अजी 😵सुनती हो विकास की मम्मी, तनि हमका भी भांग खिया द न, दुनियां मे बहुत गम है, फिर क्यों विकास की माँ बेदम हैं?
🎓🎓9*4*5🎓🎓🎓🎓🎓
विश्व बैंक और राष्ट्रीय कर्जा घड़ी (जी हां) के अनुसार, अभी तक हिन्दुस्तान उर्फ आर्य भारत के लोगों पर 5 शंख, 72 खरब, 50 अरब, 59 करोड़, 71 लाख,1 हजार रुपये से अधिक का विदेशी कर्ज लदा हुआ है।
~जिसमे से 36 खरब, 17 अरब, 40 करोड़, 41 लाख, 21 हजार, 410 रुपये से ज्यादा का तो केवल ब्याज ही है।~
जो क़ि प्रति सेकेंड 1 लाख 14 हजार 707 रुपये की दर से बढ़ रहा है।
जबकि ब्राह्मण भारत का कुल कमाई सहित सालाना बजट रुपये 13 शंख 63 खरब, 43 अरब, 47 करोड़, 98 लाख 16 हजार 200 सौ रुपये मात्र है। *(लगभग साढ़े 13 संख रुपये)
जिसका मतलब निकलता है क़ि संघिस्तानी भारत जिसकी कुल कमाई साढ़े तेरह शंख है, मे पौने छः शंख का तो केवल विदेशी कर्ज है।
जिसका मतलब हुआ कमाई अठन्नी खर्चा रुपैया।
अर्थात आपकी जेब मे पड़े प्रत्येक 100 रुपये मे से 42 रुपये तो विदेशियों से लिए गए उधार कर्जा के हैं।*
आप कहाँ खोये हुए हो?
कब चुकाओगे ये कर्ज?
अब आप संघी कांग्रेसियों द्वारा आधे तो विदेशियों के हाथों गिरवीं रखे जा ही चुके हो बस आधे की ही कसर बाकी है।
एक -दो बार और विकास के पापा, दीदी, चालक, कामरेड, भैया को विकास की जिम्मेदारी दे दो। आपका विकास स्वयं हो जायेगा।😡
आज प्रत्येक भारतीय पर केवल भारत भूमि पर पैदा होते ही अर्थात आपके घर मे दाइयों या नर्स द्वारा बच्चे का नार काटते ही, रुपये 44,209 से अधिक का कर्जा चड जाता है।
आपके घर मे कितने सदस्य हैं? जरा हिसाब तो लगाओ.×...
....
.....
🎓🎓9*4*5🎓🎓🎓🎓🎓
आप कह रहे हो क़ि भारत का विकास हो रहा है। विकास की माँ अर्थात हमारी भारत मां गर्भ से हैं।
कैसा विकास हो रहा है जी? 🤔जिसमे प्रति सेकेंड, 1 लाख 14 हजार 707 रुपये, आपका विदेशी कर्ज बढ ही रहा है???
क्या कर्ज लेकर लखनऊ कानपुर दिल्ली मेरठ पुना आदि मेट्रो बनाना चाहिए???
आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी "घर मे नहीं है दाना अम्मा चली भुंजाना"।
ऐसे मे जबकि आपका कर्ज सुरसा के मुंह की तरह बढ रहा है और जनाब फोर लेंन/ छः लाईन हाइवे एक्सप्रेस वे नाने मे लगे हुए हो। ये कैसा विकास है???
मल्टीप्लेक्स मल्टीस्टोरी बना कर विकास हो रहा बिना ये ख्याल किये क़ि हम आग के गोले पर खड़े हैं। जिसमे हर छड बिस्फोट दर विष्फोट हो रहे हैं। आप सोच रहे हो भारत का विकास हो रहा है।
अरे यदि विकास ही हो रहा है तो जैसे जैसे विकास होता है आपका नींद कहाँ चली जाती है?
दस दरवाजे भीतर जब चुहा कूदता है तो हृदय मुहं मे क्यों आ जाता है?
विकास किसका नदी नाले पहाड़ समुन्दर जमीन का होना चाहिए या इन्शान और इन्शानियत का?
देश मे हो रही बेमौशम बर्षात और सूखे से परेशान किसान मर रहे हैं और आप हर साल 328 मिलियन हेक्टेयर का 15 से 20 प्रतिशत उपजाऊ जमीन को बिल्डिंग और 6 लेन 8 लेन सड़क मे बर्बाद कर हो। क्या जरूरत है दो लेन से भी तो काम चल ही रहा है। क्या जरूरत है गांव को उजाड़ने की। हरे भरे दरख्त काटे जा रहे है। ये कैसा विकास हो रहा है, विकास के पापा?
सांस कैसे लोगे क्या ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जिओगे?
ये कैसा विकास हो रहा है, विकास के भैया दीदी???
बस☝ तूं रहन दे, तेरे से नहीं होगा।
69 साल से भारत माँ को प्रसवपीडा के नाम से टू फिंगर- थ्री फिंगर मचा कर रखा है😡। ऐसा करके धीरे धीरे भारत माँ के अंतर्वस्त्र उतार कर नंगा और जलील ही तो किया जा रहा है।
आखिर कब तक भारत माँ के लाल अपनी माँ की इज्जत उतरवाते रहेगें इन विकास के दलाल भडुओं से????
सामान्यतया 280 दिन मे तो कोई भी माँ बन ही जाता है। अंग्रेजों ने मात्र 100 साल मे संघीयों द्वारा की गई 2800 साल की कारगुजारियों को खत्म कर दिया। लेकिन आप कह रहे हो क़ि विकास हो रहा है, तो कब आपकी रोटी की जुगाड़ हो रही है? आखिर कब तक यूँ ही विकास कराते रहोगे?
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राणा के चेतक के पास तो एक ही होर्स की शक्ति थी, तब वो हवा से बाते करता था और तुम्हारे पास तो दर्जनों घोड़ों की पावर है, फिर भी तुम्हारी हवा क्यों निकल जा रही है? कहीं वह संघी राष्ट्रवाद (नस्लवाद) तो नही???? जिसकी बजह से आपकी हालत खराब हो रही है। यदि नहीं सुधरे तो आगे से पतलूम गीली पीछे से पीली होने से कोई नही रोक सकता फिर चाहे वह झामसेफ हो या कोई भी जातिगत पार्टी। क्योंकि अक्ल बड़ी होती है भैंस नहीं।
भवतु सब्ब मंगलं
नमो भारत जय भूमि
http://www.nationaldebtclocks.org/debtclock/india
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विश्व बैंक और राष्ट्रीय कर्जा घड़ी (जी हां) के अनुसार, अभी तक हिन्दुस्तान उर्फ आर्य भारत के लोगों पर 5 शंख, 72 खरब, 50 अरब, 59 करोड़, 71 लाख,1 हजार रुपये से अधिक का विदेशी कर्ज लदा हुआ है।
~जिसमे से 36 खरब, 17 अरब, 40 करोड़, 41 लाख, 21 हजार, 410 रुपये से ज्यादा का तो केवल ब्याज ही है।~
जो क़ि प्रति सेकेंड 1 लाख 14 हजार 707 रुपये की दर से बढ़ रहा है।
जबकि ब्राह्मण भारत का कुल कमाई सहित सालाना बजट रुपये 13 शंख 63 खरब, 43 अरब, 47 करोड़, 98 लाख 16 हजार 200 सौ रुपये मात्र है। *(लगभग साढ़े 13 संख रुपये)
जिसका मतलब निकलता है क़ि संघिस्तानी भारत जिसकी कुल कमाई साढ़े तेरह शंख है, मे पौने छः शंख का तो केवल विदेशी कर्ज है।
जिसका मतलब हुआ कमाई अठन्नी खर्चा रुपैया।
अर्थात आपकी जेब मे पड़े प्रत्येक 100 रुपये मे से 42 रुपये तो विदेशियों से लिए गए उधार कर्जा के हैं।*
आप कहाँ खोये हुए हो?
कब चुकाओगे ये कर्ज?
अब आप संघी कांग्रेसियों द्वारा आधे तो विदेशियों के हाथों गिरवीं रखे जा ही चुके हो बस आधे की ही कसर बाकी है।
एक -दो बार और विकास के पापा, दीदी, चालक, कामरेड, भैया को विकास की जिम्मेदारी दे दो। आपका विकास स्वयं हो जायेगा।😡
आज प्रत्येक भारतीय पर केवल भारत भूमि पर पैदा होते ही अर्थात आपके घर मे दाइयों या नर्स द्वारा बच्चे का नार काटते ही, रुपये 44,209 से अधिक का कर्जा चड जाता है।
आपके घर मे कितने सदस्य हैं? जरा हिसाब तो लगाओ.×...
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आप कह रहे हो क़ि भारत का विकास हो रहा है। विकास की माँ अर्थात हमारी भारत मां गर्भ से हैं।
कैसा विकास हो रहा है जी? 🤔जिसमे प्रति सेकेंड, 1 लाख 14 हजार 707 रुपये, आपका विदेशी कर्ज बढ ही रहा है???
क्या कर्ज लेकर लखनऊ कानपुर दिल्ली मेरठ पुना आदि मेट्रो बनाना चाहिए???
आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी "घर मे नहीं है दाना अम्मा चली भुंजाना"।
ऐसे मे जबकि आपका कर्ज सुरसा के मुंह की तरह बढ रहा है और जनाब फोर लेंन/ छः लाईन हाइवे एक्सप्रेस वे नाने मे लगे हुए हो। ये कैसा विकास है???
मल्टीप्लेक्स मल्टीस्टोरी बना कर विकास हो रहा बिना ये ख्याल किये क़ि हम आग के गोले पर खड़े हैं। जिसमे हर छड बिस्फोट दर विष्फोट हो रहे हैं। आप सोच रहे हो भारत का विकास हो रहा है।
अरे यदि विकास ही हो रहा है तो जैसे जैसे विकास होता है आपका नींद कहाँ चली जाती है?
दस दरवाजे भीतर जब चुहा कूदता है तो हृदय मुहं मे क्यों आ जाता है?
विकास किसका नदी नाले पहाड़ समुन्दर जमीन का होना चाहिए या इन्शान और इन्शानियत का?
देश मे हो रही बेमौशम बर्षात और सूखे से परेशान किसान मर रहे हैं और आप हर साल 328 मिलियन हेक्टेयर का 15 से 20 प्रतिशत उपजाऊ जमीन को बिल्डिंग और 6 लेन 8 लेन सड़क मे बर्बाद कर हो। क्या जरूरत है दो लेन से भी तो काम चल ही रहा है। क्या जरूरत है गांव को उजाड़ने की। हरे भरे दरख्त काटे जा रहे है। ये कैसा विकास हो रहा है, विकास के पापा?
सांस कैसे लोगे क्या ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जिओगे?
ये कैसा विकास हो रहा है, विकास के भैया दीदी???
बस☝ तूं रहन दे, तेरे से नहीं होगा।
69 साल से भारत माँ को प्रसवपीडा के नाम से टू फिंगर- थ्री फिंगर मचा कर रखा है😡। ऐसा करके धीरे धीरे भारत माँ के अंतर्वस्त्र उतार कर नंगा और जलील ही तो किया जा रहा है।
आखिर कब तक भारत माँ के लाल अपनी माँ की इज्जत उतरवाते रहेगें इन विकास के दलाल भडुओं से????
सामान्यतया 280 दिन मे तो कोई भी माँ बन ही जाता है। अंग्रेजों ने मात्र 100 साल मे संघीयों द्वारा की गई 2800 साल की कारगुजारियों को खत्म कर दिया। लेकिन आप कह रहे हो क़ि विकास हो रहा है, तो कब आपकी रोटी की जुगाड़ हो रही है? आखिर कब तक यूँ ही विकास कराते रहोगे?
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राणा के चेतक के पास तो एक ही होर्स की शक्ति थी, तब वो हवा से बाते करता था और तुम्हारे पास तो दर्जनों घोड़ों की पावर है, फिर भी तुम्हारी हवा क्यों निकल जा रही है? कहीं वह संघी राष्ट्रवाद (नस्लवाद) तो नही???? जिसकी बजह से आपकी हालत खराब हो रही है। यदि नहीं सुधरे तो आगे से पतलूम गीली पीछे से पीली होने से कोई नही रोक सकता फिर चाहे वह झामसेफ हो या कोई भी जातिगत पार्टी। क्योंकि अक्ल बड़ी होती है भैंस नहीं।
भवतु सब्ब मंगलं
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