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नारी सशक्तिकरण या स्टेट द्वारा स्त्री जाति का धरती से निपटान-एक विमर्श

 

नारी सशक्तिकरण का रायता पूरे देश में फैला है। ऐसे में जबकि स्त्री को पुरुष के खिलाफ misuse किया जा रहा है नारी सशक्तिकरण की हकीकत को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। ध्यान रहे यह लेख किसी स्त्री या राष्ट्र के विपरीत नहीं सम्यक शैक्षणिक विश्लेषण मात्र है।

सवाल यह उठता है कि आखिर नारी सशक्तिकरण है क्या।

1- हम सशक्त महिला कहते किसे हैं। क्या सशक्त महिला वह है जो पुरुषों जैसे परिधान पहनती हैं 

2- क्या सशक्त महिला वह है जो पुरुषों के तौर तरीकों की नकल करती है।

3- क्या सशक्त महिला वह है जो पुरुषों की मानसिकता को आत्मार्पित कर रही हैं।

4- क्या सशक्त महिला वह है जिसके प्रजनन अंग भी गाली गलौज के शिकार हैं। 

उक्त सभी सवाल तब और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब नारियों माताओं बहनों पत्नी नानी दादी आदि भी भूमिका "स्टेट" स्वयं निभा रहा हो। नारी तभी सशक्त बन सकती है जब नारी का स्त्रीत्व सम्मानित हो। अन्यथा यह बेहद गंभीर छलावा है कि एक तरफ़ नारी सशक्तिकरण के नाम से नारी शरीर का हथियार की इस्तेमाल करके घर परिवार तोड़े जाते रहें दूसरी ओर स्टेट स्वयं कृत्रिम गर्भाधान, टेस्ट ट्यूब बेबी, कृत्रिम बच्चेदानी, कृत्रिम बीबी , कृत्रिम... मदर मिल्क बैंक, सरोगेसी आदि सभी कुछ बाजार में उतारने में व्यस्त हो। उक्त सब चीजे आपको स्वयं बाजार में होती हुई नजर आ रही हैं?

क्योंकि

1- नारी सशक्तिकरण वह नहीं है कि नानी दादी मां पत्नी मौसी आदि की जगह होटल वाला खाना बनाए। फिर हम hygiene और स्वाद खोजें, तो मूर्ख कौन?

 होटल लाभ के लिए बनाए जाते हैं न कि care के लिए। लोगों की दारू के ठेकों में आवाजाही और नशे के कारोबार से हो रही "राष्ट्र" की आमदनी इस बात का प्रमाण है कि समाज में नारीत्व बेइज्जत है। नर नारियां स्थायित्व के लिए किसी के भी साथ और किसी भी दर पर व्यभिचार पर उतारू हैं। यह देश वासियों का चारित्रिक पतन अनायास ही नहीं है।

2- नारी सशक्तिकरण वह भी नहीं जहां सही गलत का निर्धारण स्कूल कालेज यूनिवर्सिटी के नाम से "राष्ट्र" करे। परंपराओं से अर्जित ज्ञान विज्ञान सामाजिकता टीवी अखबार सोशल मीडिया खा जा रहे ऐसे में परिवार द्वारा एक साथ बैठ कर होने वाली बातों के आदानप्रदान व्यर्थ नहीं था। जिसे आज हम कैडर कहते हैं वह स्वयं परिवार की बैठकों में हुआ करता था। इससे अर्जित ज्ञान का आदान प्रदान ही तो हमे परिवारवाला बनाता है। यह परिवार विखंडन का सूचक ही बच्चा जेल, संवासिनी गृह, विधवा आश्रम, वृद्धा आश्रम, नशा आश्रम आदि हैं जिनमें कैद नर नारी बच्चे उक्त साजिशकर्ताओं का जीता जगता उदाहरण है। यह ही वह कारण है जिन के कारण आर्थिक रूप से परित्यक्त परिवार का व्यक्ति बोझ समान बन जा रहा इसी पर तमाम वृद्धा आश्रम संवासिनी गृह बच्चा जेल आदि फल फूल रहे। इस बात को नजरअंदाज हम इसलिए करते आए हैं क्योंकि राष्ट्र ने हमें जन्म से ही ब्रेनवाश किया हुआ है। हमें सवर्ण बनाम अवर्ण, समाजवाद बनाम पूंजीवाद आदि से पहले अपनी जड़ों से उखाड़ा गया है तब जा कर ब्रेनवाश किया गया उसके बाद तमाम वाद और पार्टियों द्वारा हथियारबद्ध किया गया है।

3- नारी सशक्तिकरण वह भी नहीं है जहां नाना नानी दादा दादी आदि की जगह व्यक्ति काउंसिल सेंटर्स दवा इलाज एहतियातन की जगह डॉक्टर नर्स पैरामेडिक की मदद लेने को मजबूर हो। ध्यान रहे इनकी जरूरत extreme पर होनी चाहिए न कि प्राथमिक उपचार के दौर में ही। 

क्योंकि रोगों का इलाज दवाखाने में नहीं किचन में है। किचन की तबाही ही अस्पतालों में मरीजों के रूप में पसरी हुई है।

4- नारी सशक्तिकरण वह भी नहीं जहां बीबी की जगह रोबोट का इस्तेमाल और उपलब्धता "स्टेट" सुनिश्चित करने में जुटा हो।

5- नारी सशक्तिकरण वह भी नहीं जहां घरेलू कहासुनी झगड़ा फसाद का निपटारा के लिए घर परिवार की बैठकों, गांव के बड़े बुजुर्गों के आदेश ठुकरा कर थाने पुलिस अदालती गुंडों की शरण में करोड़ों देशवासी फसाएं का चुके हों। क्योंकि हमारे देशवासियों का दिमाग खराब किया हुआ है जहां हमें यह नहीं समझ आता कि कोर्ट कचहरी थाना अदालत जज वकील आदि सब क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का हिस्सा हैं। अर्थात इसी सिस्टम द्वारा क्राइम और क्रिमिनल को just (वाजिब) ठहराया जाता रहा है। जहां कैदियों हेतु जेले यातनागृह जैसी हैं वहीं "राष्ट्र" के लिए यह जेल उद्योग का दर्जा प्राप्त हैं। यह फैक्ट हैं। गूगल करके देख सकते हो।

इसलिए नारी सशक्तिकरण के नाम पर जो भी नर नारी गुमराह होंगे उनके घर परिवार तबाह होने से कोई नहीं बचा सकता। फिर मत कहना कि मेरी वाली ने तो लाश बोरे में भर कर फेंक दी। चार चार बच्चों की मम्मी युवक के साथ भाग गई। स्कूल कॉलेजों के बाहर काम वासना का कारोबार इसी नारी सशक्तिकरण की देन है।

इस नारी सशक्तिकरण में अब चार चांद लगाए जा रहे ट्रांसजेंडर आंदोलन द्वारा। इस ट्रांसजेंडर आंदोलन द्वारा जहां नारियों और स्त्रीत्व की दुर्गति सुनिश्चित की जा रही वहीं मेडिकल उद्योग के लिए ट्रांसप्लांट के रूप में कच्चमाल भी उपलब्ध कराया जा रहा। यह कच्चामाल वरदान साबित होना तय फार्मा उद्योग के लिए। इस संपूर्ण खेल में नारियों का संपूर्ण उजाड़ निश्चित है। नारी एक अलग तरह की ऊर्जा से बनी है अगर नारी उक्त बिंदु 1- 5 तक के चंगुल में फसेगी तो अपना स्त्रीत्व भी गवाएगी और स्तन गर्भाशय आदि भी। जो स्वयं वैक्सीन उद्योग के साथ ही eugenics आंदोलन को चरणबद्ध तरह से आगे बढ़ाती लाई है। लड़कियों की घटती औसत ऊंचाई इसी षडयंत्र की देन है।

 होश में नहीं आओगे तो झेलना भी आप ही को है।

मैने अपना मौलिक कर्तव्य पूरा कर दिया।

डॉ बाबासाहब अंबेडकर जन्मदिन के उपलक्ष्य में संपूर्ण भारत को समर्पित बहुमूल्य कृति।

जय भारत भूमि 🇮🇳जयभीम♈☸️

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