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Showing posts from 2018

अम्बेडकर वाद का नाश आपकी खुली आंखों की "बेहोशी" के कारण बहुत आसान

अम्बेडकर वाद का नाश आपकी खुली आंखों की "बेहोशी" के कारण बहुत आसान। जिस पैटर्न पर देशद्रोही काम कर रही हैं उसको देखते हुए,  एक दिन अम्बेडकरवादी स्वयं ही संविधान फूंक देंगे। न मानो तो देख लेना। संविधान का इम्पलीमेंटेशन ऐसा कर दिया जाएगा कि आप की अम्बेडकर भक्ति स्वतः ही आपको देशद्रोही भी बनाएगी और जेल भी करायेगी। यही अवस्था अम्बेडकर वाद व संविधान के नाश का कारण बनेगी।।।।। ऐसा होते ही चौराहों पार्को आदि से डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की मूर्तियां हटेगी। इस अवस्था को देखते हुए लोगों के घरों और अल्मारियों से भी फुले शाहू अम्बेडकर आदि की तस्वीरें व मूर्तियां गटर का रास्ता नापेगी। न मानो तो देख लेना...... आप केवल अपनी आंख काम आदि यूँ ही "खोले" रहो.... इसका एक मात्र उपाय "awakening' है। मगर कैसे.....? जय भारत भूमि🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर💐 https://amzn.to/4fHIsTl=occulteducati-20 

राष्ट्रीय शोक भी बना जातिआधारित दलगत राजनीति का शिकार।

*राष्ट्रीय शोक भी बना जातिआधारित दलगत राजनीति का शिकार।* वेतन आयोग द्वारा सन 1997 में एक सिफारिश की गई थी कि देश का कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री आदि महानुभाव की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय अवकाश तभी घोषित किया जाएगा जब वह व्यक्ति वर्तमान में भी कार्यरत हो। इसी आदेश की छत्रछाया में पूर्व राष्ट्रपति श्रद्धेय के आर नारायनन जी, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह जी, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, जीएमसी बालयोगी, राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव आदि की मृत्यु पर देश में कोई भी राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया। जबकि अभी जब पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल अटल बिहारी वाजपेई की मौत हुई तो देश में संघी भाजपाई सरकारों ने 1 दिन का पूर्णकालिक अवकाश घोषित किया गया। साथ ही 7 दिन का राष्ट्रीय शोक भी। यह तर्क कहां तक सही है कि  1997 के आदेश के रहते हुए यदि कोई भाजपाई नेता मरे तो राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए???? जबकि यही सत्ताधारी लोग तमाम महापुरुषों की जयंतियां व मृत्यु दिवस अवकाशों को खारिज कर खानापूर्ति का आदेश भी जारी कर चुके हैं। इसका पहला शिकार डॉक्टर बाबासा...

हमारा संघर्ष समता के लिए है।।।

*हमारा संघर्ष समता के लिए है।।।।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 बहुजन समाज का संघर्ष सवर्णो से प्रत्येक क्षेत्र में "समानता" के लिए बताया जाता है। *यदि यह सही है तो सवर्णो ने संविधान जलाया, तो बहुजनो को भी संविधान जलाना चाहिए। बिना यह कृत्य किये सवर्णो से समानता कैसे की जा सकती है?????* *क्या बहुजनों द्वारा मनुस्मृति जलाने से सवर्णो द्वारा संविधान जलाने के कृत्य से "समता' हो जाएगी?????* क्योंकि 'मनुस्मृति" से देश नही चलता है। देश तो संविधान से चलता है, ऐसे में मनुस्मृति जलाने से कोई समता नही होगी।  तो क्या भगवान बुध्द सवर्णो से समता (equality) की लड़ाई लड़ रहे थे????? *यदि नही तो यह रायता किसने व क्यों फैलाया?????* *यदि सवर्ण देश लूटे, चोरी, छल, कपट, भ्रस्टाचार, बेईमानी, छिनरकम, बलात्कार, अत्याचार आदि करें तो क्या बहुजनों द्वारा बिना इन सब कुकर्मो को किये सवर्णो से 'समता" हाशिल की जा सकती है??????* आखिर भगवान बुध्द की 'समथा" बहुजनों की समता में कैसे बदल गयी????? आखिर क्या था कथित समता का असली तात्पर्य????? आदि जानने ...

स्वतंत्रता दिवस या प्रेरणादिवस- देशवासियों के सरोकार।

*स्वतंत्रता दिवस या प्रेरणादिवस- देशवासियों के सरोकार।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस को "हर्ष व उल्लास' के साथ मनाना न केवल गुलाम मानसिकता की कड़ियों को उद्घृत करता है बल्कि गुलामी में मुक्ति के अहसास के साथ "हर्ष व उल्लास" के कारण गुलामी को चिरस्थाई भी बनाता है। फलस्वरूप देशवासियों में अंग्रेज वर्चस्व की स्वतः स्वीकृति होती जा रही है। इसीलिए देशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि सब बेकार और विदेशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि वस्तुएं बढ़िया जैसी आत्मघाती सोच देशवासियों में निर्मित हो रही है। इसके लिए आत्मसुधार करना होगा। जबकि इस दिवस का आयोजन प्रेरणादिवस के तौर पर करने से पुनः विदेशी गुलामी के आगमन, रंग, रूप, भाषा, वस्तु परस्ती आदि से रोका जा सकता है। इसलिए आपको 71वें प्रेरणादिवस की हार्दिक मंगल कामनाएं।🇮🇳💐 भवतु सब्ब मंगलं☸ जय भारत भूमि🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर💐💐

फूल आहिस्ता फेंको.

*फूल आहिस्ता फेंको.... फूल बडे नाजुक... कमल आसन छोड़ .. वर दे वीणा वादिनी।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 वर्षात की शुरुआत हो चुकी थी। हल्की हल्की बदली आ जा रही थी। इसी सुहावने मौषम में सुबह टहलने वालों का तांता लगा हुआ था। आसमान में सूर्य व बादलो के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा था। जिसमे कभी सूर्य महाराज विजय पा रहे थे तो कभी बादल। इसी दौरान नर्म सुहावनी हवाएं सूरज से बादलों को इस प्रकार हटा रही थी कि जैसे कोई पिया अपनी प्रियतमा का घूंघट उठा रहा हो और शर्मीली दुल्हन अपने प्रियवर का दीदार करके जैसे लजा कर पुनः घूंघट निकाल लेती है। ठीक यही काम नरम सुहावनी हवाएं भी बादलों के साथ कर रहीं थीं। यही आंख मिचौली चल ही रही थी कि तभी एक मंदिर में बज रहे लाउडस्पीकर से एक आवाज आई, जिसे सुनकर कई राह चलती स्त्रियां मन्त्र मुग्ध हुई जा रही थीं। हों भी क्यों न आखिर गीत ही ऐसा भक्तिमय था, कमल आसान छोड़ माता.... वर दे वीणा वादिनी... धीरे धीरे तालियों की ताल भी उक्त भजन से मेल खाने लगी। यह आवोहवा का ही शायद असर था कि उसी रमणीक स्थान पर विचरण कर रहे एक पुरूष ने उक्त भजन सुनकर आपस मे कह ही दिया। अगर कमल आसन छोड़ दे...

ससुर ने किया हलाला

*ससुर ने किया हलाला, तो पति ने किया बलात्कार।* वाह क्या नूराकुश्ती चल रही है यार। अबकी बार हलालाबाजों पर वार।।  मुसलमानों ने अच्छा बना रखा है। जब चाहे तब बाप ही अपने बेटी की बीबी का पति बन जाए औए जब मन भर जाए तो बेटा बजाए। *कायदे में मुस्लिम स्त्रियों की लाज बचाने के लिए हलाला रक्षक दल बनाना चाहिए*। जिसका एक सूत्रीय कार्यक्रम हो कि जो भी मुस्लिम पिता अपने बेटे की बीवी का हलाला करते हुए पकड़ा या सुना जाए उसका लाइसेंस जप्त कर लिया जाए। *आखिर बेटे की बीवी में हिस्साबाँट करना, यह कौन सा हलाला है?????* जब बहुसंख्य देशवासी इस तरह की हरकत को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। इसके बावजूद भी क्या शरीयत के नाम पर मुस्लिम परिवारों में फैली इस अनैतिकता को बर्दाश्त किया जाना चाहिए??? न केवल इतना बल्कि मुस्लिमो में चल रहा शादी संबंध अन्तः प्रजजन का ज्वलंत उदाहरण है जिस कारण मंदबुद्धि हलालाबाज पैदा हो रहे हैं। मुस्लिम परिवारों की स्त्रियों को बचाओ नही तो ये अबोध बच्चियों को हूर समझ कर भोगने से बाज न आएंगे। कॉपी पेस्ट शेयर🇮🇳🇮🇳 http://epaper.amarujala.com/kc/20180807/06.html?forma...

स्वच्छ भारत मिशन "विकास" की मरीचिका का स्मारक।

*स्वच्छ भारत मिशन "विकास" की मरीचिका का स्मारक।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 भाजपाई स्वच्छ भारत मिशन और कांग्रेसी सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान एक ही नाक को पकड़ने के दो पर्यायवाची मात्र हैं। जो सत्तारूढ़ पार्टियां पिछले 71 सालों में देशवासियों को कहां हगना / मूतना चाहिए- कहाँ नही, यह नही सिखा पाई वे आखिर किसका विकास कर रहीं हैं??? ऐसे में जगह बे जगह बनाये गए शौचालय सत्तारूढ़ पार्टियों की असफलता के जीते जागते स्मारक नही तो क्या हैं??? इन स्मारकों को सुरक्षित रखो, विकास गिनाने के काम आएंगे। ये शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास आदि मंत्रालयों की पोल खोलने के काम आएंगे, इनका उपयोग करो। जय भारत भूमि🇮🇳🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर🌷💐

महिला थाना और महिला बैंक की अपार सफलता के बाद बेटी बचाओ का जुमला या हकीकत

*महिला थाना और महिला बैंक की अपार सफलता के बाद बेटी बचाओ का जुमला या हकीकत? 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 जोगी भोगी द्वारा चलाये गए महिला थाना और महिला बैंकों का आज कल क्या हाल है। क्या इन महिला बैंकों औऱ महिला थानों से किसी महिला का कल्याण हुआ???                   या ये महिला थाने और महिला बैंक द्वारा समाज में स्त्री पुरुषों के बीच लिंग भेद की खाई बढ़ी या घटी??? अक्ल के अंधो बेटों की चाहत में बेटी को कोख में ही मार देने वालों, बेटी बचाने से बेटी नही बचेगी। बेटी तो स्त्रीत्व के सम्मान से बचेगी। देश में प्रति हजार पुरूषों पर सबसे कम स्त्रियां किन जातिय समूहों में हैं????? भवतु सब्ब मंगलं☸ जय भारत भूमि🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर💐

गुरुपूर्णिमा धम्मचक्क पवत्तन, अनंत उल्लास चक्र-पाणि हेतु अनित्यबोध धम्मयात्रा असीम सुखों की खान - मर्मस्पर्शी आलोककथा।

*गुरुपूर्णिमा धम्मचक्क पवत्तन, अनंत उल्लास चक्र-पाणि हेतु अनित्यबोध धम्मयात्रा असीम सुखों की खान - मर्मस्पर्शी आलोककथा।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 किसी का भी अन्त कभी नही होता। यह अंत असल मे अनन्त का हिस्सा मात्र है। किसी की समाप्ति हमेशा दूसरे विषय की शुरुआत होती है। मगर तृष्णा युक्त लगाव के कारण हम उस अनंत के हिस्से जिसका सानिध्य हमे प्राप्त हुआ, के बंधक हो जाते हैं। इसीलिए किसी भी कार्य का मनमाफिक अंत हमें सुख देता हैं। स्फूर्ति व उल्लास से भर देता हैं जबकि इसी उल्लास व हर्ष का जब अंत मनमाफिक नही होता है तो हम गहरे शोक में डूब जाते हैं। हमें अक्सर ऐसा लगता है कि अब हम कैसे जियेंगे। किसके सहारे जियेंगे?  किसके लिए जियेंगे?  यही दुख कहलाता है।  इसी को लोग स्पर्श नही करना चाहते। लोग चाहते है हमेशा हर्ष व उल्लासपूर्ण जीवन यात्रा चलती रहे। इसी को हम अक्सर मजा कहते है। इसी में सदा डूबते उतराते रहना हमारा स्वभाव बन गया है ।हम इसी तरह पालना मे पड़े पड़े जीवन चलाना चाहते है।जबकि ऐसा सम्भव नहीं। खासकर भौतिकवादी आवश्यक्ताओं के पूर्ति की जद्दोजहद के कारण तो बिल्कुल ऐसा संभव नहीं है।...

भारत का तीसरा हिस्सा- हकमारी, मुंशीगीरी की इन्तेहाँ।

*भारत का तीसरा हिस्सा- हकमारी, मुंशीगीरी की इन्तेहाँ।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 Freedom at midnight के लेखक डोमिनिक लैपिरे और लैरी कोलिन्स लिखते है कि भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन जब भारत आये तब उन्होंने ब्रिटिश राजघराने से लिखित में वादा कराया था कि हम भारत मे जो भी फैसला करेंगे वह अंतिम होगा। उसमे ब्रिटिश राजघराना कोई दखलंदाजी नही करेगा। इसीलिए कैबिनेट मिशन आने तक जो अंग्रेज यह कहते थे कि भारत का अगर कभी विभाजन हुआ तो उसके दो नहीं बल्कि 3 हिस्से होंगे, जिसमे से एक हिन्दुओ के लिए दूसरा मुसलमानों के लिए और तीसरा अछूतों के लिए होगा। सन 1946 तक यह अंग्रेजो का लिखित stand था। मगर जैसा कि india wins freedom में मौलाना आजाद लिखते हैं कि मैं यह जानकर हैरान हो गया कि जो गांधी जी यह घोषणा किये थे कि भारत का यदि विभाजन हुआ तो वह मेरी लाश पर गुजरकर ही होगा। वही मोहनदास गांधी AICC (all india congress committee) की बैठक की अध्यक्षता में स्वयं भारत के दो टुकड़ों की मंजूरी देकर आ गया। जिसको अंग्रेजों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। *मगर इस चाल से गांधी और कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर को स्वीकृति भार...
*भारत का तीसरा हिस्सा- हकमारी, मुंशीगीरी की इन्तेहाँ।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 Freedom at midnight के लेखक डोमिनिक लैपिरे और लैरी कोलिन्स लिखते है कि भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन जब भारत आये तब उन्होंने ब्रिटिश राजघराने से लिखित में वादा कराया था कि हम भारत मे जो भी फैसला करेंगे वह अंतिम होगा। उसमे ब्रिटिश राजघराना कोई दखलंदाजी नही करेगा। इसीलिए कैबिनेट मिशन आने तक जो अंग्रेज यह कहते थे कि भारत का अगर कभी विभाजन हुआ तो उसके दो नहीं बल्कि 3 हिस्से होंगे, जिसमे से एक हिन्दुओ के लिए दूसरा मुसलमानों के लिए और तीसरा अछूतों के लिए होगा। सन 1946 तक यह अंग्रेजो का लिखित stand था। मगर जैसा कि india wins freedom में मौलाना आजाद लिखते हैं कि मैं यह जानकर हैरान हो गया कि जो गांधी जी यह घोषणा किये थे कि भारत का यदि विभाजन हुआ तो वह मेरी लाश पर गुजरकर ही होगा। वही मोहनदास गांधी AICC (all india congress committee) की बैठक की अध्यक्षता में स्वयं भारत के दो टुकड़ों की मंजूरी देकर आ गया। जिसको अंग्रेजों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। *मगर इस चाल से गांधी और कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर को स्वीकृति भार...

राफेल घोटाला

*राफेल घोटाला के तथ्य सार्वजनिक नही कर सकते- फ्रांस*। खाजतक प्रेस्या अंजना ओम "मोदी" ने बताया कि भारत के साथ हुई राफेल घोटाले वाली डील सार्वजनिक करने से फ्रांस ने इनकार किया। फ्रांस मना करे तो करने दो मोदी सरकार क्यों नही मोटे माल वाली राफेल डील को सार्वजनिक कर रही??? देश की जनता जानना चाहती है कि मोदी सरकार ने जनता की हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक लिमिटेड को चूना लगाकर अम्बानी भौजी को ठेका क्यों दिलाया??? क्यों 3 की चीज 13 में खरीदी गई??? सरकार ने यदि फ्रांस के साथ राफेल डील देश हित में की है तो उसे सार्वजनिक करने में डर कैसा???? आखिर राफेल डील देश व देशवासियों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है कोई जुम्मन मियां और खाला जान का झगड़ा नही। मोदी सरकार राफेल डील सार्वजनिक करे अन्यथा बताये कि विभिन्न देशों के साथ होने वाली संधियों में secrecy clause क्यों????? भारत सरकार बताये कि विदेशी देशो के साथ हुई संधियो में most favoured nation का दर्जा क्यों रखा जाता है???? देश द्रोहियों होश में आओ। New world order थोपा जा रहा। Copy paste share🇮🇳🇮🇳 https://youtu.be/qgsxrpFMZu8

एक लख पूत सवा लाख नाती ताके घर मे दिया न बाती

*85% संख्या भारी, भैसा शक्ति, कानून के राज का मिथक और सुरक्षा बलों का सशस्त्रिकरण, बहुमत का राज स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 संख्या बल अर्थात जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी अर्थात muscle power अर्थात भैसा शक्ति का राज स्थापित करने में पुलिस पीएसी RAF आदि का शस्त्रीकरण सबसे बडी बाधा है। क्योंकि आधुनिकीकरण के नाम पर जितने ज्यादा स्वचालित व अतिआधुनिक हथियार घरेलू सुरक्षा कर्मीयो को दिये जायेंगे। लोकतांत्रिक व्यवस्था द्वारा संख्या बल के आधार पर सत्ता में काबिज होना उतना ही दिवास्वप्न होता जाएगा। क्योंकि आम देशवासियों को यहीं शस्त्रधारी डरा धमका कर सत्तावर्ग के अनुकूल भुतही शांति बनाए रखने में कारगर साबित होते हैं। मगर चालाक लोग हमेशा दंगा / बलवा नियंत्रण अथवा कानून का राज स्थापित करने के नाम पर इस कुकृत्य को छिपाते रहे हैं। जिसे बहुजन नेतृत्व ने भी पाला पोशा है।  यदि  किसी मुद्दे पर जन असंतोष है तो उसे विचार विमर्श की बजाय सुरक्षा बलों के शस्त्रो से दबाना कहाँ का न्याय है??? चूंकि प्रत्येक देश के समाज मे विविधता होती है इसलिए हमेशा इस ...

भगवान बुध्द की असली विपस्सना

*भगवान बुध्द की असली विपस्सना (गोयनका वाली नही) ज्ञान प्राप्ति और नादानों की नींद हराम करमे का नायाब फार्मूला।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 ज्ञान प्राप्ति में मानव इंद्रियां सबसे बड़ी बाधा हैं। जबकि भौतिक शरीर को चलाने व लोकाचार हेतु अतिआवश्यक हैं। *अर्थात जो इन्शान जितना ज्यादा आंख, काम, नाक, जुबान, स्पर्श और प्रजनन अंगों और उनके विषयों में लिप्त हैं वे उतने ही ज्यादा मूर्ख हैं।* जो व्यक्ति जितना ज्यादा मुद्रा अर्जन में लिप्त हैं वह उतना ही ज्यादा मूर्क्षित हैं। *जो इन्शान जितना ज्यादा घर मकान दुकान कार बीबी बच्चों साड़ी सूट आदि में संलिप्त हैं वे उतना ही ज्यादा अपनी मूर्खता और मूरक्षा का मजा ले रहे हैं*। ऐसे सभी लोगों का जीना हराम करना संयमी व्यक्ति के लिए चुटकियों का काम हैं। यही भगवान बुध्द का असली ज्ञान है। बहूतजन समाज तथागत बुद्ध से दूर है इसीलिए "दुखी" है। दुख से मुक्ति चाहिए तो तथागत बुध्द के बुद्धत्व हेतु शरण आइये। भवतु सब्ब मंगलं जय भारत भूमि🇮🇳

किसी भी समाज का स्वयं के विरोधी पर वर्चस्व अनूठी information के आधार पर ही कायम किया जा सकता है।

*किसी भी समाज का स्वयं के विरोधी पर वर्चस्व अनूठी information के आधार पर ही कायम किया जा सकता है।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 मगर मैं देख रहा हूँ कि बहुजन समाज के लोग सबसे ज्यादा misinformed हैं। ये जाति/अम्बेडकर/ समाज/ साम्य/ पूंजी आदि "वाद" के रूप में केवल प्रतिक्रिया करने में व्यस्त हैं। इसीलिए विजय श्री से कोशो दूर हैं। पता नही कब जीतना सीखेंगे???? जय भारत भूमि🇮🇳

Degree without becoming zero is biggest hurdle in true salvation.* Admission open... SALVATION GUARANTEED.

*Degree without becoming zero is biggest hurdle in true salvation.* Admission open... SALVATION GUARANTEED. 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 Buddhist ancestry established the university and education system in india much prior than any european and american countries. We all knew well that zero and decimal was discovered by beloved monks and deciples of reverred Buddha. But the real question is what degree they were providing to their student monks. Do these degree were similar to modern days degree provided by different manumanush university proclaiming now you are "bachelor / master or doctor in ....." How a degree could be achieved without being ZERO??? Because degrees are only in zero not on mare piece of paper and it's assertion. Something is very much wrong in the prevailing indian education system. Religion and education was complementary to each other not antagonistic. But we are compelled to obtain those piece of paper as degree after pushing much rubbish into head...

पिछड़ापन

किसी परीक्षा में पास होना या ज्यादा नम्बरो से क्वालीफाई करना या select होना किसी व्यक्ति की अच्छी गुणवत्ता या बौध्दिक क्षमता का सूचक नही बल्कि बुद्धि नियंत्रित होने की सूचक है। इसके बावजूद यदि कोई सेलेक्ट होकर, पास होकर या स्थान पाकर खुस हो तो समझना चाहिए कि अमुक व्यक्ति कि बुद्धि पूरी तरह व्यवस्था चलाने वालों के नियंत्रण में जा चुकी है। ऐसे व्यक्ति व्यवस्था चलाने वालों के लिए वरदान साबित होते हैं। अर्थात जो जितना ज्यादा बुद्धि नियंत्रित वह उतना ही ज्यादा बड़ा ओहदेदार। विडम्बना ये कि नासमझ लोग अनजान व्यक्ति को उसकी गुणवत्ता देख कर नही बल्कि ओहदा देख कर अच्छा या बुरा मानते हैं। यह है पिछड़ी या दलित बुद्धि की पहचान। यही कारण है कि जो लोग शिक्षा के नाम कभी कान में एक शब्द चला जाने से शीशा पिघलाकर डालने की राजाज्ञा जारी किए थे वही लोग आज शिक्षा दाता विद्यालय विश्विद्यालय आदि खोले बैठे हैं। डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर कहते ही रह गए कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह गुर्राएगा। मगर मनुमानुषों ने अछूत पिछडो के शिक्षा के प्रति बढ़ते हुए रुझान को देखते हुए शिक्षा रूपी शेरनी को ही कुतिया ...

प्रत्येक व्यक्ति को वयस्क मताधिकार और उनका जायज विकास-कितना जरूरी?

*प्रत्येक व्यक्ति को वयस्क मताधिकार और उनका जायज विकास-कितना जरूरी?* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 भारत की लगभग 130 करोड़ आबादी में प्रायः यह देखा गया है कि ज्यादातर इंसानों में स्वयं या खुद के परिवार के लिए रोटी, कपड़ा, मकान व इन्द्रिय अवश्यकताओं की आपूर्ति की जद्दोजहद के अलावा देश, समाज, दुनिया आदि की कोई समझ सोच नहीं होती है।  ऐसे में इस तरह के इन्शान रूपी कीडे मकोडो से लोकतंत्र के नाम पर वोट के अधिकार द्वारा सम्पूर्ण देश के भविष्य का निर्णय करने का अधिकार देना जायज कैसे माना जा सकता है????? ऐसे में उक्त प्रकार के इन्शान दारू, रुपये, तोड़ियाँ , विछियां, थाली, गिलास आदि के लालच में देश, समाज व संवैधानिक व्यवस्था का सत्यानाश नहीं करेंगे तो क्या करेंगे????? ऐसे में जबकि ज्यादातर लोग स्वयं की इक्षाओं की आपूर्ति हेतु ही वोट देते हो, वे लोकतंत्र के समर्थन बनेंगे या राज तंत्र के????? आजकल एक नाटक आ रहा है जिसका शीर्षक है "प्रजा ही रहने दो"। इस शीर्षक से बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत के भविष्य की व्यवस्था लोकतांत्रिक  होगी या राजतंत्रिक??? यही नाटकप्रेमी खब्बूस सबकी बाट लगाएं...

बाबा साहब के अनमोल विचार

बाबा साहब के अनमोल विचारों को कम से कम 10 ग्रुपों में जरूर शेयर करें "मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्‍छा है, मेरे बताए हुए रास्‍ते पर चलें।" मगर वह रास्ता क्या है हम नही मानेगे।😊   *डॉ. भीम राव अम्बेडकर* "रात रातभर मैं इसलिये जागता हूँ क्‍योंकि मेरा समाज सो रहा है।" यह कथित चलायमान समाज आज भी बेहोशी में जी रहा है। जिसने यह मान लिया कि इन्द्रियों से महसूस करना ही जागरूकता है। जबकि सच्चाई ठीक उलट है।🤪🤪   *डॉ. भीम राव अम्बेडकर* "जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, वह कौम कभी भी इतिहास नहीं बना सकती।" इसलिए हमने हमेशा इतिहास का रट्टा लगाना ही अपना अभीष्ठ लक्ष बना लिया। इसीलिए ही घृणित इतिहास पुनः वापस आ रहा है।🤓🤓   *डॉ. भीम राव अम्बेडकर* "अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।" मजबूती का तात्पर्य हमने भैसा शक्ति को समझ लिया। इसलिए खा खा कर सूअर की तरह फूल रहे हैं। जबकि मजबूती अक्ल की होनी जरूरी है।😃😃🤪   *डॉ. भीम राव अम्बेडकर* "मैं राजनीति में सुख भोगने नहीं बल्कि अपने सभी दबे-कुचले भाईयों को उनके अधिकार दिलाने आ...

क्या बहुजनों के तमाम संगठन, संघी कांग्रेसियो के प्रचारक संगठन हैं?

**क्या बहुजनों के तमाम संगठन, संघी कांग्रेसियो के प्रचारक संगठन हैं???* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 तमाम बामसेफ नाम की दुकानों द्वारा लगातार ब्राह्मणो को विदेशी कहने व उनके देवी देवताओं को गाली गलौज करते रहने के कारण 15% सवर्ण समाज जितना तत्परता से एकजुट व संगठित हुआ है। उतना आरएसएस यदि समझाबुझा कर संगठित करना चाहता तो शायद उसे दर्जनों साल लगते और अरबों रुपया बर्बाद होता। कायदे में संघियो व कांग्रेसियो द्वारा बामसेफीयो को धन्यवाद देना चाहिए कि बिना एक टका लिए 85% नादान लोग 15% सवर्णो को जागरूक व संगठित किये हुए हैं, ताकि स्वयं की कुटाई करवा सकें। इसलिए सभी बामसेफियों व जातिवादियो से विनम्र🙏🏼 निवेदन है कि अपना ज्यादा से ज्यादा वेतन बामसेफ व अन्य जातिवादी संगठनों को दान देकर संघी कांग्रेसियो को एकजुट व मजबूत करने का कष्ट करें। अभी एक झामसेफी पूंछ रहा कि मैं क्या देशद्रोही हूँ??? EVM मशीन तोड़वाओ बच्चू स्वयं देशद्रोही शाबित हो जाओगे। कमबख्तों द्वारा अम्बेडकर वाद के नाम पर प्रतिक्रिया वाद परोसा जा रहा है। इसीलिए संघी कांग्रेसी लगातार मजबूत होते जा रहे हैं और बहुजन समाज लगातार अवसर व अध...

पदोन्नति में आरक्षण अ जा / अ जनजाति के लोगों को बेवकूफ बनाने वाला आदेश है।*

पदोन्नति में आरक्षण अ जा / अ जनजाति के लोगों को बेवकूफ बनाने वाला आदेश है।  हलांकि पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश में  पदोन्नति में आरक्षण को नहीं छेड़ा था बल्कि राज्य सरकार की आरक्षण नियमावली की धारा 3(7) व नियम 8(क) को ही अल्ट्रावायरस बताया था। परन्तु सवर्ण व अजा/जन जाति के दोनों ही नेताओं ने समाज को गुमराह किया और पूरे जोरशोर से प्रचारित किया कि पदोन्नति में आरक्षण समाप्त हो गया है। जिसका नतीजा यह रहा कि इस बीच जो भी पदोन्नतियां की गई उनमें अ जा /  जनजाति के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने से वंचित कर दी गई तथा अजा जनजाति के कार्मिकों.की यह धारणा बनी की अब तो पदोन्नति में आरक्षण का नियम नहीं है, इसलिए उसके लिए संघर्ष करना व्यर्थ है। वहीं पर कुछ जागरूक कार्मिक अपनी लड़ाई को जारी रखा, जिसका नतीजा,  भले ही 2019 के चुनाव के मद्देनजर लिया गया हो, पदोन्नति में आरक्षण का भ्रामक आदेश जारी किया गया।    अभी हाल के सुप्रीम कोर्ट की सलाह, जिसमें कहा गया कि"  सरकार चाहे तो आरक्षण दे सकती है, परन्तु निर्णय कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर...

बामसेफ, डर और लोकतंत्र की कशम खाकर लोकतंत्र की हत्या- दोषी कौन।

*बामसेफ, डर और लोकतंत्र की कशम खाकर लोकतंत्र की हत्या- दोषी कौन।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 वामन मेश्राम और तमाम सारी बामसेफों की "भाषणबाजी" सवर्ण समाज को अंदर ही अंदर डरा व उबाल रही है। इस भाषणबाजी की परिणति संविधान और संविधानिक संरक्षणों के खात्मे के रूप में सामने आ रही है। ऐसे में यदि देश का संविधान और लोकतंत्र खतरे में है तो उस का प्रमुख कारण बामसेफ और उसकी भाषणबाजी है। कोरेगांव मामले के दोषी भिंडे को फडणवीस का संरक्षण और अम्बेडकर वादियों को नक्सली ठहराना, न्यायपालिका का अन्यायपालिका में तब्दील किया जाना इसका जीता जागता उदाहरण हैं। 2 अप्रैल प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार बच्चे पिछले ढाई महीनों से जेल में हैं। मेरठ के जज बच्चों की जमानत अर्जी बिना सुने ही हंसते हुए खारिज कर रहे हैं। Right to  education मौलिक अधिकार है मगर मेरठ के जजों ने तमाम पढ़ाई करने वाले बच्चों की परीक्षा के लिए पैरोल एप्लिकेशन भी खारिज कर दी है। जिन लोगों के पास रोज कमाए और रोज खाएं की मजबूरी है ऐसे परिवारों के बच्चे जमानत पर जेल से बाहर आ सके इसके लिए आपने क्या किया??? समाज के जिम्मेदार नागरिक बनिये तमाशब...

भीमकोरे गांव मामले की गिरफ्तार देशवासी अम्बेडकर वादी हैं न कि माओवादी- आठवले व उदित राज।

*भीमकोरे गांव मामले की गिरफ्तार देशवासी अम्बेडकर वादी हैं न कि माओवादी- आठवले व उदित राज।* विजय दिवस के उपलक्ष्य में 1  जनवरी18 को भीमकोरे गांव में उल्लास बनाने पहुंचे अम्बेडकर वादियों पर हिंसा करने वाले आतंकियों को गिरफ्तार करने की बजाय उल्टे गिरफ्तार अम्बेडकर वादियों को मनुमानुष संघी माओवादी आतंकी प्रचारित कर रही है। जो बेहद शर्मनाक व देशविरोधी कृत्य है। क्या कोई बता सकता है कि भीमकोरे गांव के मनुमानुष पुलिसिया गठजोड द्वारा कितने निर्दोष अम्बेडकर वादियों की गिरफ्तारी की गई? कितनो के परिवार चौपट हुए? कितने लोगों की नौकरी गयी? कितने लोगो ने जान गवाई? गिरफ्तार किए गए अम्बेडकर वादियों के परिजनों का कितना आर्थिक दोहन हो चुका है?? *इन्ही देशप्रेमी मूलनिवासी अम्बेडकर वादियों को मोदी की हत्या का शाजिसकर्ता बताना अम्बेडकर वाद को माओवाद और अम्बेडकर वादियों को माओवादी आतंकी ठहराकर खत्म करने की मनुमानुष शाजिस है।* अगर झामसेफी अम्बेडकर वाद मे सुधार नहीं किया गया तो भारत से अम्बेडकर वादियों का नामोनिशान मिटने में ज्यादा देर नहीं। कृपया भीमकोरे गांव मामले में गिरफ्तार किए गए ल...

maintain the global humanity under 50 00 00 000 only*. ~Who is ready to die ??

*maintain the global humanity under 50 00 00 000 only*. ~Who is ready to die ????!~ 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 बौद्ध धर्म subconscious साइंस के बुनियाद पर खड़ा हुआ है। जबकि विज्ञान conscious तर्को पर टिका है। चूँकि science मानवीय तृष्णा की पूर्ति करती है इसलिए लोकप्रिय व जनस्वीकार्य है। जबकि बौद्ध धर्म लोगों को लोकतृष्णा से परे ले जाकर चालाक इंशानी गुलामी से मुक्ति का मार्ग प्रसस्त करता है। इसीलिए झामसेफियो के समझ से परे है। अनजाने में ही सत्य धर्म की इस बुनियाद पर मट्ठा डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से बामसेफवाद ने डाला हुआ है। इसलिए जब तक बुनियाद को ठीक नही करोगे तब तक विरोधियों से सफलता दिवास्वप्न ही रहेगी। कितनी पीढियां बर्बाद होंगी अंदाजा लगाना मुश्किल है। मगर कौन कमबख्त सुधरना चाहता है सब मजे में लगे हुए हैं। Maintain the humanity under 50 00 00 000 globally. ऐसे में देखो तुम कहाँ और कब तक मजे लेते हो.. .... भवतु सब्ब मंगलं☸ जय भारत भूमि🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर🌷

एजेंडा -21 भारत और भारतवासियों की मौत का वारंट।

*एजेंडा -21 भारत और भारतवासियों की मौत का वारंट।* #वीर_विरप्पन_गोंड विरप्पन गोंड ने 17वर्ष की उम्र में जंगलों में अपनी हकूमत कायम कर वहाँ  आसपास के मनुवादी  शासन-प्रशासन में भय पैदा कर दिया था।   श्रीनिवासन ब्राह्मण ने विरप्पन की बहन को प्यार के झांसे में रखकर व गर्भवती बना कर शादी से इन्कार कर दिया तो विरप्पन गोंड ने श्रीनिवासन की हत्या कर और टुकडे-टुकडे कर मछलियों को खिला दिया था। विरप्पन-गोंडर के प्रभाव के कारण ही वहाँ के आदिवासियों को अत्याचार, बलात्कार, हत्या व शोषण से मुक्ति मिल गयी थी और उन्हें मजदूरी का पूरा पैसा मिलने लगा था, जो मनुवादी शासन-प्रशासन नहीं चाहता था कि आदिवासियों की आर्थिक हालात में फायदा हो। फिल्म अभिनेता राजकुमार का अपहरण करने के बाद विरप्पन गोंड ने सरकार के सामने राज्य की दस प्रमुख समस्या रखी और मांगे पूरा करने का अल्टीमेटम दिया। मांगे निम्नलिखित थीं । 1- कावेरी पानी का विवाद जबतक हल नहीं होता तबतक कर्नाटक सरकार तमिलनाडु के लिये प्रतिमाह 250TMC पानी दे। 2- सन 1991 में भडके कावेरी-पानी विवाद में जो तमिल पुलिस फायरिंग में मारे गये थ...

सावधान : Govt job पर संकट

*सावधान : Govt job पर संकट* 1. 10 अगस्त को, लोकसभा में The Code on Wages, 2017 पेश किया गया है. इसके लागू होने के  बाद, ये सारे Acts अप्रभावी हो जाएंगे:- The Payment of Wages Act, 1936, the Minimum Wages Act, 1948, the Payment of Bonus Act, 1965 and the Equal Remuneration Act, 1976 (Clause 60) 2. सभी कंपनियों आदि के अतिरिक्त यह, इन सब पर भी लागू होने जा रहा है रेलवे, खानों, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाहों, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी या किसी निगम या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या सहायक कंपनियां  या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों की स्थापना सहित, जैसा कि मामला हो, केन्द्रीय सरकार;  (Clause 2(d)) यानि यह अब हर नौकरीपेशा पर लागू होगा. 3. इसके मुताबिक़, अब पारिश्रमिक (I) घंटे के हिसाब से, या (Ii) दिन के हिसाब से, या (Iii) महीने के हिसाब से तय किया जा सकता है. जो, (ए) समय काम के लिए मजदूरी की न्यूनतम दर; या (बी) टुकड़े के काम के लिए मजदूरी की एक न्यूनतम दर; के हिसाब से दिया जाएगा. (Clause 6 ) यानि अब नौकरी घंटों या दिन के हिसा...

बामसेफ, आरक्षण का खात्मा औऱ बहुजनों की कुटाई पिटाई करा कर हिंदु राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्तिकरण।

*बामसेफ, आरक्षण का खात्मा औऱ बहुजनों की कुटाई पिटाई करा कर हिंदु राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्तिकरण।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 बामसेफ के लोग अक्सर बताते रहते हैं कि बामसेफ नौकरीपेशा लोगों का संगठन है, मगर नौकरीपेशा लोगों के लिए नहीं है। तो आखिर यह बामसेफ किसके लिए काम कर रहा है???  इस संगठन के लोग हमेशा नौकरीपेशा लोगों के आस पास चंदा उगाही के लिए लगे रहते हैं। ये लोग कभी भी गांव देहात के गरीब मजदूर किसान आदि के साथ उठना बैठना पसंद नहीं करते।  ऐसी स्थिति में यह संगठन आखिर काम किसके लिए कर रहा है????? शायद केवल धन उगाही के लिए।।। इसीलिए आज आधा दर्जन बामसेफ नाम की दुकानें चल रही हैं।🤔 बामसेफ नौकरी पेशा बहुजनों का संगठन है। मगर कभी भी इस संगठन ने नौकरीपेशा लोगों के आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ी हो तो बताओ। आप कोई भी केस ले लो। इंदिरा साहनी केश हो, एम नागराज केस हो, दीपक मिश्रा द्वारा डिमोशन का मामला हो आदि में यदि बामसेफ वादी बना हो तो बताओ। 🤔 तो आखिर यह बामसेफ काम किसके लिए करता है?₹₹?? क्या इस बामसेफ का काम केवल नौकरीपेशा बहुजनों से  रुपए ऐंठना और स्वयं की पूंजी बनाना है???...

पंडित हेगड़ेवार गोलवलकर पिछडा वर्ग उत्थान योजना- 2019

*पंडित हेगड़ेवार गोलवलकर पिछडा वर्ग उत्थान योजना- 2019*। जय श्री राम9🚩 अहीर को भैंस चराने का।🤪🤪🤪🤪 कुर्मी को हल चलाने का 😘। काछी को भाँटा,मुरी लगाने का 😆। बढ़ई को मचवा,पाटी, किवाड़ा बनाने का 😂 लोहार को खुर्पी, कुल्हाड़ी, हंसिया बनाने का।🤪🤪  कुम्हार को गघरा,घड़ा बनाने का 😍। ठंडा पानी चाही कि न बुडबक गड़रिया को गाडर चराने का।🤩 सोनार को अंगूठी,बीछिया बनाने का 🤓 तेली को तेल का कोल्हू व तेल लगाने का 🤩🤩🤩 नउवा को नीचे -ऊपर के बाल बनाने का 🤪🤪 नाउन भौजाई को मस्ख़ा लगाने का। 5🤪🤩🤩 धी म ही धियो योनि पे.... मंत्र गाने का😍😍😃 दर्जी को कपड़ा सिलने का 😛😛 तमोली,चौरसियायिन भौजी को पान खियाने का 🤪😘। भुर्जीन को बहुरी,चना,लाई भूजने का ।😃😀 लोधी लक्कड़ आदि को हल जोतने का 🤓🤓 अवसर दे कर चड्ढी गैंग भाजपा के मोदी और जोगी ने बहुत ही बड़ा उपकार किया है l ।।🚩 साथ में कहा है इनका सुबह -सुबह मुँह देखने से पूरा दिन खराब हो जाता है इसलिये इनको सरकारी नौकरी नही दी जायेगी,और न ही इनको सरकारी आवास,दफ्तर,में घुसने दिया जाए l 😄😃😁😁यह योजना 2014 से लगातार चालू है जि...

त्रिरत्न बौद्ध महासभा व भंते सघंरक्षित का भंडाफोड़।

*त्रिरत्न बौद्ध महासभा व भंते सघंरक्षित का भंडाफोड़।* ☸☸9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳 महाराष्ट्र के महार त्रिरत्न बौद्ध महासभा के चक्कर में पड़े हुए हैं। जबकि इस महासभा  की स्थापना अंग्रेज भिक्षु संघरक्षित द्वारा की गई थी यह संघरक्षित कई लड़कों के बलात्कार के जुर्म में दोषी पाए जाने कारण इस को सजा दी गई। इस जुर्म को इसने कबूल भी किया था इसकी पूरी विचारधारा यह है के लड़के लड़को से औऱ लड़कियां लड़कियों से शादी संबंध या  शारीरिक संबंध रखें यही उत्तम है। बाद में इसको देश से निकाल दिया गया । ऐसी स्थिति में उसके बनाए संगठन और बाइलॉज के तहत अंबेडकरवादियों द्वारा काम करना स्वयं के सत्यानाश के अलावा क्या कहा जा सकता है??? ऐसा केवल इसलिए हो पा रहा है कि महार या अंबेडकरवादी समूह में अंबेडकर के प्रति भक्ति भाव है और बाबा साहब के प्रति भक्त भाव होने के कारण अंग्रेजों की प्रत्येक सहानुभूति है। इसलिए कोई भी विदेशी जब कभी अंबेडकर की बात करता है तो हमारे लोग तुरंत उसके जाल में फंस जाते हैं। इसलिए अंबेडकर शरणम गच्छामि से हमें बाज आना पड़ेगा। अंबेडकर के कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ...

सशस्त्र पुलिस और आम जनता के स्वतंत्रता का खात्मा।

*सशस्त्र पुलिस और आम जनता के स्वतंत्रता का खात्मा।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳  पिछले दिनों तमिलनाडु के टूटिकोरिन  कन्याकुमारी आदि स्थानों पर पुलिस और आम जनता के बीच एक कॉपर प्लांट की स्थापना के विरोध में प्रदर्शन हुए थे।  उन झंडपो में आम नागरिकों ने उद्योगपति के कॉपर प्लांट की स्थापना का विरोध किया था। जिसके लिए सरकार के इशारे पर सशस्त्र पुलिस वालों ने लगभग 13 देशवासियों की नृशंस हत्या कर दी है।  यह वतन पर रक्षा में शहीद हुए 13 देशवासी कौन थे ?? इन को मारने वाले पुलिस वाले, इन पुलिस वालों को पीछे से आदेश देने वाले कौन हैं??? क्या पुलिस वालों के हाथों में थ्री नॉट थ्री राइफल व डंडे की जगह स्वचालित एक के 56 जैसे हथियार थमा देने से आम जनता सुरक्षित हो रही है या उसे असुरक्षा की भावना में जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है??? ताकि भुतही शांति स्थापित की जा सके। आखिर यह सुरक्षाबलों के हाथ में इतनी ज्यादा शक्तियां क्यों दी जा रही है ??? क्या आम नागरिक आतंकवादी हैं? क्या लोकतंत्र में अपनी जल-जंगल-जमीन की रक्षा करना देशद्रोह है ? क्या उद्योगपतियों के लिए आम जनत...

बामसेफ और संघी ब्राह्मणो की आपसी नूराकुश्ती।

[5/24, 12:15] Self: *ब्राह्मण बनाएं बामसेफ जैसा संगठन :दलित बुद्धि मीटर* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 अभी हाल में एक अखबार की कटिंग बामसेफी जातिवादियो के द्वारा खूब शेयर की जा रही है जिसका शीर्षक है "ब्राह्मण बनाये बामसेफ जैसा संगठन"। यह शीर्षक औऱ कथन बहुजन समाज के भोलेभाले जन्तुओं के अन्दर उल्लास भरने वाली प्रतीत हो रही है। जबकि उक्त खबर  में ऐसा कहने वाले ये लोग या तो मंद बुद्धि है अथवा लगातार पराजित होते बहुजन समाज को और ज्यादा गुमराह करने व आत्म चिंतन की जगह पुराने ढर्रे पर चलते रहकर खुश बने रहने हेतु दुराग्रह से ग्रसित है, इसीलिए यह बात ब्राह्मणों द्वारा कहलाई गई है। अगर ऐसा नहीं है तो बामसेफियो की तरह ब्राह्मण किसे गाली देँगे? ब्राह्मण किसके देवी देवताओं को बदनाम करेंगे? *बहुजन लोग जिस ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्ही की बातेँ 'स्वयं को सही ठहराने के लिए प्रमाण कैसे मानी जा सकती हैं???* बहुजन समाज को गुमराह करने के लिए यह बात उनकी कुटिल चाल का हिस्सा है? ब्राह्मण आखिर बुद्धि के कारण ही तो 5000 साल से 85% भारतवासियो पर राज कर रहे हैं। ऐसे में जो भ...

स्कूल चलो अभियान: शिक्षित बनो.... विद्या बिना मति गयी और संघियों की संस्कारशाला।,

*स्कूल चलो अभियान: शिक्षित बनो.... विद्या बिना मति गयी और संघियों की संस्कारशाला।,* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 स्त्री शूद्रों नाधीयताम अपौरुषेय वाणी रच कर स्त्रियों और शूद्रों अर्थात सभी पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले मनुमानुष अचानक स्कूल चलो अभियान के समर्थन कैसे और क्यों बन गए???? स्त्रियों और शुद्र अर्थात पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले पंडे पुजारी अचानक अधम से अधम अति नारी को स्कूल चलो अभियान की शिक्षिका क्यों बनाने लगे?????🤔🤔  इस दरम्यान आखिर हुआ क्या , जिसकी वजह से इन पंडे पुजारियों का हृदय परिवर्तन हो गया और जो लोग स्त्रियों और शूद्रों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा रहे थे अचानक वह बड़े-बड़े विद्यालय और विश्वविद्यालयों के मालिक बनकर शिक्षा देने के सबसे बड़े ठेकेदार कैसे और क्यों बन गए है?????🤔🤔🤔 कोई जवाब आपके पास??🤔🤔 अगर आप डॉक्टर अंबेडकर के चमचे हैं तो आप तुरंत ही इस बड़े परिवर्तन का श्रेय संविधान और संवैधानिक व्यवस्था को देने से बाज ना आएंगे। जबकि संविधान संरक्षण दो राष्ट्रीयकृत शिक्षा के लिए जरूरी था। मगर आज निजी क्षेत्र की शिक्...

Employee federation बामसेफ और सतरंज के राजा रानी।

*Employee federation बामसेफ और सतरंज के राजा रानी।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 आप जानते हैं कि बामसेफ एक employee फेडरेशन है अर्थात जो सरकारी नौकरी पा गए लोग हैं उन्हीं के खून पसीने की कमाई पर चलने वाले संगठन का नाम ही बामसेफ है। यह बामसेफ के नौकर लोग सरकारी सेक्टर या राष्ट्रीयकरण के कारण पैदा हुए, जो आज खत्म किया जा रहा है। इस कारण आरक्षण भी खत्म हो रहा है। यदि आरक्षण व राष्ट्रीयकरण नहीं रहेगा तो आने वाले समय में इन बामसेफ संगठन चलाने वाले लोगों को धन दौलत कौन देगा??₹? जब कभी भी कोई भी खेल होता है तो पर्दे के पीछे के खिलाड़ी या सबसे मजबूत सपोर्ट बेस हमेशा पर्दे के पीछे अथवा सुरक्षित रखा जाता है।  यही रणनीति के तहत सीमा पर लड़ाई होने पर सेनानायक सबसे पीछे होता है। यही रणनीति होने के कारण शतरंज के राजा और रानी हमेशा सबसे पीछे रहते हैं। उनके सुरक्षा के लिए तमाम हाथी घोड़ा सैनिक आदि रहते हैं। इस प्रकार जब पूरी सेना पराजित हो जाती है तब जाकर राजा रानी विरोधियों के कब्जे में आते हैं औऱ खेल/युद्ध खत्म हो जाता है।। *मगर बामसेफ नाम के संगठन ने अपना जो सबसे मजबूत सपोर्ट बेस था अर्थात नौक...

बहुजनों का असली दुश्मन संगठन बामसेफ या RSS :एक नजरिया।

*बहुजनों का असली दुश्मन संगठन बामसेफ या RSS :एक नजरिया।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 दुनिया में हिंदुस्तान ही मात्र एक ऐसा देश है जिसमें एक जज ही दूसरे जज को नियुक्त करता है वो भी बिना किसी परीक्षा के। ऐसे में संघी सब जगह कब्जा नही करेंगे तो कौन करेगा। बहुजन समाज के लिये संघी कोई समस्या नहीं है, असली समस्या है बामसेफ। ये बामसेफ, आरएसएस की नेगटिव बिंग का काम विगत 50 साल से कर रहा है। इसलिए ही लगातार संविधान कमजोर करने में संघी कांग्रेसी सफल हो पाए है। इसलिए यदि किसी संगठन में आग लगाने की जरूरत है तो वो है बामसेफ। इस बामसेफ की वजह से नौकरियो में आरक्षण खत्म करने में संघी औऱ कांग्रेसियो ने तत्परता दिखाई है। इसीलिए आज युवाओं युवतियों का भविष्य खतरे में है। इसीलिए आज शादी योग्य युवक युवतियां विधवा- विदुर का जीवन जीने को मजबूर हैं। इसीलिए आज युवक युवतियां लगातार नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। इसीलिए आज युवक और युवतियां अपराध की दुनिया में कदम रखने को मजबूर हैं। इसी बेरोजगारी के कारण बच्चों के माता पिता घुट घुट के काल के गाल में समा रहे हैं। जिनको असमय ही तमाम बीमारियां घेर रखी हैं...

शिक्षा, शेरनी का दूध और दहाड़ मारती भीगी बिल्ली (sc st obc)- म्याऊँ।

*शिक्षा, शेरनी का दूध और दहाड़ मारती भीगी बिल्ली (sc st obc)- म्याऊँ।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 *डॉ बाबासाहेब आंबेडकर कहते हैं कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो भी इसे पिएगा वह दहाड़ेगा।* ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सिलेबस निर्धारित करने का अधिकार बहुजन विरोधियों के हाथ में है। जब लगभग सारे स्कूल कालेज बहुजन विरोधियों के है, तो वह आपको सही शिक्षा देकर मुड़ कटवाने का इंतजाम क्यों करेंगे????????🤔🤔🤯 क्या कोई पंडा पुजारी पागल है, जो आपको असली शिक्षा देकर अपनी जान आफत में डालेगा????? इसका दूसरा पहलू यह भी है कि शिक्षा के नाम पर आपको जो भी पढ़ाया गया। आपने जो भी रट्टा लगाया।  आपने जो कुछ भी आईएएस-आईपीएस कर्मचारी आदि बनने के लिए पढ़ा पढ़ाया, वह केवल आपके ब्रेन की प्रोपर कंडीशनिंग हुई या नहीं हुई। यह परीक्षा द्वारा जांच परख कर ही आप जहां जिस जगह हैं, पर बैठाया गया है।  इसका यह मतलब है कि हमारे जो भी साथी अधिकारी कर्मचारी बाबू चपरासी इत्यादि हैं।  सब के सब मस्तिष्क नियंत्रित "पशु" मात्र है।  यही कारण है कि पिछले 5000 सालों से चला आ रहा धर्म युद्ध बहुज...

बहुजन जातिवाद, ब्राह्मणवाद व संविधान द्रोह के पनपने के लिए जरूरी खाद पानी।

*बहुजन जातिवाद, ब्राह्मणवाद व संविधान द्रोह के पनपने के लिए जरूरी खाद पानी।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को पितामहः मानने वाले नोबल पुरस्कार विजेता डॉ अमर्त्यसेन जी ने कहा है कि जाति व जातिव्यवस्था राष्ट्रद्रोही व्यवस्था है। हालांकि बहुजन जातिवाद ने वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे गिन रहे समाज को फौरी राहत जरूर दी। मगर इस कारण बहुजन समाज के लोगों का जितना नुकसान बहुजन जातिवाद ने किया उतना *भीषण* नुकसान स्वयं ब्राह्मणवाद (जाति व जातिनिर्माता) ने भी नहीं किया। क्योंकि जाति जो बहुजनों की प्रमुख समस्या थी उसको बहुजन जातिवाद ने कभी न खत्म होने वाली अमरबेल बना कर ब्राह्मण धर्म को संभावित नुकशान से बचा लिया। इस जातिवाद ने पंडे पुजारियों के वर्चस्व निर्माण के लिए status quo की स्थिति निर्मित कर बहुजनों को चारो तरफ से घेरकर मारने के लिए पंडे पुजारी वर्ग को पर्याप्त समय उपलब्ध कराया। इस बहुजन जातिवाद ने बुद्धवाद की जड़ो में मठ्ठा डाल कर कभी पनपने नहीं दिया। इस बहुजन जातिवाद ने बहुजनो के अंदर अधर्म व सुरीय प्रवत्तियों के निर्माण में विशेष योगदान दिया। इस जातिवाद ने बहुजन समाज...

बहुजनों का आंदोलन महापुरुषों का आंदोलन है।

#बहुजनों का आंदोलन महापुरुषों का आंदोलन है। 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 बहुजन महापुरुषों ने विरोधियों से मुक्ति हेतु किये गए तमाम ताबड़तोड़ काम के बाद भी पराजय मिली। ऐसे में उन्हीं महापुरुषों के किये गए कार्यों की पुनरावृत्ति या जाप से उस समय से ज्यादा सतर्क और सक्षम विरोधियों से जीत कैसे हाशिल हो सकती है????? #बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से आये। भवतु सब्ब मंगलं कॉपी पेस्ट शेयर💐💐

कर्नाटक में भाजपा की जीत पर बहन मायावती जी को लख लख बधाइयाँ।

*कर्नाटक में भाजपा की जीत पर बहन मायावती जी को लख लख बधाइयाँ।*💐💐💐 बहन मायावती जी के द्वारा हालिया कर्नाटक (2018) के चुनावों में एच डी देवगौड़ा (JD- S) के साथ गठबंधन करने और कांग्रेस से दूरी के कारण भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। जो राज्यपाल के साथ साठ गांठ के चलते हो सकता है कि सरकार भी बना ले। इसलिए कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी की जीत की असली बधाइयां मायावती जी जाती है। जिन्होंने बहुजन वोटों को तितर बितर कर  भाजपा को सत्ता दिलवाई है। यह डील कितने में हुई या किस एवज में हुई एक शोध का विषय है। मायावती जी बहुत बहुत बधाइयां। 💐 अब कर्नाटक में दलित उत्पीड़न बन्द हो जाएगा। मायावती जी जिंदाबाद। और कितने साल भाजपा की मदद करोगी बुआ??? भक्तो बजाओ ताली👏🤔 तुम्है डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर औऱ 2 अप्रैल के क्रान्तिकारियो के बलिदान की शौगन्ध यह संदेश रुकना नही चाहिए। यही है भाजपा की विजय, बौखलाहट और दलित उत्पीड़न की कुंजी। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के येदुरप्पा जी को मुख्यमंत्री बनने पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और दलितों के मसीहा बहन मायावती जी को बहुत-बहुत बधाई और साधु...

वाद, विवाद औऱ अम्बेडकरवाद: एक दृश्टिकोण।

*वाद, विवाद औऱ अम्बेडकरवाद: एक दृश्टिकोण।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से प्रचलित अंबेडकरवाद कोई "वाद" नहीं बल्कि "विवाद" है। जो कभी अंग्रेजों से चलता है।  यही विवाद कभी संघी गांधी और कांग्रेस से चलता है। कभी यही विवाद अनुच्छेद 370 के नाम पर मुसलमानों से चलता है। कहीं यही विवाद बनियों से चलता है। कहीं यही विवाद ब्राह्मणों से चलता है। कभी यही विवाद ठाकुरों से चलता है।  तो कभी यही विवाद बहुजनों की तमाम अन्य जातियों से भी चलता दिखाई देता है। ठीक यही विवाद हर उस संगठन में चल रहा है जिसका आधार अम्बेडकरवाद है। कही पर संगठन /समिति में बपौती बनाये बैठे पदाधिकारी हैं।  तो कहीं पर अनुशासन के नाम पर एकल निर्णय थोपे जा रहे।  कहीं पर सदस्यों का निष्कासन किया जा रहा तो कही पर संगठनों का विखंडन लगातार जारी है। ऐसी स्थिति में हमें "विवाद" से बचते हुए डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर के महागुरु तथागत बुद्ध जी के असली "वाद" अर्थात बुद्धिवाद की ओर अग्रसर होना चाहिए। *विवाद मे पड़े रहोगे पराजित होओगे जबकि वाद करोगे तो विजय कदम च...

भीम भजन: जय बाबासाहेब, जय बुद्ध बिहारी।

*भीम भजन: जय बाबासाहेब, जय बुद्ध बिहारी।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी, जय बहुजन बल्लभ, जय हर्षवर्धन गिरधारी, बनवासी गोपाल जय पिछड़े बनवारी, जय नागपुरवासी, जय सारनाथ बिहारी, जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी, यशवंत, रमेश, इंदु, राजरतन गंगाधर बलिहारी। जय पोथीधर भीम, जय बोधीराज बल्धारी, जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी, जय भीमाबाई नंदन, जय सकपाल मुरारी, जगपाल मनमोहन, जनताप बलिहारी, जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी, मूलवासिओं के सांवरिया, स्त्रियों के खेवइया, पिछड़ो के राम, जय जय, जयहो तुम्हारी, जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी, मूकों के नायक, नायकों के त्रिपुरारी, जय बाबा साहेब, जय बुद्ध बिहारी। जय बुद्ध बिहारी.... जय जय जय हो तुम्हारी..... ..🌶🙏🏼🙏🏼 जय भारत भूमि🇮🇳 कॉपी पेस्ट शेयर🌷☸ बात कहने की शैली बदलने से निष्कर्ष नहीं बदलता।

भजन:भीम नाम सुखदाई

*भजन:भीम नाम सुखदाई* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 भीम नाम सुखदाई भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का .......... भीम की माला जबसे पहरी सुधबुद्ध गई हिराई भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का .......... भीम की भाषा जब से बोली जमकें झगड़ा हो रहो ताई भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का .......... भीम सी शिक्षा जबसे सीखी जबसे सीखी..... संतोष श्रद्धा रही बिलाई भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ..........

सुपरमैन अम्बेडकर: एक कार्टून धारावाहिक की आवश्यकता

*सुपरमैन अम्बेडकर: एक कार्टून धारावाहिक की आवश्यकता*। 🌷🌷9*4*5🌸🌸🌸🌸☸ आपकी जेब में जो पेन है वह डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर की देन है।  आपके पास जो दौलत है वह डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर की बदौलत है। आप जहां कहीं भी खड़े हैं उसके लिए डॉ बाबासाहेब अंबेडकर लड़े हैं। डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर  कोई इन्शान नही बल्कि एक सुपरमैन थे। 😃😃😃 वे स्पाइडरमैन की तरह जाल बुन कर विरोधियों को पराजित कर देते थे।🤬 डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर बैटमैन थे वे चमगादड की तरह रात में भी विरोधियों पर हमलावर रहते थे।😃 वे हल्क के समान ताकतवर थे, जो बड़े से बड़े विरोधी को भी परास्त कर दिया करते थे। वैसे भी आपने डॉ अंबेडकर को rambo तो बना ही रखा है। इसलिए यदि डॉ अबेडकर पर एक धारावाहिक और आ जाता है तो बच्चे बुड्ढे सब एक समान बनाने में काफी मदद मिलेगी। *ऐसे में डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के भक्तो को चाहिए कि उक्त सभी खूबियों से युक्त एक कार्टून धारावाहिक बनाये जिसका नाम हो "ब्लू मैन/ जयभीममैंन अम्बेडकर"।* यह धारावाहिक अब तक के सभी धारावाहिको की TRP रिकॉर्ड तोड़ देगा इसकी गारंटी हमारी है। भक्तों की कोई कमी ह...

22 प्रतिज्ञाएं व मुक्तिबोध।

*22 प्रतिज्ञाएं व मुक्तिबोध।* 🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳 जिस प्रकार "नदी" दो किनारो के बीच बहती है। इन्ही दोनों किनारों से अठखेलियाँ करती हई चलती है। इन्ही दोनों किनारों के अंदर के सारे नजारे को पूरी दुनियां समझती है। लगभग कुछ इसी तरह का हमारा भी संसार है। मगर इतनी होशियार भी रहती है कि किसी भी एक किनारे द्वारा ज्यादा प्रेम व्यवहार की स्थिति में अठखेलियाँ जरूर उसके साथ करती है मगर दूसरे किनारे को बिल्कुल नही छोड़ती। जबकि इन्शान जिस जगह को पसंद करले तो समझो वही उसका ठिकाना। आज हम बहना भूल से गये हैं। हम किसी न किसी तट से चिपके हुए हैं। यही किनारे ही रिवर बैंक कहलाते है। इन्ही बैंकों पर हम लोग बैंक कर सकते हैं। यही बैंकिंग व्यवस्था है। इशानी समुह भी कुछ इसी अंदाज में चलते हैं। उदाहरण के लिए यदि हम डॉ बाबासाहेब अम्वेदकर के भक्तों को ही लें लें। जो रात दिन डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के कार्यो का गुणगान तो यहां वहां करते रहते हैं। खुद भले ही उनके ठीक उलट क्रिया कलाप कर रहे हों। यह स्थिति भी नदी के दो किनारों के समान ही है। जिसमे व्यक्ति को भ्रम तो होता है कि हम दूसरे जीव जन्तुओ से भिन्न है। ...