*बहुजन जातिवाद, ब्राह्मणवाद व संविधान द्रोह के पनपने के लिए जरूरी खाद पानी।*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को पितामहः मानने वाले नोबल पुरस्कार विजेता डॉ अमर्त्यसेन जी ने कहा है कि जाति व जातिव्यवस्था राष्ट्रद्रोही व्यवस्था है।
हालांकि बहुजन जातिवाद ने वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे गिन रहे समाज को फौरी राहत जरूर दी।
मगर इस कारण बहुजन समाज के लोगों का जितना नुकसान बहुजन जातिवाद ने किया उतना *भीषण* नुकसान स्वयं ब्राह्मणवाद (जाति व जातिनिर्माता) ने भी नहीं किया।
क्योंकि जाति जो बहुजनों की प्रमुख समस्या थी उसको बहुजन जातिवाद ने कभी न खत्म होने वाली अमरबेल बना कर ब्राह्मण धर्म को संभावित नुकशान से बचा लिया।
इस जातिवाद ने पंडे पुजारियों के वर्चस्व निर्माण के लिए status quo की स्थिति निर्मित कर बहुजनों को चारो तरफ से घेरकर मारने के लिए पंडे पुजारी वर्ग को पर्याप्त समय उपलब्ध कराया।
इस बहुजन जातिवाद ने बुद्धवाद की जड़ो में मठ्ठा डाल कर कभी पनपने नहीं दिया।
इस बहुजन जातिवाद ने बहुजनो के अंदर अधर्म व सुरीय प्रवत्तियों के निर्माण में विशेष योगदान दिया।
इस जातिवाद ने बहुजन समाज के लोगों मे शील सदाचार नैतिकता को नष्ट कर लम्पट, ठग, नशाखोर, कामी क्रोधी लालची लोगों की फौज खड़ी कर ब्राह्मणवाद को पनपने के लिए जरूरी खाद पानी उपलब्ध कराया जिससे ब्राह्मणवाद की फसल लहलहाई।
जिसका नतीजा आज यह हुआ की सत्ता व व्यवस्था के प्रत्येक सोपान पर पंडे पुजारीयों व ब्राम्हणवादियों का अनियंत्रित कब्जा हो चुका है।
यही कारण है कि देश का संविधान खतरे में है।
यही कारण है कि भारत लोकतंत्र देश से राजतंत्रिक देश की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
*यही कारण है कि देश के चार चार जाने माने जज अपनी नौकरी दांव पर लगा कर देशवासियों को आगाह करते हैं कि देश का संविधान व लोकतंत्र खतरे में है मगर बहुजन जातिवादी हमेशा देश व संविधान की सुरक्षा की जगह जातिगत सुविधाओं के लिए चिंतित रहते हैं चाहे देश का संविधान भले ही खत्म कर दिया जाए।
आज भी संविधान की शपथ खाकर पद व गोपानीयता की शपथ को झुठलाकर मनुस्मृति राज का आह्वान करने वालों को *"देशद्रोही"* कोई नही कहता। क्यों?
इसलिए क्योंकि बहुजनों ने अपना चिंतन जाति व जातिवाद तक सीमित कर रखा है।
इन सबका उपाय स्वयं के आचरण द्वारा की जा रही गड़बड़ियों में सुधार कर शील सदाचार व नैतिकता पूर्ण जीवन जीना प्रारम्भ करना व कराना होगा।
जिसमें सारी समस्याओं का निदान खुद व खुद हो जाएगा। हालांकि देश की 130 करोड़ आबादी में इन गुणों का निर्माण में समय तो लगेगा। मगर यह काम ज्यादा वर्कफोर्स होने के कारण बहुत त्वरित ठंग से किया जा सकता है।
इससे आज के राजा कल के रंक होंगें वहीं आज के रंक कल के राजा होने से कोई रोक नहीं सकता।
अब कोई यदि कहे कि आप ब्राह्मणों को दोषी क्यों नहीं ठहराते? तो ऐसे लोगों से केवल इतना ही कहना है कि हमारी समस्या ब्राह्मण नहीँ बल्कि उनके द्वारा आपके अंदर आचरण में डाली गई अनैतिकता, ठगी, लुच्चपन, नशाखोरी, कामुकता, झूँठ, लालच व तृष्णा है कोई ब्राह्मण नहीं।
जिसे ठीक कर लेने से बिना एक बूंद खून बहे व बहाये गुलाबी क्रांति की जा सकती है। मगर पसीना AC व कूलर में सुखाने की बजाय बहाना तो पड़ेगा ही।
बाकी इच्छा आपकी।
भवतु सब्ब मंगलं
जय भारत भूमि🇮🇳
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🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को पितामहः मानने वाले नोबल पुरस्कार विजेता डॉ अमर्त्यसेन जी ने कहा है कि जाति व जातिव्यवस्था राष्ट्रद्रोही व्यवस्था है।
हालांकि बहुजन जातिवाद ने वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे गिन रहे समाज को फौरी राहत जरूर दी।
मगर इस कारण बहुजन समाज के लोगों का जितना नुकसान बहुजन जातिवाद ने किया उतना *भीषण* नुकसान स्वयं ब्राह्मणवाद (जाति व जातिनिर्माता) ने भी नहीं किया।
क्योंकि जाति जो बहुजनों की प्रमुख समस्या थी उसको बहुजन जातिवाद ने कभी न खत्म होने वाली अमरबेल बना कर ब्राह्मण धर्म को संभावित नुकशान से बचा लिया।
इस जातिवाद ने पंडे पुजारियों के वर्चस्व निर्माण के लिए status quo की स्थिति निर्मित कर बहुजनों को चारो तरफ से घेरकर मारने के लिए पंडे पुजारी वर्ग को पर्याप्त समय उपलब्ध कराया।
इस बहुजन जातिवाद ने बुद्धवाद की जड़ो में मठ्ठा डाल कर कभी पनपने नहीं दिया।
इस बहुजन जातिवाद ने बहुजनो के अंदर अधर्म व सुरीय प्रवत्तियों के निर्माण में विशेष योगदान दिया।
इस जातिवाद ने बहुजन समाज के लोगों मे शील सदाचार नैतिकता को नष्ट कर लम्पट, ठग, नशाखोर, कामी क्रोधी लालची लोगों की फौज खड़ी कर ब्राह्मणवाद को पनपने के लिए जरूरी खाद पानी उपलब्ध कराया जिससे ब्राह्मणवाद की फसल लहलहाई।
जिसका नतीजा आज यह हुआ की सत्ता व व्यवस्था के प्रत्येक सोपान पर पंडे पुजारीयों व ब्राम्हणवादियों का अनियंत्रित कब्जा हो चुका है।
यही कारण है कि देश का संविधान खतरे में है।
यही कारण है कि भारत लोकतंत्र देश से राजतंत्रिक देश की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
*यही कारण है कि देश के चार चार जाने माने जज अपनी नौकरी दांव पर लगा कर देशवासियों को आगाह करते हैं कि देश का संविधान व लोकतंत्र खतरे में है मगर बहुजन जातिवादी हमेशा देश व संविधान की सुरक्षा की जगह जातिगत सुविधाओं के लिए चिंतित रहते हैं चाहे देश का संविधान भले ही खत्म कर दिया जाए।
आज भी संविधान की शपथ खाकर पद व गोपानीयता की शपथ को झुठलाकर मनुस्मृति राज का आह्वान करने वालों को *"देशद्रोही"* कोई नही कहता। क्यों?
इसलिए क्योंकि बहुजनों ने अपना चिंतन जाति व जातिवाद तक सीमित कर रखा है।
इन सबका उपाय स्वयं के आचरण द्वारा की जा रही गड़बड़ियों में सुधार कर शील सदाचार व नैतिकता पूर्ण जीवन जीना प्रारम्भ करना व कराना होगा।
जिसमें सारी समस्याओं का निदान खुद व खुद हो जाएगा। हालांकि देश की 130 करोड़ आबादी में इन गुणों का निर्माण में समय तो लगेगा। मगर यह काम ज्यादा वर्कफोर्स होने के कारण बहुत त्वरित ठंग से किया जा सकता है।
इससे आज के राजा कल के रंक होंगें वहीं आज के रंक कल के राजा होने से कोई रोक नहीं सकता।
अब कोई यदि कहे कि आप ब्राह्मणों को दोषी क्यों नहीं ठहराते? तो ऐसे लोगों से केवल इतना ही कहना है कि हमारी समस्या ब्राह्मण नहीँ बल्कि उनके द्वारा आपके अंदर आचरण में डाली गई अनैतिकता, ठगी, लुच्चपन, नशाखोरी, कामुकता, झूँठ, लालच व तृष्णा है कोई ब्राह्मण नहीं।
जिसे ठीक कर लेने से बिना एक बूंद खून बहे व बहाये गुलाबी क्रांति की जा सकती है। मगर पसीना AC व कूलर में सुखाने की बजाय बहाना तो पड़ेगा ही।
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भवतु सब्ब मंगलं
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