अक्सर हमने कम्युनिस्टो से सुना और उनका लिखा हुआ पढ़ा है कि कार्ल मार्क्स ने लिखा था कि "धर्म अफीम है।"
लेकिन जब मैने इस तथ्य की गहन पड़ताल की तो कार्ल मार्क्स रचित पुस्तक Marx, A Contribution to the Critique of Hegel's Philosophy of Right (1843-44) के पेज संख्या १ पर निम्न बात लिखी हुई पाई "Religious suffering is, at one and the same time, the expression of real suffering and a protest against real suffering. Religion is the sigh of the oppressed creature, the heart of a heartless world, and the soul of soulless conditions. It is the opium of the people." अर्थात धार्मिक पीड़ा है, एक ही समय में, वास्तविक पीड़ा की "अभिव्यक्ति" और वास्तविक पीड़ा के "विरुद्ध विरोध" दोनों है। धर्म उत्पीड़ित प्राणीयों की "आह" है, हृदयविहीन संसार का "हृदय" है, और आत्मा विहीन परिस्थितियों की "आत्मा" है। यह लोगों की अफीम "(दवा)" है।
ज्ञात रहे कि अफीम पाषाणकाल से ही दवा के रूप में जानी जाती रही है। अफीम के तेल आदि उत्पाद आदि बेहद खतरनाक रोगों में भी कारगर दवाई रहे हैं। जिसकी कार्य दक्षता को देखते हुए ही इस पर प्रतिबंध 1929 से लगवाया जाना शुरू किया गया था। भारत में स्वयं नारकोटिक अधिनियम 1985 में बनाया गया था। इस अफीम की आवाजाही पर रोक 1988 में लगाई गई थी।
उक्त अफीम वाली बात के इर्दगिर्द ही अंबेडकरवाद लोहियावाद समाजवाद आदि भी घूमता दिखाई पड़ता है।
मगर यक्ष प्रश्न यह कि क्या मूल स्रोत में अंग्रेजी में कही हुई बात और उसका हिंदी अनुवाद धर्म को अफीम अर्थात नशा या जहर या हम भारत के लोगों हेतु सत्यानाश की जड़ ही साबित कर रहा है? आपको आज के परिवेश में हो सके उक्त सब बातें गैर जरूरी लगें क्योंकि आज धर्म के नाम से केवल धंधेबाजी और सांप्रदायिक उन्माद मात्र दिख रहा है।
नोट -ध्यान यह रहे कि अफीम पर प्रतिबंध 1929 में Weimar Republic law द्वारा थोपा गया था जबकि कार्ल मार्क्स उक्त बात 1843- 44 में लिख चुका था। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि कार्ल मार्क्स ने धर्म को अफीम अर्थात नशा/ जहर कहा था। इतने लंबे कालखंड में अलग अलग लोगों द्वारा कही गई बातें परस्पर विरोधी और भ्रामक हो गई।
अब बताओ क्या धर्म को वाकई में अफीम कहा है कार्ल मार्क्स ने? इसलिए यह डंके की चोट पर मै कहता हूं कि कार्ल मार्क्स ने धर्म को नशा नहीं दवा कहा था। कार्ल मार्क्स ने धर्म को पीड़ितों का मलहम कहा था।
उम्मीद है यह बात आप अपनी पढ़ाई से इतर ज्ञान चक्षुओं द्वारा अपनी आंखों से दिख रही सच्चाई को जान समझ पाएंगे।
जय भारत भूमि

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