*त्रिरत्न बौद्ध महासभा व भंते सघंरक्षित का भंडाफोड़।*
☸☸9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳
महाराष्ट्र के महार त्रिरत्न बौद्ध महासभा के चक्कर में पड़े हुए हैं। जबकि इस महासभा की स्थापना अंग्रेज भिक्षु संघरक्षित द्वारा की गई थी यह संघरक्षित कई लड़कों के बलात्कार के जुर्म में दोषी पाए जाने कारण इस को सजा दी गई। इस जुर्म को इसने कबूल भी किया था इसकी पूरी विचारधारा यह है के लड़के लड़को से औऱ लड़कियां लड़कियों से शादी संबंध या शारीरिक संबंध रखें यही उत्तम है।
बाद में इसको देश से निकाल दिया गया ।
ऐसी स्थिति में उसके बनाए संगठन और बाइलॉज के तहत अंबेडकरवादियों द्वारा काम करना स्वयं के सत्यानाश के अलावा क्या कहा जा सकता है???
ऐसा केवल इसलिए हो पा रहा है कि महार या अंबेडकरवादी समूह में अंबेडकर के प्रति भक्ति भाव है और बाबा साहब के प्रति भक्त भाव होने के कारण अंग्रेजों की प्रत्येक सहानुभूति है।
इसलिए कोई भी विदेशी जब कभी अंबेडकर की बात करता है तो हमारे लोग तुरंत उसके जाल में फंस जाते हैं। इसलिए अंबेडकर शरणम गच्छामि से हमें बाज आना पड़ेगा।
अंबेडकर के कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उनको पूजा स्थल में सजाना तक उत्तम है। आज उनके किए गए कार्यों पर विमर्श करना सब सत्यानाश का मूल बन चुका है।
भगवान बुद्ध ने कब और कहां कहा है कि एक पुरुष को पुरुष से और एक महिला को महिला से शादी संबंध करनी चाहिए ???
जो व्यक्ति जीवनभर कामेशु मिथ्याचारा वेरमणी की वकालत करता रहा हो, वह अनैतिक संबंधों की वकालत कैसे कर सकता है ???
ऐसी स्थिति में यह बहुत धर्म का सत्यानाश नहीं तो क्या है???
बल्कि मेरी जानकारी के अनुसार तो उन्होंने भिक्षु संघ में गैर पुरुष -गैर महिला प्रकार के व्यक्तियों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया था।
ऐसे में भारत के अंबेडकरवादियों को त्रिरत्न बौद्ध महासभा और भंते सघंरक्षित द्वारा कहां किस कुए में ले जाया जा रहा है। बखुबी समझा जा सकता है।
इन सब बातों को कौन और कब समझेगा???
भावतु सब्ब मंगलं
स्वामी डॉ बोधी आनंद
जय भारत भूमि🇮🇳🇮🇳
कॉपी पेस्ट शेयर🌷🌸☸
अधिक जानकारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण लिंक 👇🏼
https://medium.com/@eiselmazard/sexual-abuse-in-sangharakshitas-order-triratna-a-k-a-fwbo-a0712eeb8260
**************************
https://www.google.co.in/amp/s/amp.theguardian.com/world/2017/feb/19/buddhist-sexual-abuse-triratna-dennis-lingwood
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महाराष्ट्र के महार त्रिरत्न बौद्ध महासभा के चक्कर में पड़े हुए हैं। जबकि इस महासभा की स्थापना अंग्रेज भिक्षु संघरक्षित द्वारा की गई थी यह संघरक्षित कई लड़कों के बलात्कार के जुर्म में दोषी पाए जाने कारण इस को सजा दी गई। इस जुर्म को इसने कबूल भी किया था इसकी पूरी विचारधारा यह है के लड़के लड़को से औऱ लड़कियां लड़कियों से शादी संबंध या शारीरिक संबंध रखें यही उत्तम है।
बाद में इसको देश से निकाल दिया गया ।
ऐसी स्थिति में उसके बनाए संगठन और बाइलॉज के तहत अंबेडकरवादियों द्वारा काम करना स्वयं के सत्यानाश के अलावा क्या कहा जा सकता है???
ऐसा केवल इसलिए हो पा रहा है कि महार या अंबेडकरवादी समूह में अंबेडकर के प्रति भक्ति भाव है और बाबा साहब के प्रति भक्त भाव होने के कारण अंग्रेजों की प्रत्येक सहानुभूति है।
इसलिए कोई भी विदेशी जब कभी अंबेडकर की बात करता है तो हमारे लोग तुरंत उसके जाल में फंस जाते हैं। इसलिए अंबेडकर शरणम गच्छामि से हमें बाज आना पड़ेगा।
अंबेडकर के कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उनको पूजा स्थल में सजाना तक उत्तम है। आज उनके किए गए कार्यों पर विमर्श करना सब सत्यानाश का मूल बन चुका है।
भगवान बुद्ध ने कब और कहां कहा है कि एक पुरुष को पुरुष से और एक महिला को महिला से शादी संबंध करनी चाहिए ???
जो व्यक्ति जीवनभर कामेशु मिथ्याचारा वेरमणी की वकालत करता रहा हो, वह अनैतिक संबंधों की वकालत कैसे कर सकता है ???
ऐसी स्थिति में यह बहुत धर्म का सत्यानाश नहीं तो क्या है???
बल्कि मेरी जानकारी के अनुसार तो उन्होंने भिक्षु संघ में गैर पुरुष -गैर महिला प्रकार के व्यक्तियों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया था।
ऐसे में भारत के अंबेडकरवादियों को त्रिरत्न बौद्ध महासभा और भंते सघंरक्षित द्वारा कहां किस कुए में ले जाया जा रहा है। बखुबी समझा जा सकता है।
इन सब बातों को कौन और कब समझेगा???
भावतु सब्ब मंगलं
स्वामी डॉ बोधी आनंद
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