*फूल आहिस्ता फेंको.... फूल बडे नाजुक... कमल आसन छोड़ .. वर दे वीणा वादिनी।*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
वर्षात की शुरुआत हो चुकी थी। हल्की हल्की बदली आ जा रही थी। इसी सुहावने मौषम में सुबह टहलने वालों का तांता लगा हुआ था। आसमान में सूर्य व बादलो के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा था। जिसमे कभी सूर्य महाराज विजय पा रहे थे तो कभी बादल। इसी दौरान नर्म सुहावनी हवाएं सूरज से बादलों को इस प्रकार हटा रही थी कि जैसे कोई पिया अपनी प्रियतमा का घूंघट उठा रहा हो और शर्मीली दुल्हन अपने प्रियवर का दीदार करके जैसे लजा कर पुनः घूंघट निकाल लेती है। ठीक यही काम नरम सुहावनी हवाएं भी बादलों के साथ कर रहीं थीं। यही आंख मिचौली चल ही रही थी कि तभी एक मंदिर में बज रहे लाउडस्पीकर से एक आवाज आई, जिसे सुनकर कई राह चलती स्त्रियां मन्त्र मुग्ध हुई जा रही थीं। हों भी क्यों न आखिर गीत ही ऐसा भक्तिमय था, कमल आसान छोड़ माता.... वर दे वीणा वादिनी...
धीरे धीरे तालियों की ताल भी उक्त भजन से मेल खाने लगी।
यह आवोहवा का ही शायद असर था कि उसी रमणीक स्थान पर विचरण कर रहे एक पुरूष ने उक्त भजन सुनकर आपस मे कह ही दिया।
अगर कमल आसन छोड़ देंगी तो बैठेंगी कहाँ।
इतना गुलगुल आसन कहाँ मिलेगा।
तभी दूसरों ने मजाक में सुझाव दिया कि आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा.... गाना बजाना खाना पीना गाड़ी में होगा सनम .. ..
इतना सुनते ही भक्ति मय स्त्रियो व पुरुषों में जंग सी छिड़ गई। कोई कहने लगी कि आप लोग मेरी आस्था पर चोट कर रहे ... तो कोई धर्म विरोधी होने का आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे।
इस सबको देखते हुए एक किशोर बिटिया से रहा नही गया कि आप लोग मेरी एक जिज्ञासा का जबाव दें। सब एक सुर में बोले कि क्या है आपका सवाल।
भोली बेटी ने पूंछ दिया कि क्या कोई वयस्क महिला बाजा लेकर किसी कमल (lotus) पर बैठ सकती है???
इतनी वजन की स्त्री एक फूल पर कैसे सन्तुलित हो सकती है???
तभी दूसरी स्त्री ने प्रतिप्रश्न किया कि भगवान बुध्द की सभी प्रतिमाएं भी कमल आसन पर ही क्यों हैं???
आखिर क्या है इस कमल और देवी देवताओं का घालमेल???
माजरा भांप कर आप पास के लोगों ने बीच बचाव कर, मामले को शांत किया और बात आई गयी हो गयी।
मगर बच्ची का बाल मन आज भी उस गुत्थी को सुलझाने में लगा है कि क्या कोई प्रौढ़ स्त्री या पुरुष किसी पुष्प पर बैठ सकता है????🤔🤔
तभी मंदिर का गीत बदला। मधुर सी आवाज आई। फूल आहिस्ता फेंकों.... फूल बड़े नाजुक होते हैं...
... फूल आहिस्ता...
साथियो यदि आपके पास इस किशोरी की जिज्ञासा शांत करने लाइक कोई उत्तर हो तो जरूर बताएं अन्यथा सच्चाई जानने समझने हेतु विपस्सना शिविर का आयोजन करें और अपना मानव जन्म सफल बनायें।
संपर्क सूत्र इंजी अरुण आनन्द कानपुर भारत
📞📞📞097938 58111
📞📞📞079051 60932
भवतु सब्ब मंगलं☸
मानव धर्म बोधिवृक्ष सेवा समिति
जय भारत भूमि🇮🇳
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🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
वर्षात की शुरुआत हो चुकी थी। हल्की हल्की बदली आ जा रही थी। इसी सुहावने मौषम में सुबह टहलने वालों का तांता लगा हुआ था। आसमान में सूर्य व बादलो के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा था। जिसमे कभी सूर्य महाराज विजय पा रहे थे तो कभी बादल। इसी दौरान नर्म सुहावनी हवाएं सूरज से बादलों को इस प्रकार हटा रही थी कि जैसे कोई पिया अपनी प्रियतमा का घूंघट उठा रहा हो और शर्मीली दुल्हन अपने प्रियवर का दीदार करके जैसे लजा कर पुनः घूंघट निकाल लेती है। ठीक यही काम नरम सुहावनी हवाएं भी बादलों के साथ कर रहीं थीं। यही आंख मिचौली चल ही रही थी कि तभी एक मंदिर में बज रहे लाउडस्पीकर से एक आवाज आई, जिसे सुनकर कई राह चलती स्त्रियां मन्त्र मुग्ध हुई जा रही थीं। हों भी क्यों न आखिर गीत ही ऐसा भक्तिमय था, कमल आसान छोड़ माता.... वर दे वीणा वादिनी...
धीरे धीरे तालियों की ताल भी उक्त भजन से मेल खाने लगी।
यह आवोहवा का ही शायद असर था कि उसी रमणीक स्थान पर विचरण कर रहे एक पुरूष ने उक्त भजन सुनकर आपस मे कह ही दिया।
अगर कमल आसन छोड़ देंगी तो बैठेंगी कहाँ।
इतना गुलगुल आसन कहाँ मिलेगा।
तभी दूसरों ने मजाक में सुझाव दिया कि आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा.... गाना बजाना खाना पीना गाड़ी में होगा सनम .. ..
इतना सुनते ही भक्ति मय स्त्रियो व पुरुषों में जंग सी छिड़ गई। कोई कहने लगी कि आप लोग मेरी आस्था पर चोट कर रहे ... तो कोई धर्म विरोधी होने का आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे।
इस सबको देखते हुए एक किशोर बिटिया से रहा नही गया कि आप लोग मेरी एक जिज्ञासा का जबाव दें। सब एक सुर में बोले कि क्या है आपका सवाल।
भोली बेटी ने पूंछ दिया कि क्या कोई वयस्क महिला बाजा लेकर किसी कमल (lotus) पर बैठ सकती है???
इतनी वजन की स्त्री एक फूल पर कैसे सन्तुलित हो सकती है???
तभी दूसरी स्त्री ने प्रतिप्रश्न किया कि भगवान बुध्द की सभी प्रतिमाएं भी कमल आसन पर ही क्यों हैं???
आखिर क्या है इस कमल और देवी देवताओं का घालमेल???
माजरा भांप कर आप पास के लोगों ने बीच बचाव कर, मामले को शांत किया और बात आई गयी हो गयी।
मगर बच्ची का बाल मन आज भी उस गुत्थी को सुलझाने में लगा है कि क्या कोई प्रौढ़ स्त्री या पुरुष किसी पुष्प पर बैठ सकता है????🤔🤔
तभी मंदिर का गीत बदला। मधुर सी आवाज आई। फूल आहिस्ता फेंकों.... फूल बड़े नाजुक होते हैं...
... फूल आहिस्ता...
साथियो यदि आपके पास इस किशोरी की जिज्ञासा शांत करने लाइक कोई उत्तर हो तो जरूर बताएं अन्यथा सच्चाई जानने समझने हेतु विपस्सना शिविर का आयोजन करें और अपना मानव जन्म सफल बनायें।
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भवतु सब्ब मंगलं☸
मानव धर्म बोधिवृक्ष सेवा समिति
जय भारत भूमि🇮🇳
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