१- भगवान बुद्ध का उक्त कुशल काम कालांतर में उत्तर प्रदेश की धरती पर बहुजन समाज बना बहुजनों के कल्याण में जितना आदि कल्याण मध्य कल्याण अंत कल्याण क़ारी साबित हुआ हम सभी जानते हैं। आज के दिन हमारा मान सम्मान अभिमान सभी भगवान बुद्ध के उक्त उपदेश का ही फल रहा है जिसका माध्यम मान्यवर कांशीराम जी रहे हैं।
२- कार्तिक पूर्णिमा का दिन बौद्ध जगत में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देवानाप्रिय सम्राट अशोक महान ने अपनी बेटी संघमित्ता को भारत से बोधी वृक्ष ले जाकर अनुराधापुरम (श्रीलंका) रोपित करने का पावन काम किया था। यह बात हम सबके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अपने बच्चों को धम्म के काम में दान कर देना जन्म जन्म के पापों का अंत करने में सार्थक रही है। जहां आज मैं और मेरा की ही लड़ाई चारों ओर दिख रही हो ऐसे में बहुजन हिताय अपने बेटी बेटा का दान बहुत ही कल्याणकारी और पुण्य का काम है। सम्राट अशोक का यह कदम इतना क्रांतिकारी था जिसने पहली बार बौद्ध धम्म का भौगोलिक विस्तार कर देश विदेश तक बहुजन हिताय बहुजन सुखाए का संदेश पहुंचाने में सफलता पाई थी। मेरे लिए यह कदम आज के समय इसलिए बेहद श्रद्धा का विषय है क्योंकि बोधी वृक्ष की पावन श्रीलंका की भूमि में स्थापना के कारण ही लॉर्ड कनिंघम को हूबहू वही बोधी वृक्ष पुनः पावन महाबोधि टेंपल में स्थापना का शौभाग्य प्राप्त हुआ था। अगर अय्या संघमित्ता ने उक्त पुण्य का काम न किया होता तो शायद हम पवित्र बोधी वृक्ष भी खो दिए होते। यह बोधी वृक्ष आज भी "बोधआया" के पवित्र मंदिर परिसर में स्थापित है। आज भी करोणों भारतीयों और विदेशी धम्म भाई - बहनों की जीवन रेखा यही बोधी वृक्ष बना हुआ है। पूरे विश्व में बौद्ध धम्म का संचालन यही बोधी वृक्ष से ही संभव हुआ है।
यह वही बोधी वृक्ष है जिसने भाषा रंग नस्ल वंश क्षेत्र कद आकर प्रकार की दीवारों को गिरा भारत से पूरे विश्व को जोड़ वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना को साकार किया हुआ है। यह कोई किस्सा कहानी नहीं आज की सच्चाई है।
इसलिए आज के दिन हम सभी को पावन कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ऊपोसत वृत रखना चाहिए। अपने घरों में समता के जनक भगवान बुद्ध की पूजा बंदना करनी चाहिए। नजदीकी बौद्ध विहार में दान करना चाहिए। घरों में स्वादिष्ट खीर बना दान /सेवन करना चाहिए। नजदीक में हो रही बुद्ध कथा का श्रवण कर आपसी भ्रातत्व भाव की जागृति करनी चाहिए। ऐसा कर हम भगवान बुद्ध और बाबासाहब के बताए मार्ग का अनुसरण कर रहे होने से सभी का कल्याण सुनिश्चित है। इस प्रकार हम पावन कार्तिक पूर्णिमा का अपने जीवन में समावेश कर जन्म जन्म की बुराइयों से निजात पा सकते हैं।
अंत में आप सभी को पुनः पावन बुद्धमयी कार्तिक पूर्णिमा की बहुत बहुत शुभकामनाएं

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