मोदी का मेड इन इंडिया :बंदे मातरम या धंधे मातरम
क्या लाल किले की प्राचीर से मोदी का मेड इन इंडिया के नाम से विदेशियों को भारत मे पूँजी लगाने के लिये बुलाना ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत मे बुलाना नहीं है? जो विदेशी भारत आयेंगे वो क्या खैरात बांटने आयेंगे ? क्या वो यहा के लोगों के खून पसीने की कमाई को अपने मूल देश नहीं ले जायेंगे? तो भारत मे बचेगा क्या बाबाजी का ठुल्लू। क्या कॉंग्रेस की एफ0 डी० आइ० से भा०ज०पा० /आर०एस०एस० या मोदी की एफ0 डी०आइ० अलग है तो कैसे? यदि नहीं तो दोनो नागनाथ और साँपनाथ है। इससे ऐसा कहा जा सकता है कि दोनो पार्टियों का एक मात्र उद्देश्य भारत को लूट या लुटाकर भारत को पुनः पहले अपना बाद मे दोष मढने के लिये अपने भाई विदेशियों के हाथों गुलाम बना देना ताकि नीच जातियों/शोषित जनता पर निरंकुस शासन किया जा सके? क्या स्वदेशी का राग अलापना विदेशियों को न्योता देना देश द्रोह नहीं है। क्या बंदे मातरम कहते हुई धंधे मातरम का आचरण, राष्ट्र प्रेम कहा जा सकता है? क्या माँ का धंधा करने वालों को भडुआ कहना सही नहीं है? अबकी बार भडुआ सरकार।

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