*प्रत्येक व्यक्ति को वयस्क मताधिकार और उनका जायज विकास-कितना जरूरी?*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
भारत की लगभग 130 करोड़ आबादी में प्रायः यह देखा गया है कि ज्यादातर इंसानों में स्वयं या खुद के परिवार के लिए रोटी, कपड़ा, मकान व इन्द्रिय अवश्यकताओं की आपूर्ति की जद्दोजहद के अलावा देश, समाज, दुनिया आदि की कोई समझ सोच नहीं होती है।
ऐसे में इस तरह के इन्शान रूपी कीडे मकोडो से लोकतंत्र के नाम पर वोट के अधिकार द्वारा सम्पूर्ण देश के भविष्य का निर्णय करने का अधिकार देना जायज कैसे माना जा सकता है?????
ऐसे में उक्त प्रकार के इन्शान दारू, रुपये, तोड़ियाँ , विछियां, थाली, गिलास आदि के लालच में देश, समाज व संवैधानिक व्यवस्था का सत्यानाश नहीं करेंगे तो क्या करेंगे?????
ऐसे में जबकि ज्यादातर लोग स्वयं की इक्षाओं की आपूर्ति हेतु ही वोट देते हो, वे लोकतंत्र के समर्थन बनेंगे या राज तंत्र के?????
आजकल एक नाटक आ रहा है जिसका शीर्षक है "प्रजा ही रहने दो"। इस शीर्षक से बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत के भविष्य की व्यवस्था लोकतांत्रिक होगी या राजतंत्रिक???
यही नाटकप्रेमी खब्बूस सबकी बाट लगाएंगे तुम देखते रहियो।
यही खब्बूस दनादन जनसंख्या बढ़ाने में लगे है। यदि इनके प्रजजन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो देश मे अपंग, मंदबुद्धि विछिप्त इंसानो की बाढ़ आ जायेगी जो समझदार व बुद्धिवानो का बजूद खत्म कर सकते है।
इसलिए सबका टीकाकरण अवश्य कराएं।
सबको अनिवार्य मतदान कराएं।
सबको स्वस्थ रखने हेतु इलाज व अस्पताल जरूर खोलें।
इन सबके विकास के लिए बिजली सड़क व RO पानी की व्यवस्था अवश्य करें।
सभी को शिक्षित अवश्य करें।
सबको स्कूल जरूर भेंजें।
पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया😊
सबको सस्ते मल्टीस्टोरी मकान जरूर उपलब्ध कराएं।
सभी को सिमकार्ड व एंड्राइड फोन जरूर उपलब्ध कराएं।
सभी को भरपेट भोजन के लिए फसलों का उत्पादन मानवनिर्मित रसायन द्वारा जरूर बढ़ाएं।
उत्पादन बढ़ाने हेतु अनुवांशिक रूप से संवर्धित प्रजातियों को खूब बढ़ावा दें।।।
दीन दुखियों के बीच बजरंगबली का महिमामंडन अवश्य करें ।
भक्तों को राधा कृष्ण की जगह जगह रासलीला अवश्य दिखाएं सुनाएं।
सबका साथ सबका विकास।
जय भारत भूमि🇮🇳
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🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
भारत की लगभग 130 करोड़ आबादी में प्रायः यह देखा गया है कि ज्यादातर इंसानों में स्वयं या खुद के परिवार के लिए रोटी, कपड़ा, मकान व इन्द्रिय अवश्यकताओं की आपूर्ति की जद्दोजहद के अलावा देश, समाज, दुनिया आदि की कोई समझ सोच नहीं होती है।
ऐसे में इस तरह के इन्शान रूपी कीडे मकोडो से लोकतंत्र के नाम पर वोट के अधिकार द्वारा सम्पूर्ण देश के भविष्य का निर्णय करने का अधिकार देना जायज कैसे माना जा सकता है?????
ऐसे में उक्त प्रकार के इन्शान दारू, रुपये, तोड़ियाँ , विछियां, थाली, गिलास आदि के लालच में देश, समाज व संवैधानिक व्यवस्था का सत्यानाश नहीं करेंगे तो क्या करेंगे?????
ऐसे में जबकि ज्यादातर लोग स्वयं की इक्षाओं की आपूर्ति हेतु ही वोट देते हो, वे लोकतंत्र के समर्थन बनेंगे या राज तंत्र के?????
आजकल एक नाटक आ रहा है जिसका शीर्षक है "प्रजा ही रहने दो"। इस शीर्षक से बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत के भविष्य की व्यवस्था लोकतांत्रिक होगी या राजतंत्रिक???
यही नाटकप्रेमी खब्बूस सबकी बाट लगाएंगे तुम देखते रहियो।
यही खब्बूस दनादन जनसंख्या बढ़ाने में लगे है। यदि इनके प्रजजन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो देश मे अपंग, मंदबुद्धि विछिप्त इंसानो की बाढ़ आ जायेगी जो समझदार व बुद्धिवानो का बजूद खत्म कर सकते है।
इसलिए सबका टीकाकरण अवश्य कराएं।
सबको अनिवार्य मतदान कराएं।
सबको स्वस्थ रखने हेतु इलाज व अस्पताल जरूर खोलें।
इन सबके विकास के लिए बिजली सड़क व RO पानी की व्यवस्था अवश्य करें।
सभी को शिक्षित अवश्य करें।
सबको स्कूल जरूर भेंजें।
पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया😊
सबको सस्ते मल्टीस्टोरी मकान जरूर उपलब्ध कराएं।
सभी को सिमकार्ड व एंड्राइड फोन जरूर उपलब्ध कराएं।
सभी को भरपेट भोजन के लिए फसलों का उत्पादन मानवनिर्मित रसायन द्वारा जरूर बढ़ाएं।
उत्पादन बढ़ाने हेतु अनुवांशिक रूप से संवर्धित प्रजातियों को खूब बढ़ावा दें।।।
दीन दुखियों के बीच बजरंगबली का महिमामंडन अवश्य करें ।
भक्तों को राधा कृष्ण की जगह जगह रासलीला अवश्य दिखाएं सुनाएं।
सबका साथ सबका विकास।
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