*स्वतंत्रता दिवस या प्रेरणादिवस- देशवासियों के सरोकार।*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस को "हर्ष व उल्लास' के साथ मनाना न केवल गुलाम मानसिकता की कड़ियों को उद्घृत करता है बल्कि गुलामी में मुक्ति के अहसास के साथ "हर्ष व उल्लास" के कारण गुलामी को चिरस्थाई भी बनाता है।
फलस्वरूप देशवासियों में अंग्रेज वर्चस्व की स्वतः स्वीकृति होती जा रही है। इसीलिए देशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि सब बेकार और विदेशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि वस्तुएं बढ़िया जैसी आत्मघाती सोच देशवासियों में निर्मित हो रही है। इसके लिए आत्मसुधार करना होगा।
जबकि इस दिवस का आयोजन प्रेरणादिवस के तौर पर करने से पुनः विदेशी गुलामी के आगमन, रंग, रूप, भाषा, वस्तु परस्ती आदि से रोका जा सकता है।
इसलिए आपको 71वें प्रेरणादिवस की हार्दिक मंगल कामनाएं।🇮🇳💐
भवतु सब्ब मंगलं☸
जय भारत भूमि🇮🇳
कॉपी पेस्ट शेयर💐💐
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस को "हर्ष व उल्लास' के साथ मनाना न केवल गुलाम मानसिकता की कड़ियों को उद्घृत करता है बल्कि गुलामी में मुक्ति के अहसास के साथ "हर्ष व उल्लास" के कारण गुलामी को चिरस्थाई भी बनाता है।
फलस्वरूप देशवासियों में अंग्रेज वर्चस्व की स्वतः स्वीकृति होती जा रही है। इसीलिए देशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि सब बेकार और विदेशी भाषा, रंग, रूप, उपचार, कार आदि वस्तुएं बढ़िया जैसी आत्मघाती सोच देशवासियों में निर्मित हो रही है। इसके लिए आत्मसुधार करना होगा।
जबकि इस दिवस का आयोजन प्रेरणादिवस के तौर पर करने से पुनः विदेशी गुलामी के आगमन, रंग, रूप, भाषा, वस्तु परस्ती आदि से रोका जा सकता है।
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