पूजा पाठ अर्चना बंदना "मन वचन व कर्म" से स्वयं के शरीर को किसी और के हवाले करने के सिवाय कुछ नही हैं।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷
क्या इसी लिए संतगुरु रविदास जी महाराज कहते हैं क़ि👇
राम मे पूजा काह चढ़ाऊँ, फल और फूल अनूप न पाऊँ।
थनहुं दूध जो बछड़ो जुठारो, पहुंप भंवर जल मीन बिगारो।।
मलियागिर बेधिओ भुजंगा, विष अमृत बशै एक संगा।।
मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेहूँ सहज स्वरूप।।
पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी, कह रविदास कौन गत मेरी।।
🇮🇳🇮🇳9*4*5✍✍✍✍✍
अर्थात वो कहते हैं क़ि हे राम मैं पूजा मे क्या चढ़ाऊँ?
फल व फूल कोई अनूठा नही है सब के सब कीडो द्वारा परागण व निषेचन की प्रक्रिया द्वारान जूठे कर दिए जाते हैं।
दूध निकालने से पहले बछड़ा जूठा कर देता है।
गंगा जल मे मछलियाँ हगमूत कर गंदा कर देतीं हैं। इसलिए वह भी चढ़ाने लाइक नही है।
चन्दन मे काले काले साँप लपते रहते हैं जिससे वह भी विषैला हो जाता है।
इसीलिए हमारे लिए "मन" ही पूजा और "मन" ही धूपबत्ती है जिसको मैं सहज स्वरूप मे सेहता हूँ।
पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी (राम की) कह रविदास कौन गत मोरी। अर्थात मैं तेरी पूजा अर्चना कुछ नही करता फिर चाहे मेरी कोई भी गत क्यों न हो।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷
पूजा अर्चना मे चढ़ाई जाने वाली सामग्री यदि बाकइ मे चढ़ाने लाइक हो तो बताओ?
ऐसी ही असली भारतवासी संतो की अमृतवाणी।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🤔🤔🤔🤔🤔
धन्य है वो महापुरुष जिन्होंने भारतवासियो को सच्चाई का आईना दिखाया।
ऐसा आइना दिखाया क़ि मीरा हो गई मगन, वो तो गली गली गुरू गुण गाने लगी। 😢😢😢
भवतु सब्ब मंगलं
साहेब बंदगी जय भीम
जय जयय अय्या गौतमी
जय भीम जय मूलनिवासी
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷
क्या इसी लिए संतगुरु रविदास जी महाराज कहते हैं क़ि👇
राम मे पूजा काह चढ़ाऊँ, फल और फूल अनूप न पाऊँ।
थनहुं दूध जो बछड़ो जुठारो, पहुंप भंवर जल मीन बिगारो।।
मलियागिर बेधिओ भुजंगा, विष अमृत बशै एक संगा।।
मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेहूँ सहज स्वरूप।।
पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी, कह रविदास कौन गत मेरी।।
🇮🇳🇮🇳9*4*5✍✍✍✍✍
अर्थात वो कहते हैं क़ि हे राम मैं पूजा मे क्या चढ़ाऊँ?
फल व फूल कोई अनूठा नही है सब के सब कीडो द्वारा परागण व निषेचन की प्रक्रिया द्वारान जूठे कर दिए जाते हैं।
दूध निकालने से पहले बछड़ा जूठा कर देता है।
गंगा जल मे मछलियाँ हगमूत कर गंदा कर देतीं हैं। इसलिए वह भी चढ़ाने लाइक नही है।
चन्दन मे काले काले साँप लपते रहते हैं जिससे वह भी विषैला हो जाता है।
इसीलिए हमारे लिए "मन" ही पूजा और "मन" ही धूपबत्ती है जिसको मैं सहज स्वरूप मे सेहता हूँ।
पूजा अर्चना न जानहुँ तेरी (राम की) कह रविदास कौन गत मोरी। अर्थात मैं तेरी पूजा अर्चना कुछ नही करता फिर चाहे मेरी कोई भी गत क्यों न हो।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷
पूजा अर्चना मे चढ़ाई जाने वाली सामग्री यदि बाकइ मे चढ़ाने लाइक हो तो बताओ?
ऐसी ही असली भारतवासी संतो की अमृतवाणी।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🤔🤔🤔🤔🤔
धन्य है वो महापुरुष जिन्होंने भारतवासियो को सच्चाई का आईना दिखाया।
ऐसा आइना दिखाया क़ि मीरा हो गई मगन, वो तो गली गली गुरू गुण गाने लगी। 😢😢😢
भवतु सब्ब मंगलं
साहेब बंदगी जय भीम
जय जयय अय्या गौतमी
जय भीम जय मूलनिवासी
अति सुन्दर
ReplyDeleteBest
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ReplyDeleteविचारणीय
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