आज विमर्श करना चाहूंगा पित्ताशय पर।
वैसे वात पित्त कफ त्रिगुणों पर पूरा आयुर्वेद केंद्रित है। जिस पर भारत सरकार का एक पूरा आयुष मंत्रालय सेवारत है जिससे इस वात पित्त कफ की वृहदता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिस परंपरागत तौर में मैं अभी कुछ भी नहीं कहूंगा।
आज बात होगी अक्सर भारत में पित्त की पथरी की समस्या के कारण होने वाले ऑपरेशन और उस दौरान प्रयोग किए जाने वाले एक शब्द Cholecystectomy पर जो बना है Latin भाषा के शब्द से। अर्थात cholecystomy शब्द तीन अलग अलग भाषाओं के शब्दों को मिलकर बनाया गया है। जो हैं chole दूसरा है cyst और तीसरा है ectomy ग्रीक भाषा का शब्द chole लैटिन भाषा में से नकल किया गया है जहां chole शब्द बन गया kholi जो पुनः भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार के शब्द "ghel" से बना हुआ है जिसका मतलब होता है "shine" चमक वह भी विशेषकर हरी या पीले रंग की जो होती है पित्त का मूल रंग है पित्त और पित्त की थैली का।
वहीं दूसरा शब्द जो उक्त Cholecystectomy का अंग है। वह शब्द है cyst जो लैटिन भाषा में cyst कहलाता है जबकि ग्रीक भाषा "kystis" जिसका मतलब होता है bag/ झोला or "bladder or pouch or vesicles of animal body". ऐसा झोला जिसमें पित्त बनता है।
अब बारी है अंतिम तीसरे शब्द "ectomy" की।जिसका तात्पर्य उच्छेद या removal या surgery.यह ectomy शब्द Latinized form of Greek word "ektomia" से कॉपी पेस्ट किया गया है। जिसका मतलब होता है "a cutting out of," इस ektemnein शब्द का prefix "ek" का मतलब होता है "out". अर्थात उच्छेद या removal निष्कर्ष1- इस तरह आप देखेंगे कि हम जिसे आम बोलचाल की भाषा में पित्ताशय का ऑपरेशन अर्थात Cholecystectomyकह लेते हैं वह तीन अलग अलग मूल शब्दों से मिलाकर बनाया गया है। यह तीनों मूल शब्द स्वयं कई अन्य छोटे छोटे शब्दों और अक्षरों को जोड़ घटा कर बनाए गए हैं।
2- यह Cholecystectomy शब्द किसी एक ही भाषा का शब्द नहीं है। इसमें ग्रीक लैटिन संस्कृत हिंदी जर्मन आदि भाषाओं को मिलाकर जमालगोटा तैयार किया गया है।
3- इस तरह अलग अलग भाषाओं और अलग अलग क्षेत्रों और प्रयोग कालों के अंतर को तोड मरोड़ एक नया कह कर शब्द उतारा गया जिसे हमारे डॉक्टरों ने रटा। फिर उसे यहां वहां यूजर से अधिक जानकार समझदार साबित करने की नियति से प्रयोग करते हैं। जिस कारण हमारे सूझबूझ को चुनौती मिलते ही हम स्वयं को ढक्कन और सफेद कोट वालों को संज्ञानी मान लेते हैं। इस प्रकार काला जादू पूरी मानवता को अपनी गिरफ्त में लिए हुए है। यह किसी एक logy की बात नहीं सभी विद्याओं में इसी प्रकार खुराफात कर आम नागरिकों पर नियंत्रण हासिल किया हुआ है। जो बहुत बहुत बहुत बड़ी और शातिराना बात है।चूंकि मैं शब्दभेदी हूं इसलिए यह सब समझ आता है अन्य नागरिक इसी शब्दजाल के कैदी होने से आज्ञाकारी और बनावटी बने हुए हैं।तथागत भगवान बुद्ध की प्रज्ञा सागर में से आज एक बूंद आपको भी दान देता हूं।May all beings be happy and peaceful ☸️🙏


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