पदोन्नति में आरक्षण अ जा / अ जनजाति के लोगों को बेवकूफ बनाने वाला आदेश है।
हलांकि पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश में पदोन्नति में आरक्षण को नहीं छेड़ा था बल्कि राज्य सरकार की आरक्षण नियमावली की धारा 3(7) व नियम 8(क) को ही अल्ट्रावायरस बताया था। परन्तु सवर्ण व अजा/जन जाति के दोनों ही नेताओं ने समाज को गुमराह किया और पूरे जोरशोर से प्रचारित किया कि पदोन्नति में आरक्षण समाप्त हो गया है। जिसका नतीजा यह रहा कि इस बीच जो भी पदोन्नतियां की गई उनमें अ जा / जनजाति के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने से वंचित कर दी गई तथा अजा जनजाति के कार्मिकों.की यह धारणा बनी की अब तो पदोन्नति में आरक्षण का नियम नहीं है, इसलिए उसके लिए संघर्ष करना व्यर्थ है। वहीं पर कुछ जागरूक कार्मिक अपनी लड़ाई को जारी रखा, जिसका नतीजा, भले ही 2019 के चुनाव के मद्देनजर लिया गया हो, पदोन्नति में आरक्षण का भ्रामक आदेश जारी किया गया।
अभी हाल के सुप्रीम कोर्ट की सलाह, जिसमें कहा गया कि" सरकार चाहे तो आरक्षण दे सकती है, परन्तु निर्णय कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर होगा" जोकि बड़ा ही हास्यास्पद और अजा/जनजाति के कार्मिकों को गुमराह करने वाला निर्देश है। यह आदेश सरकार और कोर्ट की मिलीभगत का परिणाम है, जो 2019 के चुनावों को प्रभावित करने के लिए और अजा /जनजाति के कार्मिकों को बेवकूफ बनाने व आपसी फूट डालने के उद्देश्य से लिया गया है।
अगर सरकार और कोर्ट वास्तव में पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देना चाहती हैं तो हमारी निम्नलिखित मांग के अनुसार आरक्षण व्यवस्था लागू करे।
1- एम नागराज के केश में दी गई व्यवस्था को समाप्त करने व आरक्षण की व्यवस्था को सुदृढ बनाने के लिए संविधान संसोधन करे और आरक्षण विषय को अनुसूची- 9 में शामिल करे।
2- पिछड़े वर्ग को भी पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दे,उसे भी संविधान संसोधन कर अनुसूची-9 में शामिल करें।
3- पदोन्नति में आरक्षण के नियम का पालन न करने वाले कार्मिक व सरकार के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की व्यवस्था की जाये।
4- पूर्व में जिन कार्मिकों को डिमोट किया गया उन्हें ससम्मान पुनः बहाल किया जाये।
5- इस बीच किये गये प्रमोशन को निरस्त कर पुनः, आरक्षण के नियम का पालन करते हुए, पदोन्नतियां.की जाये।
6- एम नागराज के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्देशों को निष्प्रभावी किया जाये।
7- सरकार द्वारा इंट्री लेवल पर आरक्षित पदो की गणना "मंत्रालय या विश्वविद्यालय" को इकाई मान कर की जाय न कि विभाग को ताकि लोक अनुपात में सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
8- 200 पॉइंट का रोस्टर पूर्व की भांति लागू किया जाये।
9- सरकार द्वारा अपनाई जा रही उदारीकरण,निजीकरण व वैश्वीकरण की नीति को त्याग कर राष्ट्रीयकरण की नीति अपनाई जाये।
10- भारत की संयुक्त राष्ट्र संघ व कॉमनवेल्थ राष्ट्र समूह से सदस्यता वापस लेकर भारत की एकता अखंडता व संप्रभुता को अक्षुण बनाया जाए।
उपरोक्त बिंदुओं को ध्यान में रखकर सभी संगठनों को आगे आना चाहिए और अपनी मांग रखना चाहिए।
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