हिन्दुस्तान ने रियो ओलंपिक 2016 मे केवल दो मेडल जीते हैं~आइये जनते हैं क़ि कश्मीरी ब्राह्मण जस्टिस काटजू कैसे इस पर पर्दा डालने की भौंडी सी कोशिस कर रहे हैं।
हिन्दुस्तान ने रियो ओलंपिक 2016 मे केवल दो मेडल जीते हैं~आइये जनते हैं क़ि कश्मीरी ब्राह्मण जस्टिस काटजू कैसे इस पर पर्दा डालने की भौंडी सी कोशिस कर रहे हैं।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷💐
128 (UN 2015) करोड़ की आबादी वाले देश मे सिर्फ दो मैडल का ला पाना, वह भी सिल्वर व कांशा, क्या यह कथित मेरिटधारी सवर्णों की पोल खोलने व देशद्रोही शाबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है?
हालांकि इस एक दूसरा सवर्ण नेहरू खानदानी मार्कंडेय काटजू इसकी असली बजहों पर पर्दा डालते हुए कुछ यूँ बयाँ कर रहे है अपनी देशद्रोहिता को।🤔🤔
मार्कंडेय काटजू कहते हैं~
पहला तर्क~आधुनिक खेल बहुत महगें है इसलिए चूंकि प्रत्येक हिन्दुस्तानी द्वारा इतने खर्चे को वहन करना संभव नहीं है।
दूसरा तर्क~ काटजू महोदय आगे कहते हैं क़ि भारतीय लोगों मे जीवन पर्यन्त कैरियर खेलों मे नही है इसीलिए युवाओं मे खेल कूद के प्रति रुझान नही है।
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ऐसे मे सवाल ये उठता है क़ि क्या बाकइ मे उक्त ही बजह है 65 करोड़ आबादी पर एक मेडल ला पाने के पीछे।
क्या लोग खेलो मे अपना कैरियर नही बनाना चाहते?
यदि नही बनाना चाहते तो खिलाड़ियों के लिए सेना पुलिस सहित अन्य नौकरियों मे आरक्षण क्यों है?
खिलाड़ी अपने जीवन काल मे ही इतना नही कमा पाते क़ि जीवन पर्यन्त बैठे खा सकते हैं, उस पर खिलाड़ियों हेतु सेवा शर्तों मे छूट सहित आरक्षण की व्यवस्था इसी जीवन पर्यन्त कैरियर की सुदृढ़ता ही तो है।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🌷🌷🌷🌷🌷
असली बजह जिस पर काटजू पर्दा डाल रहे वह हैं
1~ सवर्णों मे शारीरिक सामर्थ का अभाव व हराम का खाने (आश्रम पद्धति) की आदत सहित देश के मान संम्मान से कोई मतलब न रखना। क्योंकि जो लोग विदेशी होतें हैं वह स्वयं के देश के बारे मे तो हमेशा अच्छा ही सोचते है जबकि जहां पर वो रह रहे हैं वहां के बारे मे उनमे कोई देशप्रेम नही होता। हा स्वयं के देशद्रोही होने के प्रमाण पर पर्दा जरूर डालने का प्रयास रहता है।
दूसरा सवाल जो काटजू उठाते हैं क़ि खेलो मे पैसा नही है, पूर्णतया गलत है। क्योंकि क्रिकेट जिसमे ज्यादातर ओपनर सवर्ण व फील्डर अन्य जातियों के है, मे BCCI विश्व की सबसे ज्यादा मालामाल संस्था क्यों है? बल्कि श्रीनिवासन ब्राह्मण तो BCCI को भारत के संविधान से ऊपर मांनता है। क्योंकि अक्षम सवर्ण एक जगह खड़े होकर कुट कुट करने के साथ साथ गाल तो बजा सकते है लेकिन मेहनत नही कर सकते। एक तरह क्रिकेट मे खिलाड़ियों पर रुपयों की बर्षात दूसरी तरह मेहनत वाले खेलो मे खिलाड़ियों का रो धो कर घर चलाने के लाले आखिर क्यों नही पड़ेंगे जब सवर्ण सरकारे खेल कूद के लिए प्रति व्यक्ति प्रति दिन 3 पैसे खर्चा करेंगी? ब्रिटेन सरकार ने एक मेडल हेतु 48 00 00 000 (48 करोड़) रुपये खर्च किये है, तब उसको इतने मेडल मिले। लेकिन भारत मे संघी कांग्रेसी सहित पिछड़ी सरकारो मे बैठे पिछड़े अछूत सवर्ण कुम्भ स्नान मे तो 5,30,00,00,00,000 अर्थात 5 खरब 30 अरब जैसी भारी भरकम रकम पानी मे बहा देते हैं लेकिन देश की शान के लिए ओलंपिक हेतु पैसा नही है, इन देशद्रोहियों के पास।
दिल्ली मे आयोजित कामनवेल्थ खेलों (CWG) को कामन हूर गेम बना दिया था शीला दीक्षित ने। उसमे भी SC ST की बेहतरी के लिए आवंटित (सामाजिक न्याय मंत्रालय) रुपये को कामन हूर गेम मे उढाया गया कांग्रेसियो द्वारा।
🇮🇳🇮🇳9*4*5💐💐💐💐💐
आखिर ये काटजू जैसे लोग किसे बेबकूफ बनाना चाहते है?
क्या मेहनतकश कॉम के सहभाग के बिना मेहनत वाले खेलो मे भारत की जीत सम्भव है?
खेलो मे आरक्षण करो फिर देखो भारत की शान अंतर्राष्ट्रीय स्तर। क्योंकि कौन ऐसा मल्लाह है जो नौकायन मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा अहीर है जो कुश्ती मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा बहेलिया है जो निशानेबाजी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा कंजड़ है जो कबड्डी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा खटीक है जो तलवारबाजी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा कहार निषाद है जो तैराकी मेडल नही ला सकता?
कौ
आदि आदि आदि आदि
लेकिन इससे सवर्ण वर्चस्व को खतरा पैदा होने की सम्भावना भी बनेगी। इसी ड़र की बजह से खेल कूद सहित राष्ट्रीय खेल हॉकी धूल फ़ाँक रही है। भारत की इज्जत संघी कांग्रेसी बारी बारी से पैरो तले रौंद रहे हैं।
दोषी संघी कम बहुजनो की अक्लमंदी ज्यादा है।
आपका दिन कुशल हो🙏🙏
भवतु सब्ब मंगलं
जय मूलनिवासी जय भीम
जय जय अय्या गौतमी।
http://m.timesofindia.com/good-governance/madhya-pradesh/Simhastha-Kumbh-budget-may-rise-to-Rs-5000-crore-MP-government/articleshow/51072663.cms
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http://justicekatju.blogspot.in/2016/08/why-no-medals-in-rio-why-does-india.html?m=1
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http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/biggest-allocation-kumbh-gets-a-central-boost-rs-100-cr-to-madhya-pradesh-2758219/
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http://indianexpress.com/sports/rio-2016-olympics/paralympics-faces-major-budget-cuts-for-rio-2016-olympics-2986229/
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http://m.thenational.ae/world/indias-olympic-shame
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Chilling truth of Indian administration’s apathy, sprinter says she nearly died in absence of water in Olympics - http://www.jantakareporter.com/sports/chilling-truth-indian-administrations-apathy-sprinter-says-nearly-died-absence-water-olympics/57349
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128 (UN 2015) करोड़ की आबादी वाले देश मे सिर्फ दो मैडल का ला पाना, वह भी सिल्वर व कांशा, क्या यह कथित मेरिटधारी सवर्णों की पोल खोलने व देशद्रोही शाबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है?
हालांकि इस एक दूसरा सवर्ण नेहरू खानदानी मार्कंडेय काटजू इसकी असली बजहों पर पर्दा डालते हुए कुछ यूँ बयाँ कर रहे है अपनी देशद्रोहिता को।🤔🤔
मार्कंडेय काटजू कहते हैं~
पहला तर्क~आधुनिक खेल बहुत महगें है इसलिए चूंकि प्रत्येक हिन्दुस्तानी द्वारा इतने खर्चे को वहन करना संभव नहीं है।
दूसरा तर्क~ काटजू महोदय आगे कहते हैं क़ि भारतीय लोगों मे जीवन पर्यन्त कैरियर खेलों मे नही है इसीलिए युवाओं मे खेल कूद के प्रति रुझान नही है।
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ऐसे मे सवाल ये उठता है क़ि क्या बाकइ मे उक्त ही बजह है 65 करोड़ आबादी पर एक मेडल ला पाने के पीछे।
क्या लोग खेलो मे अपना कैरियर नही बनाना चाहते?
यदि नही बनाना चाहते तो खिलाड़ियों के लिए सेना पुलिस सहित अन्य नौकरियों मे आरक्षण क्यों है?
खिलाड़ी अपने जीवन काल मे ही इतना नही कमा पाते क़ि जीवन पर्यन्त बैठे खा सकते हैं, उस पर खिलाड़ियों हेतु सेवा शर्तों मे छूट सहित आरक्षण की व्यवस्था इसी जीवन पर्यन्त कैरियर की सुदृढ़ता ही तो है।
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असली बजह जिस पर काटजू पर्दा डाल रहे वह हैं
1~ सवर्णों मे शारीरिक सामर्थ का अभाव व हराम का खाने (आश्रम पद्धति) की आदत सहित देश के मान संम्मान से कोई मतलब न रखना। क्योंकि जो लोग विदेशी होतें हैं वह स्वयं के देश के बारे मे तो हमेशा अच्छा ही सोचते है जबकि जहां पर वो रह रहे हैं वहां के बारे मे उनमे कोई देशप्रेम नही होता। हा स्वयं के देशद्रोही होने के प्रमाण पर पर्दा जरूर डालने का प्रयास रहता है।
दूसरा सवाल जो काटजू उठाते हैं क़ि खेलो मे पैसा नही है, पूर्णतया गलत है। क्योंकि क्रिकेट जिसमे ज्यादातर ओपनर सवर्ण व फील्डर अन्य जातियों के है, मे BCCI विश्व की सबसे ज्यादा मालामाल संस्था क्यों है? बल्कि श्रीनिवासन ब्राह्मण तो BCCI को भारत के संविधान से ऊपर मांनता है। क्योंकि अक्षम सवर्ण एक जगह खड़े होकर कुट कुट करने के साथ साथ गाल तो बजा सकते है लेकिन मेहनत नही कर सकते। एक तरह क्रिकेट मे खिलाड़ियों पर रुपयों की बर्षात दूसरी तरह मेहनत वाले खेलो मे खिलाड़ियों का रो धो कर घर चलाने के लाले आखिर क्यों नही पड़ेंगे जब सवर्ण सरकारे खेल कूद के लिए प्रति व्यक्ति प्रति दिन 3 पैसे खर्चा करेंगी? ब्रिटेन सरकार ने एक मेडल हेतु 48 00 00 000 (48 करोड़) रुपये खर्च किये है, तब उसको इतने मेडल मिले। लेकिन भारत मे संघी कांग्रेसी सहित पिछड़ी सरकारो मे बैठे पिछड़े अछूत सवर्ण कुम्भ स्नान मे तो 5,30,00,00,00,000 अर्थात 5 खरब 30 अरब जैसी भारी भरकम रकम पानी मे बहा देते हैं लेकिन देश की शान के लिए ओलंपिक हेतु पैसा नही है, इन देशद्रोहियों के पास।
दिल्ली मे आयोजित कामनवेल्थ खेलों (CWG) को कामन हूर गेम बना दिया था शीला दीक्षित ने। उसमे भी SC ST की बेहतरी के लिए आवंटित (सामाजिक न्याय मंत्रालय) रुपये को कामन हूर गेम मे उढाया गया कांग्रेसियो द्वारा।
🇮🇳🇮🇳9*4*5💐💐💐💐💐
आखिर ये काटजू जैसे लोग किसे बेबकूफ बनाना चाहते है?
क्या मेहनतकश कॉम के सहभाग के बिना मेहनत वाले खेलो मे भारत की जीत सम्भव है?
खेलो मे आरक्षण करो फिर देखो भारत की शान अंतर्राष्ट्रीय स्तर। क्योंकि कौन ऐसा मल्लाह है जो नौकायन मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा अहीर है जो कुश्ती मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा बहेलिया है जो निशानेबाजी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा कंजड़ है जो कबड्डी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा खटीक है जो तलवारबाजी मे मेडल नही ला सकता?
कौन ऐसा कहार निषाद है जो तैराकी मेडल नही ला सकता?
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लेकिन इससे सवर्ण वर्चस्व को खतरा पैदा होने की सम्भावना भी बनेगी। इसी ड़र की बजह से खेल कूद सहित राष्ट्रीय खेल हॉकी धूल फ़ाँक रही है। भारत की इज्जत संघी कांग्रेसी बारी बारी से पैरो तले रौंद रहे हैं।
दोषी संघी कम बहुजनो की अक्लमंदी ज्यादा है।
आपका दिन कुशल हो🙏🙏
भवतु सब्ब मंगलं
जय मूलनिवासी जय भीम
जय जय अय्या गौतमी।
http://m.timesofindia.com/good-governance/madhya-pradesh/Simhastha-Kumbh-budget-may-rise-to-Rs-5000-crore-MP-government/articleshow/51072663.cms
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http://justicekatju.blogspot.in/2016/08/why-no-medals-in-rio-why-does-india.html?m=1
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http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/biggest-allocation-kumbh-gets-a-central-boost-rs-100-cr-to-madhya-pradesh-2758219/
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http://indianexpress.com/sports/rio-2016-olympics/paralympics-faces-major-budget-cuts-for-rio-2016-olympics-2986229/
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http://m.thenational.ae/world/indias-olympic-shame
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Chilling truth of Indian administration’s apathy, sprinter says she nearly died in absence of water in Olympics - http://www.jantakareporter.com/sports/chilling-truth-indian-administrations-apathy-sprinter-says-nearly-died-absence-water-olympics/57349
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