भारत मे बहुजनो की बहुजनो के साथ धोखेबाजी : कारण एवं निवारण
आधुनिक भारत मे सभी शोसिट / शासित जातियाँ बहुजन समाज के नाम से जानी जाती है . हमारे पुरखो के द्वारा लगातार संघर्स के परिणाम स्वरुउप बहुजानो का जानवरों से बदतर जीवन २६ जनवरी १९५० को इंसान बना . इसके पीछे रास्ट्रपिता ज्योति राव फूले, शाहूजी महराज एवं बाबासाहेब अंबेडकर कायोगदान अद्वितीय है . भारत का संविधान लागू होते ही सैकडो साल पुरानी अमानवीय, बर्बर एवं दुखदाई ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्थाजाति व्यवस्था का अंत संविधानिक तौर पर हो गया . जिसको बाबासाहेब ने संविधान सौपते हुए संसद् मे कहा भी कि कोई भी संविधान अच्छे से बुरा और बुरे से अच्छा तभी साबित हो सकता है यदि उसका अनुपालन करने वाले यानी शासक वर्ग कैसा है . संविधान प्रदत्त अधिकारों एवं संरक्षणों के द्वारा पाशविक धर्म जो कि कार्य वितरण एवं दैवीय गुलामी पर आधारित है, को बहुत बड़ा झटका लगा . इसके साथ ही साथ मनुवादियों ने संविधान प्रदत्त अधिकारो पर कुठाराघात करना और तेज कर दिया . संविधानिक अधिकारों एवं संरक्षणो किलड़ाई अग्रेजी शासनकाल मे राष्ट्रपिता ज्योतिराव फूले एवं राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले ने सत्य शोधक समाज की स्थापना करके की जिससे डरकर स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की इस्तापना 1875 मे करके यज्ञ (अश्वमेध, गोमेध, नरमेध) को पुनर्जीवित कर कहा "चलो वेदों की ओर" जिससे वेद आधारित वर्ण व्यवस्था को पुनः स्थापित किया . फूलेकृत सत्य शोधक समाज के भास्कर राव जाधव एवं
बाबासाहेब आंबेडकर के संयुक्त संघर्ष द्वारा माण्टेग्यू- चेम्सफोर्ड सुधारो मे समस्त विधि मण्डलों मे शूद्रो एवं अछूतों के प्रतिनिधित्व की माँग उठाई परिणाम स्वरूप बाल गंगा धर तिलक ने कोल्हापुर रियासत के अधनी गाँव मे कहा कि क्या तेली, तमोली और कुणभट संसद और विधि मण्डलों मे जाकर हल चलायेगे संसद कोई भूमि है क्या ? इसके बावजूत अंग्रेज़ों ने भारत सरकार अधिनियम -1919 पास कर शूद्रों/ अछूतों को विधिमण्डलों मे प्रतिनिधित्व अथवा आरक्षण इस शर्त के साथ सुनिश्चित् किया कि अँग्रेज़ सरकार हर १० साल मे समीक्षा करके यह जानेगी कि शूद्रों/ अछूतो को समुचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है कि नहीं जिसके परिणाम स्वरुप 1928 मे साइमन कमिशन जॉन साइमन और क्लीमेंट एटली के रूप मे भारत आया जिसमे कॉंग्रेस/ गाँधी ने साइमन वापस जाओ का नारा यह कहते हुए लगाया कि साइमन कमिशन मे कोई भी भारतीय नहीं है . त्रस्त होकर अंग्रेंजो ने लंदन मे तीन गोलमेज सम्मेलन 1930-32 तक आयोजित किये तब ये सवाल उठा कि गोरे किसे गोलमेज सम्मेलन मे बुलाये परिणाम स्वरुप अंग्रेंजो ने जिन्ना (मुस्लिम लीग), गाँधी (कॉंग्रेस) औरबाबासाहेब आम्बेडकर को अछूतो का प्रतिनिधि मानकर बुलाया लेकिन गाँधीजी यह कहते हुए प्रथम सम्मेलन मे सम्मिलित नहीं कीअछूतो का प्रतिनिधि आम्बेडकर कि शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन नहीं बल्कि कॉंग्रेस है . जिसके बाद पूरे भारत से बाबासाहेब के समर्थन मेप़त्र / तार भेजे गये इस काम का नेत्रत्व कानपुर मे स्वामी अछूतानंद कर रहे थे . वही पंजाब से चूड़ा समाज ने बाबासाहेब को संबोधित अपने खून से लिख कर प़त्र भेजे इन सभी प्रमाणो के साथ बाबासाहेब ने 1911 की जनगणना आकड़ों के साथ प्रमाणित किया की वो ही अछूतो के सच्चे प्रतिनिधि है . वही द्वतीय गोल मेज सम्मेलन मे गांधीजी अपने लाव लस्कर (बकरी ) के साथ लंडन पहुचे . उसके बाद भी गाँधी सॅडयंत्र करने से बाज नहीं आय और कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर जिन्ना को यह कहते हुई समर्थन दिया कि आप मुझे यह विश्वाश दिलाओ कि आम्बेडकर का आप विरोध करोगे परंतु जिन्ना ने ऐशा नहीं किया लेकिन वो पत्र आज भी उपलब्ध है . अपनी कोई भी तिकणम नहीं चलते देख गाँधी त्रतीय गोल मेज सम्मेलन मे नहीं गये और जब उन्हे ये लगा की अंग्रेज़ बाबासाहेब की बात मान लेंगे तो ऐलान किया कि म़ें ब्राह्मण धर्म की रक्षा के लिये प्राणो की बाजी लगा दूँगा. जिससे घबराकर अंग्रेंजो ने भारत लौटे गाँधी को यरवदा जेल मे ठेल दिया . त्रतीय गोल मेज सम्मेलन मे अंग्रेंजों ने 17 अगस्त 1932 को अंग्रेंजों ने अछूतों को ब्राह्मण धर्म से आजादी दिलाई परंतु पराजित गाँधी ने ऐलान किया मे आज से अपना आमरण अनसन शुरू करता हूँ. परिणाम स्वरूप पुरे देश मे अछूतों की जान माल को जबरदस्त नुकसान पहुँचाया गया. इसके साथ ही साथ बाबासाहेब के उपर भी जानलेवा हमले हुए साथ ही धमकी दी कि यदि उन्होने पूना पॅक्ट स्वीकार नहीं किया तो पुरे देश से अछूतो को खत्म कर देंगे. जिसके दबाब मे बाबासाहेब को मजबूरन 24 सितंबर 1932 को पूना शह्र मे पॅक्ट करना पड़ा जिसे पूना पॅक्ट कहते है. जिसकी बजह से अंग्रेजो द्वारा प्राप्त अधिकार जिनका विवरण निम्न प्रकार है.-
1- निर्वाचन कॉलेज
2- दो वोटों का अधिकार
3- प्रथक़ निर्वाचन क्षेत्र
4- लोक संख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व
5- वयस्क मताधिकार
इस पूना पॅक्ट के होते ही दो वोटों का अधिकार, प्रथक निर्वाचन क्षेत्र और बाद मे निर्वाचन कॉलेज जैसे मूलभूत अधिकार गाँधी ने प्राणो क़ी बाजी लगाके छीन लिये परंतु इसका परिणाम क्या हुआ. बाबासाहेब कहते है This will be much worse under the systm of JOINT ELECTORATE and reserve seat which will be here after become operative under the term of poona pact. This is no more speculation, this is no mere speculation, the last election has conclusively proved that the scheduled caste can be completely DISFRENCHIZED in joint electorate.
बाबासाहेब आगे कहते है The joint electorate is from the point of caste hindu to use a familiar face a rotten boroughs in which the caste hindu get the right to nominate an untouchable to set normally as a representative of the untouchable but really as a TOOL OF CASTE HINDU.
परिणामत्या समस्त अछूतो के प्रतिनिधि, प्रतिनिधित्व विहीन हो गये कालांतर मे गाँधी और कॉंग्रेस ने निर्वचन कॉलेज क़ी व्यवस्था को भी खत्म कर party हाइ कमान को सर्वोच्च और लोकतंत्र के लोक को लुप्त कर सम्पूर्ण लोकतंत्र को जोकतंत्र बना डाला. लोक तंत्र को डेमॉक्रेसी भी कहते है गान्धीवादी ब्राह्मणों ने इस डेमॉक्रेसी को ब्राह्मणोक्रॅसी मे तब्दील कर दिया. प्रतिनिधित्व विहीन प्रतिनिधि टिकट लेने के लिये हाइ कमान के तलवे चाटने सहित समाज का मान सम्मान गिरवी रखना शुरू कर दिया. समाज सोचता ये मेरा नेता / प्रतिनिधि है हमारे लिये काम करेगा लेकिन नेता सोचता कि मे हाइ कमान का प्रतिनिधि, समाज सोचता मेरा प्रतिनिधि लेकिन प्रतिनिधि पूरी तरह से बजरंगबली हो गया हाइकमान का. इसी गफलत ने स्वार्थ सिद्धि को जबरदस्त बढ़ावा दिया जिससे होकर ही भ्रसटाचार क़ी वैतरणी पार करना शुरू हुआ. इसका परिणाम हुआ कि-
१- पूना पॅक्ट ने नेताओ को muk बधिर बना दिया.
2- पूरा समाज जुझारू नेत्रत्व खत्म हुआ.
3- ऐशा होते ही sansad विधायक को प्रदान की गई लिखने, बोलने और जानवरों की तरह से रांम्भाने /रेंकने की आज़ादी भी खो दी.
फलस्वरुप गुलाम भारत मे जारी व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन आज़ाद भारत मे पूर्णतया खत्म हो गया और ब्राह्मणवाद का शिकंजा बहुजनो पर जबरदस्त तरीके से कस गया. जिससे बचने के लिये चापलूषि / चमचागिरी का धंधा बड़े जोर शोर से चल पड़ा. समाज मे चमचो/दलालो की पूरी फ़ौज ही खड़ी हो गयी. आज़ाद भारत मे पूना पॅक्ट न केवल SC पर बल्कि ST और अल्प संख्यकों पर भी लागू हो गया. लेकिन OBC को इस आधुनिक मनुस्म्रति की जकड मे आने मे भी तीन पीरियों का इंतजार करना पारा. क्युकि अछूतो को गाँधी और कॉंग्रेस ने 24 सिटमबेर 1932 मे जकड़ा था लेकिन OBC को उसी जकडॅन मे आने मे भी 60 साल लग गये. जिसके लिये OBC को सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेना पड़ा अर्थात सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 16 नवेंबर 1992 को आरक्षण क्रीमी लेयर के साथ मिल पाया वो भी मनुवादी नहीं देना चाह रहे थे. अब तक पूना पॅक्ट की गुलामी ना केवल राजनीति मे है बल्कि अब ये शिक्षा और नौकरियों मे भी पैर पसार चुकी है. जिससे बहुजनो की गुलामी हर जगह हर स्तर पर सुनिसचित हो गई है. ऐशा क्यूं हुआ बाबासाहेब कहते है कि poona pact disfranchised our people. बाबासाहेब आगे कहते है कि our MP/MLA are opening their mouth only for owing, that Is also because it Is a natural call. यही दो वोटों का अधिकार और प्रथक निर्वाचन मंडल भारत सरकार अधिनियम 1909 के द्वारा सिखों, मुस्लिम, जैन, पारसी etc को मिला हुआ था लेकिन गाँधी और कॉंग्रेस को आज़ादी मिलते ही सब खा गये.
बाबासाहेब कहते है कि लोकतंत्र लोगो का, लोगों के लिये और लोगों के द्वारा ही होता है जिसे गांधीवादी कॉंग्रेस और BJP ने ब्राह्मणो का, ब्राह्मणो के लिये और ब्राह्मणो के द्वारा बना दिया. इस तरह से डेमॉक्रेसी को ब्राह्मणोक्रेसी मे तब्दील कर दिया. इसी लिये बाबासाहेब कहते है कि “we the people of india that Is bharat solemnly declare that india Is a SOVEREIGN, SOCIALIST, SECULAR, DEMOCRATIC AND REPUBLIC. क्यूं कि लोक तंत्र मे राजा रानी के पेट से नहीं बल्कि बॅलट बॉक्स/ वोटिंग मशीन से पैदा होता है. लेकिन ब्राह्मणो ने लोकतंत्र को परिवार तंत्र मे परिवर्तित कर बहू दलीय लोकतांत्रिक प्रणाली को दो दलीय जोकतंत्र मे परिवर्तित कर सत्ता पर अनियंत्रित नियंत्रण कर बहुजनो कि आज़ादी के सारे रास्ते बंद करने मे अंतिम कील ठोंकी.
साथियो गाहें विचार विमर्श के बाद मे यह निस्कर्स पर पहुंचा कि यह सारा का सारा अनर्थ और पाप केवल इस बजह से हुआ क्यू कि गाँधी और कॉंग्रेस के खोल मे क्छिपे भेड़ियों ने हमारे दो वोटों का अधिकार, प्रथक निर्वाचन मंडला और निर्वाचन कॉलेज कि व्यवशता को क्चीना. आज आरक्षण व्यवशता लहू हुआ लगभग 82 साल हो गये है. आरक्षण समाज कि प्रगती मे सक्षम साबित नहीं हुआ है. इस लिये हमे समाज हिट मे समस्त राग, द्वेष अवाम मोग युक्त होकर 17 अगस्त 1932 को प्राप्त हुई आज़ादी को हाशिल करने से ही महापूर्षो के सपनो का भारत निर्माण करना संम्भव होगा.
मिशन मे आपका साथी
डा बिनोद कुमार नागल्यायन.
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