाजी के तौर पर शिद्धांतो ...

रक्षा बंधन: उम्मीद मुक्ति व मोक्ष की लेकिन नाटक बंधन का।

उम्मीद मुक्ति व मोक्ष की लेकिन नाटक बंधन का। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷💐🌷 आज कल भारत मे ब्राह्मण धर्मी महिलाये बच्चियां अपने पुरुष रिश्तेदारों से अपनी सुरक्षा की गारंटी मांगने निकल पड़ी हैं। जहां देखो वही रक्षाबंधन। बाजार पते पड़े है। स्कूलो मे भी संघी संस्कारशाला चालू है।  रक्षा की भीख मांगने वाली ब्राह्मण धर्मी स्त्रियों को नही पता क़ि सुरक्षा की भीख वही मांगता है जो कमजोर होता और जो कमजोर हो उसे कमजोरी की बजहों का निराकरण करने की जरूरत है न क़ि किसी भाई बाप आदि से अपनी सुरक्षा का आश्वाशन लेने का नाटक करने की। क्या कोई भाई बाप बिना रक्षाबंधन मनाये अपनी बहन बेटी का बलात्कार करवाएगा??? स्वाभाविक है नही। फिर ये कैसा गुड़िया गुड्डा का खेल चल रहा है। दोषी कौन है वो जो स्वयं की कमजोरी को महशुस करते हुए असुरक्षा की बजह से सुरक्षा की भीख मांग रहे है वो या वो जो ये सब लोगों मे फैलाकर दूर से गिद्ध दृस्टि लगाये बैठे हैं? इस सब की बजह को देखते हुए समझना जरूरी हो जाता है क़ि क्या तार्किकता मनुष्य का स्वाभाविक गुण है या आस्था विश्वास व सरेंडर करना??? जय जयय भीम मूलनिवासी

राजीव दीक्षित का transfer of power agreement निम्न लेख व वीडियो झूठ है

साथियो राजीव दीक्षित का transfer of power agreement निम्न लेख व वीडियो झूठ है क्योंकि कैबिनेट मिशन के तहत माउंटबेटन चाहते तो थे क़ि भारत व ब्रिटेन के बीच ट्रांसफर ऑफ पॉवर एग्रीमेंट हो जाये लेकिन जिन्ना द्वारा अलग पाकिस्तान की मांग के कारण इस सत्ता हस्तांतरण संधि को कूड़ेदान मे फेंकना पड़ा था। दूसरी बात ये है क़ि यदि यह transfer of power दस्तावेज declassify नही किया गया है वही राजीव दीक्षित का कहना है क़ि शुरुआत मे इस संधि के अनुसार  50 साल तक गोपनीयता की कशम खाई थी नेहरू सरकार द्वारा जिसे 1997 मे 20 साल और बढ़ा दिए गए। तब सवाल उठता है क़ि फिर इस लेख के लेखक को ये सब top secret दस्तावेजो की जानकारी मिली कहाँ से? दीक्षित कहते है क़ि यह दस्तावेज ब्रिटिश अर्काइव मे रक्षा है। जिसका मतलब यह हुआ क़ि जरूरी नहीं है क़ि उक्त पुस्तकालय मे रखे सब दस्तावेज विधिमान्य भी हो। लेखक को मनुस्मृति की जगह IPC, Cr PC आदि से चिड मालूम होती है क्योंकि इन्ही IPC व Cr PC आदि अधिनियमो से ब्राह्मणवाद का वर्चस्व खत्म हुआ था, जो क़ि बहुजन हिताय था। इसके लेखक को चिड है इस बात से क़ि अंग्रेजो ने शांतिपूर्ण ठंग से सत्ता ...

विश्व शिरोमणि बहुजन समाज के संत कबीर साहेब के अनुसार "समाधी" क्या है, का बहुत ही मार्मिक वर्णन।

विश्व शिरोमणि बहुजन समाज के संत कबीर साहेब के अनुसार "समाधी" क्या है, का बहुत ही मार्मिक वर्णन। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 वो कहते हैं क़ि 1~संतो सहज समाधी भली। साधु से मिलन भयो जा दिन ते, सूरत न अंत चली।। 2~आँख न मुँदू, कान न रूंधू काया कष्ट न धारूँ। खुले नैन से हँस हँस देखूँ, सुंदर रूप निहारूँ।। 3~कहूँ सो नाम, सुनूँ सो सुमिरन, जो कुछ करूँ सो पूजा। गिरह उधान एक सम देखूँ भाव मिटाऊँ दूजा।। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 4~जहाँ जहाँ जाऊँ सोइ परिकरमा, जो कुछ करूँ सो सेवा। जब सोऊँ तब करूँ दण्डवत, पूजूँ और न देवा।। 5~शब्द निरंतर मनुआ रटा, मलिन वचन का त्यागी। उठत बैठत कबहुँ न बिसरे, ऐसी तारी लागी। 6~कहें कबीर यह उनमनि रहनी, सो परगट कर गाई। सुख दुख के परे, इक परम सुख, तेहि मे रहा समाई।। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳 ऐसी है हमारे संतो की समाधी। साहेब बंदगी जय मूलनिवासी

क्या बहुजन समाज के ज्यादातर लोग संत कबीर साहेब की "समाधी" मे लीन हैं-एक विश्लेषण

क्या बहुजन समाज के ज्यादातर लोग संत कबीर साहेब की "समाधी" मे लीन हैं-एक विश्लेषण 🇮🇳🇮🇳9*4*5✍✍✍✍✍ विश्व शिरोमणि संत कबीर साहेब जी कहते हैं क़ि~ 👇~संतो सहज समाधी भली। साधु से मिलन भयो, जा दिन ते सूरत न अंत चली।। 👇~आँख न मुँदू, कान न रूंधू काया कष्ट न धारूँ। खुले नैन से हँस हँस देखूँ, सुंदर रूप निहारूँ।। 👇~कहूँ सो नाम, सुनूँ सो सुमिरन, जो कुछ करूँ सो पूजा। गिरह उधान एक सम देखूँ भाव मिटाऊँ दूजा।। 👇~जहाँ जहाँ जाऊँ सोइ परिकरमा, जो कुछ करूँ सो सेवा। जब सोऊँ तब करूँ दण्डवत, पूजूँ और न देवा।। 👇~शब्द निरंतर मनुआ रटा, मलिन वचन का त्यागी। उठत बैठत कबहुँ न बिसरे, ऐसी तारी लागी। 👇~कहें कबीर यह उनमनि रहनी, सो परगट कर गाई। सुख दुख के इक परे, परम सुख, तेहि मे रहा समाई।। ऐसी है हमारे संतो की समाधी। जो भी करते हैं जो भी कहते हैं जो भी सुनते हैं जो भी सोचते हैं जो भी बोलते हैं सब कार्यो मे इतना लीन हो जाते क़ि स्वयं समाधी लग जाती। कुछ अलग से करने की जरूरत ही नही रहती। अक्सर ब्राह्मण सवर्ण पाखंडी लोग मरने के बाद या जिंदा ही जमीन मे अस्थाई या स्थायी रूप से दफन हो जाने क...

क्या घर परिवार के लोगों का भोजन बनाना व उनको तगड़ा तंदुरस्त रखना नींच काम है?

क्या घर परिवार के लोगों का  भोजन बनाना व उनको तगड़ा तंदुरस्त रखना नींच काम है? यदि ऐसा है तो यह संघी भागवत भी खाना तो खाता ही होगा, ऐसे मे क्यों न इसको खाना खिलाने वाली महिला जहर खिला देती। ताकि आगे भी इस प्रकार की नींच बात न कर सके। ऐसी महिलाये जो आत्मनिर्भर है व घर से बाहर काम करती है, उनको ये जरूर समझ लेना  चाहिए क़ि यह  भागवत, तुलसीदास दुबे (रामचरित मांनस) का वंशज है, जो क़ि नारी के पेट से जन्म  भी लेता है फिर उसी को नरक का द्वार  भी बोलता लिखता है। ऐसे मे कामकाजी महिलाओ को समझ लेना चाहिए क़ि  भारत का  हिन्दुस्तान बनने पर उनका क्या हाल होगा, महिलाये आत्म निर्भर होंगी या चरण पखारेगें ? बोलो राधे राधे http://jhansitimes.com/rss-chief-should-spoke-hearth-and-four-women-who-do-not-let-divorce.html

भारत की संघी कांग्रेसी सरकार देश मे खेलकूद विकास हेतु प्रति व्यक्ति प्रति दिन कितनी रकम खर्च करती है????

भारत की संघी कांग्रेसी सरकार देश मे खेलकूद विकास हेतु प्रति व्यक्ति प्रति दिन कितनी रकम खर्च करती है???? 🇮🇳🇮🇳9*4*5💣💣💣💣💣 एक 2016 मे गठित संसदीय कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, आप जान कर हैरान हो जाओगे क़ि भारत की जुमलेबाज केंद्र सरकार मात्र 3 पैसे प्रति दिन प्रति व्यक्ति  का खर्चा देश मे खेलकूद के विकास मे करती हैं। जब क़ि आम गरीब से गरीब भारतीय तीन रुपये का एक पान मशाला खाकर थूक देता है। मजदूर किसान पांच रुपये की खैनी चंद घंटे मे थूक देता है। सिगरेट पीने वाले लोग 7 से 15 रुपये तक की सिगरेट धुंवे मे उढ़ा देते है। ये देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाक कटाने के दोषी कौन है? क्या वो लोग दोषी हैं, जिन्हे पीने का शौख नही                या वो लोग जो पीते है गम भुलाने को? आखिर देशद्रोहियो को चुनकर पहुंचाता कौन है? लोग नाली मे तो तभी लोटते हैं जब समाधीस्ट हो जाते हैं। भौतिक शरीर से बुद्धि का नियंत्रण खत्म होना ही समाधी है। इनकी समाधी तोड़ी जाये या और गहरी लगा दी जाये? मनुवादी देश द्रोही हाय हाय.. ....

राम मैं पूजा काह चढ़ाऊँ

पूजा पाठ अर्चना बंदना "मन वचन व कर्म" से स्वयं के शरीर को किसी और के हवाले करने के सिवाय कुछ नही हैं। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 क्या इसी लिए संतगुरु रविदास जी महाराज कहते हैं क़ि👇 राम मे पूजा काह चढ़ाऊँ, फल और फूल अनूप न पाऊँ। थनहुं दूध जो बछड़ो जुठारो, पहुंप भंवर जल मीन बिगारो।। मलियागिर बेधिओ भुजंगा, विष अमृत बशै एक संगा।। मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेहूँ सहज स्वरूप।। पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी, कह रविदास कौन गत मेरी।। 🇮🇳🇮🇳9*4*5✍✍✍✍✍ अर्थात वो कहते हैं क़ि हे राम मैं पूजा मे क्या चढ़ाऊँ? फल व फूल कोई अनूठा नही है सब के सब कीडो द्वारा परागण व निषेचन की प्रक्रिया द्वारान जूठे कर दिए जाते हैं। दूध निकालने से पहले बछड़ा जूठा कर देता है। गंगा जल मे मछलियाँ हगमूत कर गंदा कर देतीं हैं। इसलिए वह भी चढ़ाने लाइक नही है। चन्दन मे काले काले साँप लपते रहते हैं जिससे वह भी विषैला हो जाता है। इसीलिए हमारे लिए "मन" ही पूजा और "मन" ही धूपबत्ती है जिसको मैं सहज स्वरूप मे सेहता हूँ। पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी (राम की) कह रविदास कौन गत मोरी। अर्थात मैं तेरी पूजा ...

हिन्दुस्तान ने रियो ओलंपिक 2016 मे केवल दो मेडल जीते हैं~आइये जनते हैं क़ि कश्मीरी ब्राह्मण जस्टिस काटजू कैसे इस पर पर्दा डालने की भौंडी सी कोशिस कर रहे हैं।

हिन्दुस्तान ने रियो ओलंपिक 2016 मे केवल दो मेडल जीते हैं~आइये जनते हैं क़ि कश्मीरी ब्राह्मण जस्टिस काटजू कैसे इस पर पर्दा डालने की भौंडी सी कोशिस कर रहे हैं। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷💐 128 (UN 2015) करोड़ की आबादी वाले देश मे सिर्फ दो मैडल का ला पाना, वह भी सिल्वर व कांशा, क्या यह कथित मेरिटधारी सवर्णों की पोल खोलने व देशद्रोही शाबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है?  हालांकि इस एक दूसरा सवर्ण नेहरू खानदानी मार्कंडेय काटजू इसकी असली बजहों पर पर्दा डालते हुए कुछ यूँ बयाँ कर रहे है अपनी देशद्रोहिता को।🤔🤔 मार्कंडेय काटजू कहते हैं~ पहला तर्क~आधुनिक खेल बहुत महगें है इसलिए चूंकि प्रत्येक हिन्दुस्तानी द्वारा इतने खर्चे को वहन करना संभव नहीं है। दूसरा तर्क~ काटजू महोदय आगे कहते हैं क़ि भारतीय लोगों मे जीवन पर्यन्त कैरियर खेलों मे नही है इसीलिए युवाओं मे खेल कूद के प्रति रुझान नही है। *******†******************** ऐसे मे सवाल ये उठता है क़ि क्या बाकइ मे उक्त ही बजह है 65 करोड़ आबादी पर एक मेडल ला पाने के पीछे। क्या लोग खेलो मे अपना कैरियर नही बनाना चाहते? यदि नही बनाना चाहते तो खिलाड़ियों क...