स्त्री दमन, नागवशियों का टोटम नाग और नाग पंचमी का रहस्य।
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸💐गुड़ियां या नाग पंचमी का त्योहार ब्राह्मण धर्मियों द्वारा कानपुर मंडल मे बड़े ही जोश के साथ मनाया जाता है। जिसमे स्त्री पुरुष बच्चे आदि कपड़े की गुड़िया (doll) बना कर उस पर लाठी डंडे से पीट पीट कर वार करते हुए हत्या का प्रहसन करते हैं। जो सीधे सीधे स्त्री दमन और मर्डर का प्रतीक है।
जिसे तुलसीदास की कहानियों से और प्रेरणा मिलती है।
बिडम्बना ये है क़ि यह स्त्री हत्या का नाटक स्वयं स्त्रियां भी बड़े चाव से अंजाम तक पहुंचाती है।
इस कन्या हत्या के जश्न के बाद शाम को पुरुष अक्सर कुश्ती लड़ने / देखने दंगल मे जाते हैं।
इस पूरे वाकये का प्रतीकात्मक मतलब है, स्त्री दमन।
इसकी शुरुआत ऐसे लोगों की पराजय के फलस्वरूप हुई होगी जो नागवंशी टोटम को मानते और जानते थे।
मगर आज यही पराजित कौमें अपनी पराजय का जश्न बड़े ही धूमधाम से मनाती हैं।
*नागवंशी टोटम का मतलब था जागृत कुण्डलिनी शक्ति से परिपूर्ण समाज। इस शक्ति का मतलब है व्यक्ति की सम्पूर्ण जागृति अवस्था और बहुत ही उच्च आंतरिक चेतना स्तर।*
इंशानी चेतना के इसी उच्च स्तर को भगवान बुद्ध ने प्रतिप्त समुत्पाद नियम मे *अविद्या पच्चया संखारा...* मे अविद्या का नाम दिया हुआ है।
यही अविद्या बाद मे अपनी समझ के अनुसार राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी द्वारा *विद्या बिना मति गई ...* बन गया।
कालांतर मे यही अविद्या डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा educate organise and agitate का नारा देकर स्कूल चलो अभियान बना दी गई।
जो अपने मूल स्वरूप से बिल्कुल भिन्न हो गई। अविद्या का तात्पर्य चेतना (consciousness) से था न क़ि स्कूल चलो अभियान से। यही अंतर होता है एक राजनेता और धर्मगुरु मे।
इसलिए अपने इस खोये हुए गौरव को जगाकर, नागों की पूजा करते हुए सिवईयाँ (छोटे नागों का ही रूप) खाइये मगर स्त्री दमन बन्द कीजिए।
विरोध नहीं बल्कि हजम करना सीखिये।
हो सकता है आपको ये बाद समझने मे भी सदियाँ लगें.....🤔
भवतु सब्ब मंगलं।
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भूमि नमो भारत🇮🇳💐
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