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GST बिल व भारत की संप्रभुता

क्या फेंकू पप्पू सरकारों द्वारा goods and services bill 2016 संसद से पास कराना देश की संप्रभुता को अंग्रेजो के हाथों गिरवीं रखना नही है???
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साथियो अभी हाल ही मे संघी सरकार द्वारा राज्य सभा मे पास कराये गए "वस्तु एवम् सेवा कर" (GST) अधिनियम को पास कराया है। जिसको कांग्रेस के एड़ी चोटी का जोर एक कर देने के बाद भी पास करने की तत्परता दिखाई थी। क्या आज उसी बिल को संघी सरकार द्वारा संसद से पास कराना EY global tax london England के इशारे पर नही किया  गया है? एक worldwide VAT GST and Sales Tax Guide 2014 रिपोर्ट के अनुसार  पेज 347 कहता है क़ि यह GST dual होगा जिसमे राज्य अपना state GST टेक्स व केंद्र सरकार central Goods and Services TAX लगाएगी। जबकि भारतीय मीडिया इसे केवल केंद्रीय टेक्स बता कर देशवासियो को बरगला रहा है। एक बात और कही जा रही क़ि इस GST मे माध्यम से कुल tax सीमा 15% से अधिक नही होगी जिससे महगाई नही बढ़ेगी। जबकि उक्त guide book इसके उलट ही कहानी बयान कर रही है। इसमे ऐसी कोई सीमा नही निर्धारित की गई है। जब उक्त डोक्युमेंट state GST and central GST बात करता है तो फिर केंद्रीय सीमा कहा  रही? हो सकता है क़ि आपको अपनी tv व बीबी बच्चों के अलावा कुछ दिखयी सुनाई न पड़ता हो लेकिन विक्रम कोठारी विजय माल्या आदि जैसे लोग किसका पैसा लूट कर भाग रहे है? यह कोई और की रकम नही यह तो हम सब देशवासियो की खून पसीने की गाढ़ी कमाई है जिसे तमाम वस्तुओं व सेवाओं के बदले मे हमसे बसूला जाता है। ऐसे मे क्या आपकी भलाई के लिए बनी सरकारें क्या बाकइ मे आपके हक मे काम कर रही हैं? यदि कर रही है तो उक्त GST VAT जैसे प्रावधान पूरे विश्व के 110 देशों मे एक साथ क्यों लादे जा रहे? क्या इन 110 देशो की सरकारे देश की संप्रभुता विदेशियो के हाथों गिरवी नही रख रहीं? आखिर कौन है जिसके इशारे पर पूरा विश्व नांच रहा?
इस GST बिल के माध्यम से डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के संविधान के अनुच्छेद संख्या 246A,
 279A,
 248A,
249,
 250,
 268,
268A,
 269,
269A,
 271,
286 सहित अनुच्छेद 366 के 12A,
 26A,
26B व अनुच्छेद 368,
162 व 241 को बदल कर सत्ता कब्जाए लोग देशवासियो के खिलाफ कानून बना कर देशभक्ति का काम कर रहे हैं या केवल सरकारें कठपुतली बन कर रह गईं है? जहां विदेश मे अंग्रेजों द्वारा ड्राफ्ट किये हुए अभिलेखों को संसद की मुहर लगा कर कानूनी जामा पहनाया जा रहा। क्या विभिन्न पार्टीयों के सुप्रीमो (नेताओ) को देशद्रोही नही कहा जाना चाहिए?
 वहीं जेटली ने सातवीं अनुसूची की धारा 84, 92, 92C, 52, 54, 55 और 62 मे मन माफिक शब्द घुसेड़ कर EY global (WTO) के हाथों भारत की संप्रभुता को गिरवी रख दिया गया है। फिर भी डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के मानने वाले व देशभक्त भारतवासी गहरी नींद मे सोये हुए हैं। इस GST व उनके प्रावधानों पर लोगों का ध्यान न जाये इसीलिए वैश्या व ऊना गुजरात कांड को अंजाम दिया गया। भक्तों को केवल संविधान नाम की किताब की पूजा से मतलब है उसमे क्या घुसाया व निकाला जा रहा है इसका होश ही नही है। आज ज्यादातर देशवासी भूंखे पेट नही सोते किसी भगवान परमात्मा की बजह से नही, बल्कि डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के द्वारा दिलाये गए हक़ अधिकारों ही खा पी कर सोते रहे है। खाद्यान् उत्पादन पांच गुना किसी भगवान ने नही बढ़ाया। ये सब कुछ संविधान व वर्णित अवसर व अधिकारों की बजह से ही सम्भव हो पाया है। ऐसे मे सत्ता कब्जाए लोगों द्वारा देश की एकता अखंडता संप्रभुता रक्षा की कशम खा कर विदेशियों के इशारे पर अंग्रेजो के बनाये कानून GST को संसद की मंजूरी दिलवाना देशद्रोही कृत्य नहीं है? ढ़ीठाइ की हद तो तब हो गई जब देश की हर समस्या की जड़ अंग्रेजों के उपयोग के लिए अंग्रेजों द्वारा बनाई गई कांग्रेस ही GST पर मोदी द्वारा अपनी नकल करने की बात प्रचारित करके अपनी ही पीठ थपथपा रही है। ऐसे मे क्या ये सत्ता कब्जाए "तुम शम पुरुष(मोदी) न मो सम नारी(सोनिया) वाले नेता देशवासियो को गधा मूर्ख नादान नही मानेगे तो क्या चतुर सुजान मानेगें? क्यों अपनी बेइज्जती कराते हो मियाँ।
ये जो तुम्हारे साथ अन्याय अत्याचार होता है न ये सब कराया जाता है।
ये जो आपकी गरीबी लाचारी है न ये सब सरकार ने कर रखी है किसी भगवान ने नहीं।
ये जो रोज सुबह शाम बस्ती मे झगड़ा फसाद व दारूबाजी सहित बच्चों औरतों पुरुषों की कुटाई होती है न ये😒 सब सरकार ने करवा रखी है। अपने आप इस दुनियां मे कुछ भी नही होता। हआ यदि भगवान है तो वह कोई और नही केवल सरकार है जो क़ि हमारे वोट से बनती है। बोलो किसे वोट दे रहे हो? औरतों के लिए दारू की दुकाने खुलवाने वाले मफलरमेंन को या संघी कांग्रेसियों को???
आजकल तो बब्बर को भेज कर नए चेहरे के साथ उल्लू बनाने की तैयारी है बाबू मुसाय कहीं लालच मे न आ जाना। नही तो पीढ़ियां थुकेंगी हमारे ऊपर।

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