साथियो आपने यशकायी रोहित वेमुला की माँ को किसी राजनीतिक पार्टी मे शामिल होने या न होने के विषय पर अपने अपने बहुत अच्छे विचार रखे, उन्हें जानकर अच्छा लगा।🌷💐🇮🇳🙏🙏🙏
जहां तक मेरे अपने विचार का सवाल है तो मैं ये कहना चाहता हूँ क़ि यशकायी रोहित की माँ को जो भी पार्टी सम्मलित करेगी उसकी समाज मे खासकर बहुजन समाज मे पकड़ बढ़ेगी। क्योंकि यशकायी रोहित की हत्या व अत्याचार का बदला पूरा देश लेना चाहता है। जिसको आर्थिक व सामाजिक सम्पन्नता हाशिल करके ज्यादा अच्छी तरह से प्राप्त किया जा सकता है।
रही बात राजनीति व शिद्धांतों की तो मैं कहना चाहता हूँ क़ि राजनीति कोई छुआछूत की बीमारी नही बल्कि राजा बनने की नीति ही राजनीति कहलाती है। अभी तो हमारे लोगों मे राजनीति को गंदा प्रचारित किया गया है वह जानबूझ कर किया गया है ताकि यह समाज राजकाजी व्यवस्था से दूर रह कर केवल विरोध प्रदर्शन कर मांगने वाला ही बना रहे, न्याय देने वाला दाता न बने।
अब यशकायी रोहित की माँ की उम्र व आर्थिक स्थिति देख कर यही लगता है क़ि मागनेवाले से दाता बनें।
रही बात शिद्धांत की तो यह सच है क़ि राजनीति मे पैंतरेबाजी के तौर पर शिद्धांतो से समझौता करना ही पड़ता है लेकिन ऐसे मे जब क़ि सत्ता व वैचारिकता केवल सुप्रीमो के हाथों (दलबदल अधिनियम व व्हिप सिस्टम व पूना पेक्त की बजह से) सिमट चुकी हो तो कोई और नेता की वैचारिकता कोई मायने ही नही रखती।
चूंकि उनकी माँ का भविष्य यशकायी रोहित की संष्थानिक हत्या की बजह से अंधकारमय है। कुल दीपक बुझ चुका है।
एक माँ से उसका बेटा छिन जाने का दर्द एक माँ ही समझ सकती है। 😒इसलिए आर्थिक समृद्धि व लोगों मे उनके विचारों का प्रवाह हेतु सत्ता का अंग बनकर संघर्ष करना ज्यादा उचित रहेगा। आज हम आप की बात को लोग तबज्जो देते है तो उसमे हमारी आपकी आर्थिक व वैचारिक समृद्धि का बहुत बड़ा योगदान है।
यदि फूलन देवी को मान्यवर कांशीराम जी व मुलायम सिंह ने सरकारी माफी देकर केश न वापस लिए होते तो क्या बैंडिट क्वीन इतने वर्ष वह भी दिल्ली मे जिंदा रह पाती?
देशी रॉबिनहुड फूलन देवी ने जरा सी असावधानी बर्ती उसी की बजह से उनको उनके ही घर के बाहर गोली मारी गई व दोषी खुले घूम रहे।
क्या बहुजन नायिका फूलन देवी व बहुजन नायक विक्रम मल्लाह
को मान्यवर कांशीराम जी ने माफी देकर व फूलन को राजनेता बनाकर उचित सम्मान नही दिया था?
क्या बहुजन नायिका फूलन देवी को पार्टी मे सम्मलित कर सांसद बनाने की बजह से निषाद कश्यप मल्लाह आदि जातियां आज भी बहुजनमय नही है?
मुझे लगता है क़ि यशकायी रोहित की माँ को बहेनजी द्वारा उचित प्रतिनिधित्व व सम्मान देना चाहिए। तब शायद वह स्वयं न्याय के लिए दर दर ठोकरें खाने वाली माँ की जगह न्याय देने वाली माँ बन सकें।
आप सभी का आभार 🌷💐🙏
जय जयय अय्या गौतमी
जय मूलनिवासी
जहां तक मेरे अपने विचार का सवाल है तो मैं ये कहना चाहता हूँ क़ि यशकायी रोहित की माँ को जो भी पार्टी सम्मलित करेगी उसकी समाज मे खासकर बहुजन समाज मे पकड़ बढ़ेगी। क्योंकि यशकायी रोहित की हत्या व अत्याचार का बदला पूरा देश लेना चाहता है। जिसको आर्थिक व सामाजिक सम्पन्नता हाशिल करके ज्यादा अच्छी तरह से प्राप्त किया जा सकता है।
रही बात राजनीति व शिद्धांतों की तो मैं कहना चाहता हूँ क़ि राजनीति कोई छुआछूत की बीमारी नही बल्कि राजा बनने की नीति ही राजनीति कहलाती है। अभी तो हमारे लोगों मे राजनीति को गंदा प्रचारित किया गया है वह जानबूझ कर किया गया है ताकि यह समाज राजकाजी व्यवस्था से दूर रह कर केवल विरोध प्रदर्शन कर मांगने वाला ही बना रहे, न्याय देने वाला दाता न बने।
अब यशकायी रोहित की माँ की उम्र व आर्थिक स्थिति देख कर यही लगता है क़ि मागनेवाले से दाता बनें।
रही बात शिद्धांत की तो यह सच है क़ि राजनीति मे पैंतरेबाजी के तौर पर शिद्धांतो से समझौता करना ही पड़ता है लेकिन ऐसे मे जब क़ि सत्ता व वैचारिकता केवल सुप्रीमो के हाथों (दलबदल अधिनियम व व्हिप सिस्टम व पूना पेक्त की बजह से) सिमट चुकी हो तो कोई और नेता की वैचारिकता कोई मायने ही नही रखती।
चूंकि उनकी माँ का भविष्य यशकायी रोहित की संष्थानिक हत्या की बजह से अंधकारमय है। कुल दीपक बुझ चुका है।
एक माँ से उसका बेटा छिन जाने का दर्द एक माँ ही समझ सकती है। 😒इसलिए आर्थिक समृद्धि व लोगों मे उनके विचारों का प्रवाह हेतु सत्ता का अंग बनकर संघर्ष करना ज्यादा उचित रहेगा। आज हम आप की बात को लोग तबज्जो देते है तो उसमे हमारी आपकी आर्थिक व वैचारिक समृद्धि का बहुत बड़ा योगदान है।
यदि फूलन देवी को मान्यवर कांशीराम जी व मुलायम सिंह ने सरकारी माफी देकर केश न वापस लिए होते तो क्या बैंडिट क्वीन इतने वर्ष वह भी दिल्ली मे जिंदा रह पाती?
देशी रॉबिनहुड फूलन देवी ने जरा सी असावधानी बर्ती उसी की बजह से उनको उनके ही घर के बाहर गोली मारी गई व दोषी खुले घूम रहे।
क्या बहुजन नायिका फूलन देवी व बहुजन नायक विक्रम मल्लाह
को मान्यवर कांशीराम जी ने माफी देकर व फूलन को राजनेता बनाकर उचित सम्मान नही दिया था?
क्या बहुजन नायिका फूलन देवी को पार्टी मे सम्मलित कर सांसद बनाने की बजह से निषाद कश्यप मल्लाह आदि जातियां आज भी बहुजनमय नही है?
मुझे लगता है क़ि यशकायी रोहित की माँ को बहेनजी द्वारा उचित प्रतिनिधित्व व सम्मान देना चाहिए। तब शायद वह स्वयं न्याय के लिए दर दर ठोकरें खाने वाली माँ की जगह न्याय देने वाली माँ बन सकें।
आप सभी का आभार 🌷💐🙏
जय जयय अय्या गौतमी
जय मूलनिवासी
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