किसी परीक्षा में पास होना या ज्यादा नम्बरो से क्वालीफाई करना या select होना किसी व्यक्ति की अच्छी गुणवत्ता या बौध्दिक क्षमता का सूचक नही बल्कि बुद्धि नियंत्रित होने की सूचक है।
इसके बावजूद यदि कोई सेलेक्ट होकर, पास होकर या स्थान पाकर खुस हो तो समझना चाहिए कि अमुक व्यक्ति कि बुद्धि पूरी तरह व्यवस्था चलाने वालों के नियंत्रण में जा चुकी है।
ऐसे व्यक्ति व्यवस्था चलाने वालों के लिए वरदान साबित होते हैं। अर्थात जो जितना ज्यादा बुद्धि नियंत्रित वह उतना ही ज्यादा बड़ा ओहदेदार।
विडम्बना ये कि नासमझ लोग अनजान व्यक्ति को उसकी गुणवत्ता देख कर नही बल्कि ओहदा देख कर अच्छा या बुरा मानते हैं।
यह है पिछड़ी या दलित बुद्धि की पहचान।
यही कारण है कि जो लोग शिक्षा के नाम कभी कान में एक शब्द चला जाने से शीशा पिघलाकर डालने की राजाज्ञा जारी किए थे वही लोग आज शिक्षा दाता विद्यालय विश्विद्यालय आदि खोले बैठे हैं।
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर कहते ही रह गए कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह गुर्राएगा।
मगर मनुमानुषों ने अछूत पिछडो के शिक्षा के प्रति बढ़ते हुए रुझान को देखते हुए शिक्षा रूपी शेरनी को ही कुतिया बना दिया। अब पियो दूध....का
इसलिए ऐसी शिक्षा प्राप्त लोग गुर्रा नही सकते बल्कि भौंक सकते हैं। जो आजकल खूब देखा जा रहा है।
इसी कारण मनुमानुष हजारों सालों से पिछडे अछूतों पर राज कर रहे हैं।
चूंकि अभी दलित बुद्धि जीव अपनी दीन बुद्धि नियंत्रण होने पर खुस हो रहे, इसलिए अभी यह दलित पन या पिछड़ापन हजारो साल और चलेगा।
जय भारत भूमि🇮🇳
इसके बावजूद यदि कोई सेलेक्ट होकर, पास होकर या स्थान पाकर खुस हो तो समझना चाहिए कि अमुक व्यक्ति कि बुद्धि पूरी तरह व्यवस्था चलाने वालों के नियंत्रण में जा चुकी है।
ऐसे व्यक्ति व्यवस्था चलाने वालों के लिए वरदान साबित होते हैं। अर्थात जो जितना ज्यादा बुद्धि नियंत्रित वह उतना ही ज्यादा बड़ा ओहदेदार।
विडम्बना ये कि नासमझ लोग अनजान व्यक्ति को उसकी गुणवत्ता देख कर नही बल्कि ओहदा देख कर अच्छा या बुरा मानते हैं।
यह है पिछड़ी या दलित बुद्धि की पहचान।
यही कारण है कि जो लोग शिक्षा के नाम कभी कान में एक शब्द चला जाने से शीशा पिघलाकर डालने की राजाज्ञा जारी किए थे वही लोग आज शिक्षा दाता विद्यालय विश्विद्यालय आदि खोले बैठे हैं।
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर कहते ही रह गए कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह गुर्राएगा।
मगर मनुमानुषों ने अछूत पिछडो के शिक्षा के प्रति बढ़ते हुए रुझान को देखते हुए शिक्षा रूपी शेरनी को ही कुतिया बना दिया। अब पियो दूध....का
इसलिए ऐसी शिक्षा प्राप्त लोग गुर्रा नही सकते बल्कि भौंक सकते हैं। जो आजकल खूब देखा जा रहा है।
इसी कारण मनुमानुष हजारों सालों से पिछडे अछूतों पर राज कर रहे हैं।
चूंकि अभी दलित बुद्धि जीव अपनी दीन बुद्धि नियंत्रण होने पर खुस हो रहे, इसलिए अभी यह दलित पन या पिछड़ापन हजारो साल और चलेगा।
जय भारत भूमि🇮🇳
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