*यदि गोरखधंधा व्यवसाय है तो इस गोरखधंधे का विरोध नक्सलवाद कैसे???*
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳
तीन रुपये कीमत की चीज को 13 रुपयों की कीमत मे ग्राहकों को बेचना *व्यवसाय* (bussiness) कहलाता है।
इस गोरख धन्धे के समर्थक अपने इस कृत्य को *विकास* (development) कहतें हैं।
जबकि जो लोग इस ठगी को आम देशवासियों के सामने उजागर करें उनको ये गोरखधंधेबाज -नक्सली कहते हैं। बल्कि जो राष्ट्रभक्त देशवासी इस अन्यायी गोरखधंधे की खुल कर हर प्रकार से खिलाफत करें उन्हें ये ठग देशद्रोही आतंकी कह कर बदनाम करते हैं।
*ऐसे मे आप स्वयं विचार करो क़ि सही कौन है?🤔*
गोरखधंधे बाज या वो देशभक्तजन जो इस गोरखधंधे के विरोधी हैं?????
बिडम्बना ये है क़ि बहुजनों मे पिछले 500 सालों से इसी गोरखधंधे मे हिस्सेदारी की जंग विभिन्न रूपों मे चल रही है।
कभी कोई इसे सामाजिक न्याय कहता है तो कभी कोई इसे आरक्षण कहता है।
काम दोनो एक ही हैं। चाहे भोलेभाले देशवासियों को गोरखधंधे द्वारा ठगना व फांसना हो या सामाजिक न्याय के नाम पर भारतवासियों मे अपनी अपनी छीना झपटी हो।
दोनो ही अन्याय का समर्थन करते है।
दोनो ही देश व देशवासी विरोधी हैं।
यही बजह है क़ि यह जंग खत्म होने की तरफ नही, बल्कि और बढ़ रही है।
जैसे जैसे यह जंग बढ़ रही है वैसे वैसे यह पराजित गरीब मजदूर किसान देशवासी तबका और बुरी हालत मे पहुंच रहा है।
कायदे मे तो असली जंग इस गोरखधंधे के खिलाफ होनी चाहिए थी।
मगर इस ठगी मे आपकी हिस्सेदारी के चलते इस व्यवस्था से शोषित लोगों के अपने ही लोग (सामाजिक न्याय या आरक्षण से पोषित लोग) पोषक बन गए हैं।
जिस व्यवस्था के समानांतर आपको दूसरी व्यवस्था खड़ी करना चाहिए थी। आप वस्तुविनिमय व सेवा विनिमय आधारित व्यवस्था के पोषक न बन कर आप स्वयं गोरखधंधे मे शामिल हो गए हो। ये कृत्य आपका डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर लिखित संविधान की प्रस्तावना के ही खिलाफ जा रहा है।
नतीजा आस्थाई गुलामी आज चिरस्थाई बनती जा रही है।
दुनियां मे ऊँच नीच- छोटा बड़ा -गरीब अमीर आदि मानव निर्मित गैर बराबरीवाद लगातार बढ़ रहा है।
जबकि आप नारा बहुत भारी देंगे, *बाबा तेरा मिशन अधूरा......* अरे पहले जान तो लो क़ि मिशन किस चिड़िया का नाम है?
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा क़ि हमारा संघर्ष -सत्ता व संपत्ति के लिए नहीं बल्कि समता, स्वतंत्रत्ता व बंधुत्व के लिए है।
जबकि दूसरे एक साहेब कहते हैं क़ि *सत्ता वो चावी है जिससे सभी ताले खोले जा सकते हैं।*
पता नही कौन किसके खिलाफ चल रहा था?
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर कहते है क़ि मेरा संघर्ष -सत्ता के लिए है ही नहीं तो सत्ता के लिए ही संघर्ष करने वाले अम्बेडकर अनुयायी कैसे???
आप कहोगे क़ि यह तो बहुत जरूरी है।
आप ये क्यों नही समझते क़ि
जब तक गैर बराबरी की जड़ अर्थात मुद्रा व गोरखधंधे बाजी जारी है। न केवल जारी है बल्कि आप इस गोरखधंधे के पोषक हैं,
*तब तक आप समता की जंग लड भी कैसे सकते हैं?????*
जब तक इस अन्याय अत्याचार गैर बराबरीवाद के आप पोषक हैं *तब तक आप स्वतंत्रता की जंग कैसे शुरू कर सकते हैं???*
क्योंकि शरीर तो बहुत बाद मे स्वतंत्र होते है - पहले तो आपको दिमागी आज़ादी हाशिल करनी चाहिए क़ि नहीं???
*जब तक आप इस गोरखधंधे के पोषक बने हुए हैं। जब तक आप स्वयं इस गोरखधंधे मे शामिल हैं तब तक आप अन्याय व अन्यायियों के ही समर्थक बने रहेगें।* दिखावा आप कुछ भी करो। जो धोखाधड़ी के अलावा कुछ नही कहा जा सकता।
आज यही हो रहा है।
ऐसे मे जबकि भारत के संविधान की मूल प्रस्तावना ही जब हमे *समता स्वतंत्रता बंधुत्व व न्याय* की पूरी जिम्मेदारी देती है । तो हम उस जिम्मेदारी द्वारा समता स्वतंत्रता बंधुत्व व न्याय की सही मायने मे जंग क्यों नहीं शुरू करते???
क्यों हम बैसाखी तक ही स्वयं को सीमित रखते हुए देशद्रोहियों को संविधान की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट दिए हुए है???
ऐसे मे जबकि आप स्वयं खुल्लमखुल्ला संविधान विरोधी शाबित हो रहे हैं, तो आप देशभक्त कैसे कहे जा सकते हैं।
*यदि आप इस गोरखधंधे का मुखर विरोध उक्त आधार पर करते हो तो देशद्रोही कौन होगा???🤔*
बहुजन या फिरंगी?
*देश पर राज किसका होगा ?* उनका जो भारत माँ की इज्जत को विदेशियों के हाथों मे नीलाम कर रहें या उनका जो भारत माता की इज्जत अस्मिता व संप्रभुता की रक्षा मे अपने प्राणों की बाजी लगा देंने को तत्पर हो रहे हैं उनका???
पता नही आपको यह नंगी सच्चाई दिखाई क्यों नही देती।🤔
भगवान बुद्ध की संबोधी आपको प्राप्त हो।
आपका मंगलं हो।💐
स्वामी डॉ बोधीआनंद
नमो भारत भुमि
बंदे मातरम्🇮🇳
भारत माता की जय
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳
तीन रुपये कीमत की चीज को 13 रुपयों की कीमत मे ग्राहकों को बेचना *व्यवसाय* (bussiness) कहलाता है।
इस गोरख धन्धे के समर्थक अपने इस कृत्य को *विकास* (development) कहतें हैं।
जबकि जो लोग इस ठगी को आम देशवासियों के सामने उजागर करें उनको ये गोरखधंधेबाज -नक्सली कहते हैं। बल्कि जो राष्ट्रभक्त देशवासी इस अन्यायी गोरखधंधे की खुल कर हर प्रकार से खिलाफत करें उन्हें ये ठग देशद्रोही आतंकी कह कर बदनाम करते हैं।
*ऐसे मे आप स्वयं विचार करो क़ि सही कौन है?🤔*
गोरखधंधे बाज या वो देशभक्तजन जो इस गोरखधंधे के विरोधी हैं?????
बिडम्बना ये है क़ि बहुजनों मे पिछले 500 सालों से इसी गोरखधंधे मे हिस्सेदारी की जंग विभिन्न रूपों मे चल रही है।
कभी कोई इसे सामाजिक न्याय कहता है तो कभी कोई इसे आरक्षण कहता है।
काम दोनो एक ही हैं। चाहे भोलेभाले देशवासियों को गोरखधंधे द्वारा ठगना व फांसना हो या सामाजिक न्याय के नाम पर भारतवासियों मे अपनी अपनी छीना झपटी हो।
दोनो ही अन्याय का समर्थन करते है।
दोनो ही देश व देशवासी विरोधी हैं।
यही बजह है क़ि यह जंग खत्म होने की तरफ नही, बल्कि और बढ़ रही है।
जैसे जैसे यह जंग बढ़ रही है वैसे वैसे यह पराजित गरीब मजदूर किसान देशवासी तबका और बुरी हालत मे पहुंच रहा है।
कायदे मे तो असली जंग इस गोरखधंधे के खिलाफ होनी चाहिए थी।
मगर इस ठगी मे आपकी हिस्सेदारी के चलते इस व्यवस्था से शोषित लोगों के अपने ही लोग (सामाजिक न्याय या आरक्षण से पोषित लोग) पोषक बन गए हैं।
जिस व्यवस्था के समानांतर आपको दूसरी व्यवस्था खड़ी करना चाहिए थी। आप वस्तुविनिमय व सेवा विनिमय आधारित व्यवस्था के पोषक न बन कर आप स्वयं गोरखधंधे मे शामिल हो गए हो। ये कृत्य आपका डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर लिखित संविधान की प्रस्तावना के ही खिलाफ जा रहा है।
नतीजा आस्थाई गुलामी आज चिरस्थाई बनती जा रही है।
दुनियां मे ऊँच नीच- छोटा बड़ा -गरीब अमीर आदि मानव निर्मित गैर बराबरीवाद लगातार बढ़ रहा है।
जबकि आप नारा बहुत भारी देंगे, *बाबा तेरा मिशन अधूरा......* अरे पहले जान तो लो क़ि मिशन किस चिड़िया का नाम है?
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा क़ि हमारा संघर्ष -सत्ता व संपत्ति के लिए नहीं बल्कि समता, स्वतंत्रत्ता व बंधुत्व के लिए है।
जबकि दूसरे एक साहेब कहते हैं क़ि *सत्ता वो चावी है जिससे सभी ताले खोले जा सकते हैं।*
पता नही कौन किसके खिलाफ चल रहा था?
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर कहते है क़ि मेरा संघर्ष -सत्ता के लिए है ही नहीं तो सत्ता के लिए ही संघर्ष करने वाले अम्बेडकर अनुयायी कैसे???
आप कहोगे क़ि यह तो बहुत जरूरी है।
आप ये क्यों नही समझते क़ि
जब तक गैर बराबरी की जड़ अर्थात मुद्रा व गोरखधंधे बाजी जारी है। न केवल जारी है बल्कि आप इस गोरखधंधे के पोषक हैं,
*तब तक आप समता की जंग लड भी कैसे सकते हैं?????*
जब तक इस अन्याय अत्याचार गैर बराबरीवाद के आप पोषक हैं *तब तक आप स्वतंत्रता की जंग कैसे शुरू कर सकते हैं???*
क्योंकि शरीर तो बहुत बाद मे स्वतंत्र होते है - पहले तो आपको दिमागी आज़ादी हाशिल करनी चाहिए क़ि नहीं???
*जब तक आप इस गोरखधंधे के पोषक बने हुए हैं। जब तक आप स्वयं इस गोरखधंधे मे शामिल हैं तब तक आप अन्याय व अन्यायियों के ही समर्थक बने रहेगें।* दिखावा आप कुछ भी करो। जो धोखाधड़ी के अलावा कुछ नही कहा जा सकता।
आज यही हो रहा है।
ऐसे मे जबकि भारत के संविधान की मूल प्रस्तावना ही जब हमे *समता स्वतंत्रता बंधुत्व व न्याय* की पूरी जिम्मेदारी देती है । तो हम उस जिम्मेदारी द्वारा समता स्वतंत्रता बंधुत्व व न्याय की सही मायने मे जंग क्यों नहीं शुरू करते???
क्यों हम बैसाखी तक ही स्वयं को सीमित रखते हुए देशद्रोहियों को संविधान की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट दिए हुए है???
ऐसे मे जबकि आप स्वयं खुल्लमखुल्ला संविधान विरोधी शाबित हो रहे हैं, तो आप देशभक्त कैसे कहे जा सकते हैं।
*यदि आप इस गोरखधंधे का मुखर विरोध उक्त आधार पर करते हो तो देशद्रोही कौन होगा???🤔*
बहुजन या फिरंगी?
*देश पर राज किसका होगा ?* उनका जो भारत माँ की इज्जत को विदेशियों के हाथों मे नीलाम कर रहें या उनका जो भारत माता की इज्जत अस्मिता व संप्रभुता की रक्षा मे अपने प्राणों की बाजी लगा देंने को तत्पर हो रहे हैं उनका???
पता नही आपको यह नंगी सच्चाई दिखाई क्यों नही देती।🤔
भगवान बुद्ध की संबोधी आपको प्राप्त हो।
आपका मंगलं हो।💐
स्वामी डॉ बोधीआनंद
नमो भारत भुमि
बंदे मातरम्🇮🇳
भारत माता की जय
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