Skip to main content

क्या अछूत पिछड़े राष्ट्रवादी न होकर राष्ट्रद्रोही है-एक विश्लेषण

क्या अछूत पिछड़े राष्ट्रवादी न होकर राष्ट्रद्रोही है-एक विश्लेषण
🇮🇳🇮🇳9*4*5🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
ये काफी हद तक सच है क़ि राष्ट्रीय संकल्पना को दलित पिछड़े हमेशा आरक्षण के नाम से मिटाते ही रहे हैं।
इसी लिये संघी अछूत पिछडो को देशद्रोही कहते रहे हैं। यदि नही सुधरे तो आगे भी देशद्रोह मे ही जान भी गवाएगें।
इस राष्ट्रीय सोच के अभाव को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने 2 जनवरी 1945 को कोलकाता विश्वविद्यालय छात्र संघ सम्बोधन मे रेखांकित किया था। डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अपनी राइटिंग एंड स्पीचेज 17(3) के पेज 343 पर कहते हैं क़ि "there had not yet been an all india consciousness among them (sc st and obc). They had beem uptil now living a provincial life." अर्थात अछूत पिछड़ों मे अखिल भारतीय चेतना का अभाव है ये अभी तक प्रांतीय जिंदगी के साथ ही रहते रहे हैं।
जिस कमजोरी को हमारे प्यारे डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर 1945 मे रेखांकित किये था। उसे 71 साल बाद यानी 2016 तक भी ठीक नही किया गया है। 😡क्या होगा इन अछूत पिछड़ों का? मूलनिवासी बहुजनो को देशद्रोही बनाने मे सबसे ज्यादा दोषी आरक्षण के नाम पर राजनीति करने वाले बहुजन नेता हैं। यदि राजनीति ही करनी है तो देश की करो। इससे मांगने वाले से ~देने वाले बन जाओगे। डॉ अम्बेडकर का सपना स्वतः साकार हो जायेगा।
वर्तमान मे अछूत पिछड़ों को केवल आरक्षण समझ आता है बाकी देश दुनिया जाये भाड़ मे । जबकि अनुच्छेद 51 A कहता है क़ि प्रत्येक नागरिक देश की एकता अखंडता को अक्षुण बनाये रखेगा।
हद तो तब हो रही है जब अछूत पिछड़े कहते हैं क़ि आरक्षण हटेगा तो देश बटेगा।
 इसका क्या मतलब है?
क्या इसका मतलब देशद्रोह नही है?
मुझे लगता है क़ि देश के लिए बकरा बनकर मरना अलग बात है और देश की आन बान शान के लिए जंग छेड़ना अलग बात।
🇮🇳🇮🇳9*4*5🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
इसलिए आओ मिलकर करे संखनाद भारत भूमि की रक्षा का।
 आओ ले संकल्प भारत भूमि मे वहने वाली नदियो को बचाने का।
आओ करें विचार लगातार बढ़ते प्रदूषण को रोकने का।
आओ करें विमर्श लगातार आत्म हत्या करते किसान मजदूरो की मौत की असली बजहों का।
आओ उठाये वीड़ा युवाओ को रोजगार देने व भुखमरी मुक्त भारत का।
जय जयय भूमि
जय मूलनिवासी

http://newslive24.in/read/612

Comments

Popular posts from this blog

जयभीम या जय मीम?

अक्सर आज के राजनेता जयभीम को जय मीम से जोड़ने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या स्वयं डॉ बाबासाहब अंबेडकर मुस्लिमपरस्त थे? जैसा कि आजकल बहुजन राजनेताओं में देखा जा रहा है। जिसको जानने के लिए स्वयं चलते हैं बाबासाहब अंबेडकर रचित राइटिंग एंड स्पीचेज खंड संख्या १४ के भाग २ पेज संख्या 1319 से 1327 पर जहां पर डॉ बाबासाहब अंबेडकर लिखते हैं कि "out of 350 crores of rupees of revenue we raise annually, we spend about 180 crores on army. अर्थात बाबासाहब लिखते हैं कि आधे से ज्यादा भारत देश का बजट तो इसी आर्मी पर खत्म हुआ जा रहा है वह भी मुसलमान भूभाग में मुस्लिम आबादी हेतु रोटी सब्जी अनाज रोड दवाओं आदि की सुविधाएं देने में वहीं डा बाबासाहब अंबेडकर पेज 1322 पर लिखते हैं कि "हमारा पाकिस्तान से झगडा हमारी विदेश नीति का हिस्सा है। जिसका असली समाधान है कि "The real solution is to partition the kashmir. Give hindu and Buddhist part to India and Muslim part to Pakistan. अर्थात इस कश्मीर मामले का असली समाधान है कि हिन्दु और बौद्ध भूभाग भारत को दे दिया जाए और मुस्लिम हि...

Tiredness: A Creeping Disorder or a Disease?

  Tiredness: A Creeping Disorder or a Disease? -Written and composed by Dr. Siddhika Singh         Have you ever felt tired even after a full night’s sleep? Do you get breathless after climbing just a flight of stairs, or find yourself losing focus easily? These signs, often dismissed as “normal tiredness,” could be something more—something as common yet overlooked as Anemia. Anemia is a silent creeper that has millions of people in its hold. More than 65% of children and about 60% adolescent girls, more than 55% women, about 50% pregnant women and about 30% of males suffer from anemia in India. Adolescent girls and low socioeconomic classes are at the highest risk of anemia all across India. Anemia is a serious illness; it degrades our quality of life significantly with time. This quality of life is nothing else than our working capacity and overall attitude toward world around us. The most commonly found anemia is India is Iron Deficiency Anemia. Daily iron r...

कश्मीर राग : डॉ अंबेडकर बेदाग। गुप्ता किराना स्टोर बनाम मेगामार्ट

सर्दी मे चाय की चुस्कियों संग आप शायद सोच रहे होंगे कि आज किराने से भरे हुए लड्डू की बात होगी। शायद हम यह भी सोच रहे हों कि आज बगल वाले गुप्ता जी की दुकान मे कुछ गड़बड़ हुई है इसीलिए यह शीर्षक चुना गया है। अमुमन हम इंसान इसी प्रकार सोचते समझते हैं। पिछले एक दशक से भारत मे एक प्रेत जन्म लेता दिखाई दे रहा है। यह वह प्रेत है जो सेकडों सालों के बहुजन संघर्ष को नेशनाबूत करना चाह रहा है। हाल के दशक मे इसने विशेष जोर आजमाइश शुरू की हुई है। इसी हेतु तरह तरह की पैंतरे बाजी की जा रही। आजकल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही रास्ट्र नेता डॉ अंबेडकर सरणं गच्छामि होते देखे जा रहे हैं।       अभी हाल ही मे यह बात गृह मंत्री अमित शाह के संसद मे दिये बयान से साबित हो चुकी है। इस बयान ने शीतनिद्रा मे पड़े और हाशिये पर खदेड दिये गए अंबेडकरवादी समाज मे जोश भरने का काम अवश्य किया है। इस पर आज कल आंबेडकरवादी साथियों के बड़े ही ज्ञान वर्धक बयान आ रहे हैं, कुछ साथी आँखीं मीचेते हुए कह रहे कि अमित शाह ने डॉ अंबेडकर का अपमान किया। भरी संसद मे अंबेडकर - अंबेडकर बोला।       ...