*स्कूल चलो अभियान: शिक्षित बनो.... विद्या बिना मति गयी और संघियों की संस्कारशाला।,*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
स्त्री शूद्रों नाधीयताम अपौरुषेय वाणी रच कर स्त्रियों और शूद्रों अर्थात सभी पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले मनुमानुष अचानक स्कूल चलो अभियान के समर्थन कैसे और क्यों बन गए????
स्त्रियों और शुद्र अर्थात पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले पंडे पुजारी अचानक अधम से अधम अति नारी को स्कूल चलो अभियान की शिक्षिका क्यों बनाने लगे?????🤔🤔
इस दरम्यान आखिर हुआ क्या , जिसकी वजह से इन पंडे पुजारियों का हृदय परिवर्तन हो गया और जो लोग स्त्रियों और शूद्रों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा रहे थे अचानक वह बड़े-बड़े विद्यालय और विश्वविद्यालयों के मालिक बनकर शिक्षा देने के सबसे बड़े ठेकेदार कैसे और क्यों बन गए है?????🤔🤔🤔
कोई जवाब आपके पास??🤔🤔
अगर आप डॉक्टर अंबेडकर के चमचे हैं तो आप तुरंत ही इस बड़े परिवर्तन का श्रेय संविधान और संवैधानिक व्यवस्था को देने से बाज ना आएंगे।
जबकि संविधान संरक्षण दो राष्ट्रीयकृत शिक्षा के लिए जरूरी था।
मगर आज निजी क्षेत्र की शिक्षा जो लगभग सौ प्रतिशत पंडे पुजारियों के कब्जे में है।
वे अचानक जिनके लिए शब्द ज्ञान पाप था उनको ही शिक्षा देने वाले शिक्षा दानी कैसे बन गए ???🤔🤔
आखिर वह कौन सी वजह हुई, जिस कारण संघियों ने सभी शिक्षा संस्थाओं में नैतिक शिक्षा के नाम पर संस्कारशाला चला रखी हैं।
हमारे महापुरुष तो कहते हैं कि विद्या विना मती गई मगर यहां तो देख रहे हैं विद्या के कारण लोग कुमति हो रहे हैं।
जबकि संत कबीर सदगुरू रविदास जी आदि निरक्षर थे मगर ज्यादातर आईएएस IPS आदि से ज्यादा समझदार थे।
अगर आपको इस बात पर विश्वास नहीं होता तो जरा एक तर्क लगाइए जरा, जो लोग शिक्षा देने से हमेशा के लिए नारी और शूद्रों को कतराते रहे वे आज अपना मुड़ कटवाने की व्यवस्था आपको/हमको शिक्षित करके क्यों करने लगे???🤔🤔
डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर तो कहते हैं कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वह गुर्रायेगा।
आखिर इस शिक्षा रूपी शेरनी का दूध पंडे पुजारी अपने ही विरोधी अर्थात पिछड़ी जातियों अनुसूचित जातियों आदिवासियों और स्त्रियों को क्यों पिलाने लगे???
क्या कोई अपने आप को डसने वाले सांपो को दूध पिलाता है????
यदि नहीं तो आखिर पंडे पुजारी लोग अनुसूचित जातियों पिछड़ी जातियों आदिवासियों महिलाओं आदि को क्यो शिक्षा रूपी दूध पिलाने लगे??
क्या अब उनके मन का वह डर निकल गया जिस कारण वे शिक्षा देने से सदियों से वंचित रखे थे???
अगर वह डर निकल गया तो वह डर क्यों निकल गया???
अभी ये सब निडर कैसे हो गए??
इसका मतलब जो आप शिक्षा लेने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। वह शिक्षा नहीं बल्कि आपके आर्थिक निशस्त्रीकरण और मस्तिष्क नियंत्रण का औजार बना दिया गया है।
यही कारण है कि जो जितना ज्यादा शिक्षित है वह उतना ही बड़ा लंपट, ठग और धोखेबाज।
अर्थात ऐसे लोग समस्या तो कुछ और होती है लेकिन बकलोली कुछ और करते है।
बाकी आप अपनी बुद्धि लगा ले और बैग लेकर स्कूल चलें।
ऐसी महान मानव प्रजाति कहीं और नहीं मिलेगी यह केवल भारत भूमि में ही मिल सकती है।
इसलिए अब भले ही आधी रोटी खाओ मगर अपना मन मस्तिष्क नियंत्रण कराने के लिए संघियों कांग्रेसियो की संस्कारशाला में जरूर जाओ।
इसीलिए तो सब सत्यानाश हो रहा है।
जय भारत भूमि🇮🇳
भवतु सब्ब मंगलम्
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स्त्री शूद्रों नाधीयताम अपौरुषेय वाणी रच कर स्त्रियों और शूद्रों अर्थात सभी पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले मनुमानुष अचानक स्कूल चलो अभियान के समर्थन कैसे और क्यों बन गए????
स्त्रियों और शुद्र अर्थात पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने वाले पंडे पुजारी अचानक अधम से अधम अति नारी को स्कूल चलो अभियान की शिक्षिका क्यों बनाने लगे?????🤔🤔
इस दरम्यान आखिर हुआ क्या , जिसकी वजह से इन पंडे पुजारियों का हृदय परिवर्तन हो गया और जो लोग स्त्रियों और शूद्रों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा रहे थे अचानक वह बड़े-बड़े विद्यालय और विश्वविद्यालयों के मालिक बनकर शिक्षा देने के सबसे बड़े ठेकेदार कैसे और क्यों बन गए है?????🤔🤔🤔
कोई जवाब आपके पास??🤔🤔
अगर आप डॉक्टर अंबेडकर के चमचे हैं तो आप तुरंत ही इस बड़े परिवर्तन का श्रेय संविधान और संवैधानिक व्यवस्था को देने से बाज ना आएंगे।
जबकि संविधान संरक्षण दो राष्ट्रीयकृत शिक्षा के लिए जरूरी था।
मगर आज निजी क्षेत्र की शिक्षा जो लगभग सौ प्रतिशत पंडे पुजारियों के कब्जे में है।
वे अचानक जिनके लिए शब्द ज्ञान पाप था उनको ही शिक्षा देने वाले शिक्षा दानी कैसे बन गए ???🤔🤔
आखिर वह कौन सी वजह हुई, जिस कारण संघियों ने सभी शिक्षा संस्थाओं में नैतिक शिक्षा के नाम पर संस्कारशाला चला रखी हैं।
हमारे महापुरुष तो कहते हैं कि विद्या विना मती गई मगर यहां तो देख रहे हैं विद्या के कारण लोग कुमति हो रहे हैं।
जबकि संत कबीर सदगुरू रविदास जी आदि निरक्षर थे मगर ज्यादातर आईएएस IPS आदि से ज्यादा समझदार थे।
अगर आपको इस बात पर विश्वास नहीं होता तो जरा एक तर्क लगाइए जरा, जो लोग शिक्षा देने से हमेशा के लिए नारी और शूद्रों को कतराते रहे वे आज अपना मुड़ कटवाने की व्यवस्था आपको/हमको शिक्षित करके क्यों करने लगे???🤔🤔
डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर तो कहते हैं कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वह गुर्रायेगा।
आखिर इस शिक्षा रूपी शेरनी का दूध पंडे पुजारी अपने ही विरोधी अर्थात पिछड़ी जातियों अनुसूचित जातियों आदिवासियों और स्त्रियों को क्यों पिलाने लगे???
क्या कोई अपने आप को डसने वाले सांपो को दूध पिलाता है????
यदि नहीं तो आखिर पंडे पुजारी लोग अनुसूचित जातियों पिछड़ी जातियों आदिवासियों महिलाओं आदि को क्यो शिक्षा रूपी दूध पिलाने लगे??
क्या अब उनके मन का वह डर निकल गया जिस कारण वे शिक्षा देने से सदियों से वंचित रखे थे???
अगर वह डर निकल गया तो वह डर क्यों निकल गया???
अभी ये सब निडर कैसे हो गए??
इसका मतलब जो आप शिक्षा लेने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। वह शिक्षा नहीं बल्कि आपके आर्थिक निशस्त्रीकरण और मस्तिष्क नियंत्रण का औजार बना दिया गया है।
यही कारण है कि जो जितना ज्यादा शिक्षित है वह उतना ही बड़ा लंपट, ठग और धोखेबाज।
अर्थात ऐसे लोग समस्या तो कुछ और होती है लेकिन बकलोली कुछ और करते है।
बाकी आप अपनी बुद्धि लगा ले और बैग लेकर स्कूल चलें।
ऐसी महान मानव प्रजाति कहीं और नहीं मिलेगी यह केवल भारत भूमि में ही मिल सकती है।
इसलिए अब भले ही आधी रोटी खाओ मगर अपना मन मस्तिष्क नियंत्रण कराने के लिए संघियों कांग्रेसियो की संस्कारशाला में जरूर जाओ।
इसीलिए तो सब सत्यानाश हो रहा है।
जय भारत भूमि🇮🇳
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