सर्दी मे चाय की चुस्कियों संग आप शायद सोच रहे होंगे कि आज किराने से भरे हुए लड्डू की बात होगी। शायद हम यह भी सोच रहे हों कि आज बगल वाले गुप्ता जी की दुकान मे कुछ गड़बड़ हुई है इसीलिए यह शीर्षक चुना गया है। अमुमन हम इंसान इसी प्रकार सोचते समझते हैं। पिछले एक दशक से भारत मे एक प्रेत जन्म लेता दिखाई दे रहा है। यह वह प्रेत है जो सेकडों सालों के बहुजन संघर्ष को नेशनाबूत करना चाह रहा है। हाल के दशक मे इसने विशेष जोर आजमाइश शुरू की हुई है। इसी हेतु तरह तरह की पैंतरे बाजी की जा रही। आजकल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही रास्ट्र नेता डॉ अंबेडकर सरणं गच्छामि होते देखे जा रहे हैं। अभी हाल ही मे यह बात गृह मंत्री अमित शाह के संसद मे दिये बयान से साबित हो चुकी है। इस बयान ने शीतनिद्रा मे पड़े और हाशिये पर खदेड दिये गए अंबेडकरवादी समाज मे जोश भरने का काम अवश्य किया है। इस पर आज कल आंबेडकरवादी साथियों के बड़े ही ज्ञान वर्धक बयान आ रहे हैं, कुछ साथी आँखीं मीचेते हुए कह रहे कि अमित शाह ने डॉ अंबेडकर का अपमान किया। भरी संसद मे अंबेडकर - अंबेडकर बोला। ...