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सशस्त्र पुलिस और आम जनता के स्वतंत्रता का खात्मा।

*सशस्त्र पुलिस और आम जनता के स्वतंत्रता का खात्मा।*
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 पिछले दिनों तमिलनाडु के टूटिकोरिन  कन्याकुमारी आदि स्थानों पर पुलिस और आम जनता के बीच एक कॉपर प्लांट की स्थापना के विरोध में प्रदर्शन हुए थे।
 उन झंडपो में आम नागरिकों ने उद्योगपति के कॉपर प्लांट की स्थापना का विरोध किया था। जिसके लिए सरकार के इशारे पर सशस्त्र पुलिस वालों ने लगभग 13 देशवासियों की नृशंस हत्या कर दी है।
 यह वतन पर रक्षा में शहीद हुए 13 देशवासी कौन थे ??

इन को मारने वाले पुलिस वाले, इन पुलिस वालों को पीछे से आदेश देने वाले कौन हैं???

क्या पुलिस वालों के हाथों में थ्री नॉट थ्री राइफल व डंडे की जगह स्वचालित एक के 56 जैसे हथियार थमा देने से आम जनता सुरक्षित हो रही है या उसे असुरक्षा की भावना में जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है???
ताकि भुतही शांति स्थापित की जा सके।

आखिर यह सुरक्षाबलों के हाथ में इतनी ज्यादा शक्तियां क्यों दी जा रही है ???

क्या आम नागरिक आतंकवादी हैं?

क्या लोकतंत्र में अपनी जल-जंगल-जमीन की रक्षा करना देशद्रोह है ?

क्या उद्योगपतियों के लिए आम जनता की जमीन को अधिग्रहण करना देश प्रेम है???

आखिर यह सरकारें किसके लिए काम कर रही है आम जनता के लिए या उद्योगपतियों के लिए?????

 देशवासियों का हत्या कब तक चलती रहेगी?

क्या सुरक्षा बलों के हाथों में डंडा के अतिरिक्त किसी भी हथियार की जरूरत है???

 अगर आप लोग नहीं जागे तो पुलिस वाले इन्हीं स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल एक दिन आप के खिलाफ भी करेंगे। जरा आँख उठाकर देखो आपने शहर के आसपास रिंग रोड किस लिये बनाया गया है।
मेरे देश प्रेमियों मिट्टी से प्रेम करो देशवासियों।।।🇮🇳
भवतु सब्ब मंगलं💐
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