मान्यवर दाना मांझी द्वारा अपनी प्रियसी की लाश को कंधे पर रख कर ढोना प्रगाढ़ प्रेम की पराकास्ठा नही है- एक दृष्टीकोण।
मान्यवर दाना मांझी द्वारा अपनी प्रियसी की लाश को कंधे पर रख कर ढोना प्रगाढ़ प्रेम की पराकास्ठा नही है- एक दृष्टीकोण। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 वो कितनी खुशनशीब पत्नी है जो मरने के बाद भी अपने पति के कंधे पर सर रखकर सो रही है। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 किराये के टट्टू या टोला मुहल्ला के लोगों का तो कोई एहसान ही नही लिया मान्यवर मांझी साहेब ने। न ही ~राम नाम सत्य है~ कहने का नम्बर आया। जब अकेले ही कंधा दिया तो दिन तेरवीं नाखून बाल मुंडवाने का भी नम्बर नही आएगा। 🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷 तथागत बुध्द कहते है, क़ि अपना दीपक स्वयं बनो। इन मांझी साहेब को कोटि कोटि नमन 👊👊 जो अनजाने मे ही तथागत के अनुयायी हो गए। लोग कहते हैं क़ि जोड़ियां तो सात जन्म के लिए बनती हैं। मांझी साहेब ने कम से कम एक जन्म तो बखूबी व पूरी निष्ठा से पत्नी के साथ निभाया। वरना लम्पट तो कहते हैं क़ि शादी के कुछ साल तक पत्नी - चंद्रमुखी फिर कुछ साल सूरजमुखी और बचे हुए साल ज्वालामुखी रूप धारण कर लेतीं हैं। इस हालात को देख कर ही सायद कबीर साहेब कहते हैं क़ि सती विचारी सत किया, काँटों सेज विछाए। ले सूती पिया आपना च...