*भगवान बुध्द की असली विपस्सना (गोयनका वाली नही) ज्ञान प्राप्ति और नादानों की नींद हराम करमे का नायाब फार्मूला।*
🌷🌷9*4*5☸☸☸☸🇮🇳
ज्ञान प्राप्ति में मानव इंद्रियां सबसे बड़ी बाधा हैं। जबकि भौतिक शरीर को चलाने व लोकाचार हेतु अतिआवश्यक हैं। *अर्थात जो इन्शान जितना ज्यादा आंख, काम, नाक, जुबान, स्पर्श और प्रजनन अंगों और उनके विषयों में लिप्त हैं वे उतने ही ज्यादा मूर्ख हैं।*
जो व्यक्ति जितना ज्यादा मुद्रा अर्जन में लिप्त हैं वह उतना ही ज्यादा मूर्क्षित हैं।
*जो इन्शान जितना ज्यादा घर मकान दुकान कार बीबी बच्चों साड़ी सूट आदि में संलिप्त हैं वे उतना ही ज्यादा अपनी मूर्खता और मूरक्षा का मजा ले रहे हैं*।
ऐसे सभी लोगों का जीना हराम करना संयमी व्यक्ति के लिए चुटकियों का काम हैं। यही भगवान बुध्द का असली ज्ञान है।
बहूतजन समाज तथागत बुद्ध से दूर है इसीलिए "दुखी" है। दुख से मुक्ति चाहिए तो तथागत बुध्द के बुद्धत्व हेतु शरण आइये।
भवतु सब्ब मंगलं
जय भारत भूमि🇮🇳
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ज्ञान प्राप्ति में मानव इंद्रियां सबसे बड़ी बाधा हैं। जबकि भौतिक शरीर को चलाने व लोकाचार हेतु अतिआवश्यक हैं। *अर्थात जो इन्शान जितना ज्यादा आंख, काम, नाक, जुबान, स्पर्श और प्रजनन अंगों और उनके विषयों में लिप्त हैं वे उतने ही ज्यादा मूर्ख हैं।*
जो व्यक्ति जितना ज्यादा मुद्रा अर्जन में लिप्त हैं वह उतना ही ज्यादा मूर्क्षित हैं।
*जो इन्शान जितना ज्यादा घर मकान दुकान कार बीबी बच्चों साड़ी सूट आदि में संलिप्त हैं वे उतना ही ज्यादा अपनी मूर्खता और मूरक्षा का मजा ले रहे हैं*।
ऐसे सभी लोगों का जीना हराम करना संयमी व्यक्ति के लिए चुटकियों का काम हैं। यही भगवान बुध्द का असली ज्ञान है।
बहूतजन समाज तथागत बुद्ध से दूर है इसीलिए "दुखी" है। दुख से मुक्ति चाहिए तो तथागत बुध्द के बुद्धत्व हेतु शरण आइये।
भवतु सब्ब मंगलं
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