*शिक्षा, शेरनी का दूध और दहाड़ मारती भीगी बिल्ली (sc st obc)- म्याऊँ।*
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*डॉ बाबासाहेब आंबेडकर कहते हैं कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो भी इसे पिएगा वह दहाड़ेगा।*
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सिलेबस निर्धारित करने का अधिकार बहुजन विरोधियों के हाथ में है। जब लगभग सारे स्कूल कालेज बहुजन विरोधियों के है, तो वह आपको सही शिक्षा देकर मुड़ कटवाने का इंतजाम क्यों करेंगे????????🤔🤔🤯
क्या कोई पंडा पुजारी पागल है, जो आपको असली शिक्षा देकर अपनी जान आफत में डालेगा?????
इसका दूसरा पहलू यह भी है कि शिक्षा के नाम पर आपको जो भी पढ़ाया गया। आपने जो भी रट्टा लगाया।
आपने जो कुछ भी आईएएस-आईपीएस कर्मचारी आदि बनने के लिए पढ़ा पढ़ाया, वह केवल आपके ब्रेन की प्रोपर कंडीशनिंग हुई या नहीं हुई। यह परीक्षा द्वारा जांच परख कर ही आप जहां जिस जगह हैं, पर बैठाया गया है।
इसका यह मतलब है कि हमारे जो भी साथी अधिकारी कर्मचारी बाबू चपरासी इत्यादि हैं।
सब के सब मस्तिष्क नियंत्रित "पशु" मात्र है।
यही कारण है कि पिछले 5000 सालों से चला आ रहा धर्म युद्ध बहुजनों की हार और विरोधियों की विजय का सूचक रहा है।
ऐसे में आपको यदि विजय प्राप्त करनी है तो इस पढ़ाई-लिखाई रुपी मस्तिष्क नियंत्रण रूपी व्यवस्था से बाहर निकलना ही होगा।
आपको स्वयं की डीप्रोग्रामिंग करनी ही होगी।
बिना यह डी प्रोग्रामिंग किए आपको कुछ भी समझ में आने वाला नहीं है।
पढ़ लिख कर ज्यादा सत्यानाश हुआ।
बिना पढ़े लिखे रहते तो चीजें ज्यादा समझ में आती।
यही कारण है कि सतगुरु रविदास जी महाराज सदगुरु कबीर साहब जी महाराज आदि को जो बातें बिना पढ़े लिखे ही समझ में आ रही थी आज बहुत ज्यादा पढ़े लिखे लोगों को भी समझ में नहीं आती।
मगर कंमबख्त कौन है जो बाहर निकलना चाहे???
आप अपने दुश्मन स्वयं हैं कोई दूसरा नहीं।
सफल होना और बुद्धिमान होना दोनों ही अलग-अलग बातें हैं।
इसलिए इस धोखे में मत रहिए कि अमुक बात किसी प्रोफेसर डॉक्टर इंजीनियर वकील अधिकारी कर्मचारी आदि (म्याऊँ....) ने कही है तो सही ही होगी।
ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं है बल्कि जितना बड़ा अधिकारी कर्मचारी वह उतना ही ज्यादा कुटिल और कपटी भी हो सकता है?
हां आपकी डीप्रोग्रामिंग के लिए मैं मदद करने को तैयार हूं।
जय बाबा साहब जय बुद्ध बिहारी
जय जय भारत भूमि 🇮🇳
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