उम्मीद मुक्ति व मोक्ष की लेकिन नाटक बंधन का।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷💐🌷
आज कल भारत मे ब्राह्मण धर्मी महिलाये बच्चियां अपने पुरुष रिश्तेदारों से अपनी सुरक्षा की गारंटी मांगने निकल पड़ी हैं। जहां देखो वही रक्षाबंधन। बाजार पते पड़े है। स्कूलो मे भी संघी संस्कारशाला चालू है।
रक्षा की भीख मांगने वाली ब्राह्मण धर्मी स्त्रियों को नही पता क़ि सुरक्षा की भीख वही मांगता है जो कमजोर होता और जो कमजोर हो उसे कमजोरी की बजहों का निराकरण करने की जरूरत है न क़ि किसी भाई बाप आदि से अपनी सुरक्षा का आश्वाशन लेने का नाटक करने की।
क्या कोई भाई बाप बिना रक्षाबंधन मनाये अपनी बहन बेटी का बलात्कार करवाएगा???
स्वाभाविक है नही।
फिर ये कैसा गुड़िया गुड्डा का खेल चल रहा है।
दोषी कौन है वो जो स्वयं की कमजोरी को महशुस करते हुए असुरक्षा की बजह से सुरक्षा की भीख मांग रहे है वो या वो जो ये सब लोगों मे फैलाकर दूर से गिद्ध दृस्टि लगाये बैठे हैं?
इस सब की बजह को देखते हुए समझना जरूरी हो जाता है क़ि क्या तार्किकता मनुष्य का स्वाभाविक गुण है या आस्था विश्वास व सरेंडर करना???
जय जयय भीम मूलनिवासी
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आज कल भारत मे ब्राह्मण धर्मी महिलाये बच्चियां अपने पुरुष रिश्तेदारों से अपनी सुरक्षा की गारंटी मांगने निकल पड़ी हैं। जहां देखो वही रक्षाबंधन। बाजार पते पड़े है। स्कूलो मे भी संघी संस्कारशाला चालू है।
रक्षा की भीख मांगने वाली ब्राह्मण धर्मी स्त्रियों को नही पता क़ि सुरक्षा की भीख वही मांगता है जो कमजोर होता और जो कमजोर हो उसे कमजोरी की बजहों का निराकरण करने की जरूरत है न क़ि किसी भाई बाप आदि से अपनी सुरक्षा का आश्वाशन लेने का नाटक करने की।
क्या कोई भाई बाप बिना रक्षाबंधन मनाये अपनी बहन बेटी का बलात्कार करवाएगा???
स्वाभाविक है नही।
फिर ये कैसा गुड़िया गुड्डा का खेल चल रहा है।
दोषी कौन है वो जो स्वयं की कमजोरी को महशुस करते हुए असुरक्षा की बजह से सुरक्षा की भीख मांग रहे है वो या वो जो ये सब लोगों मे फैलाकर दूर से गिद्ध दृस्टि लगाये बैठे हैं?
इस सब की बजह को देखते हुए समझना जरूरी हो जाता है क़ि क्या तार्किकता मनुष्य का स्वाभाविक गुण है या आस्था विश्वास व सरेंडर करना???
जय जयय भीम मूलनिवासी
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